देश को तमाम बड़ी शख्सियत देने वाली यूनिवर्सिटी टॉप-100 से बाहर
इलाहाबाद। देश की जिस यूनिवर्सिटी की साख सात समंदर पार कोहिनूर के हीरे की तरह थी और जहां से पढ़कर देश-दुनिया में अपनी अलग छाप छोड़ने वाले विद्यार्थी निकले. आज वह कॉलेज इतना पिछड़ चुका है कि देश के टॉप यूनिवर्सिटीज में उसका दूर-दूर तक कहीं नामोनिशान नजर नहीं आ रहा है। यह हम नहीं केंद्र सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़े कह रहे हैं। देश को नामी-गिरामी शख्सियत देने वाली यूनिवर्सिटी आज शिक्षा के क्षेत्र में इतनी पिछड़ चुकी है कि वह आधिकारिक यूनिवर्सिटी की रैंकिंग में अपना स्थान दर्ज नहीं करा पा रही है। हम बात कर रहे हैं यूपी के इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की। जी हां पूरब का आक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय को देश की टॉप 100 यूनिवर्सिटी में जगह नहीं मिल पाई है। यह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के लिए बड़ा झटका तो है ही, लगातार यूनिवर्सिटी की गिरती साख को उबार न पाने वाली नीतियों और नेतृत्व पर भी सवाल उठ रहा है।

एनआईआरएफ ने जारी की सूची
बता दें कि केंद्रीय मानव विकास संसाधन मंत्रालय की संस्था (एनआईआरएफ) नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क ने मंगलवार को देशभर के शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की सूची जारी की है। इसमें बेंगलूरू को जहां पहला स्थान मिला है, वहीं पूरब के ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले और पूरी दुनिया में अपनी शिक्षा के लिए ख्याति प्राप्त इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को टॉप-100 तक में जगह नहीं मिल पाई है। एनआईआरएफ की रैंकिंग में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की साख लगातार धूमिल होती चली जा रही है।
नहीं हो रहा यूनिवर्सिटी में सुधार
अगर पिछले साल का यही रिकॉर्ड देखें, यानी 2017 की रैंकिंग सूची को देखें तो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को 27 पायदान का नुकसान हुआ था। तब से लगातार उम्मीदें बनी हुई थी कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी फिर से सुधार की दिशा में आगे बढ़ेगी और यहां शिक्षा व्यवस्था बेहतर होने के साथ रैंकिंग में सुधार होगा, लेकिन 2018 की जारी रैंकिंग सूची में इलाहाबाद विश्वविद्यालय को बहुत बड़ा झटका लगा और टॉप-100 विश्वविद्यालयों की सूची तक में वह जगह नहीं बना सका। फिलहाल यह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के लिए शर्मनाक विषय है और अपनी गिरती साख को बचाने के लिए कहीं ना कहीं यूनिवर्सिटी के शैक्षिक महत्व को और शैक्षिक नीतियों में बदलाव लाने की आवश्यकता है ।
68 से चला और 100 के बाहर
बता दें कि पिछले 3 सालों से केंद्र सरकार देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग जारी कर रहा है। 2016 में पहली बार केंद्र सरकार की ओर से रैंकिंग जारी हुई थी। 2016 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय को देशभर के विश्वविद्यालय में से 68 वां स्थान मिला था, लेकिन 2017 में वह 27 पायदान नीचे खिसक कर 95 स्थान पर पहुंच गया। पर इस बार इलाहाबाद यूनिवर्सिटी टॉप -100 में भी जगह नहीं बना सका है। जिसका कारण साफ है यूनिवर्सिटी में अराजकता और शैक्षणिक माहौल का राजनैतिक माहौल में बदल जाना। शिक्षक-शिक्षार्थियों और यूनिवर्सिटी प्रशासन में सामंजस्य की कमी के साथ ही कुलपति को लेकर लगातार चल रहा स्टूडेंट आंदोलन।
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