इलाहाबाद: रेल हादसे की बड़ी साजिश, रेलवे ट्रैक से किए गए 900 पेंड्रोल क्लिप गायब

मामले कि भनक बुधवार को ही रेल प्रशासन को लग गई थी लेकिन मीडिया से खबर बचाने के लिए बिना किसी बाहरी सुगबुगाहट के डैमेज कंट्रोल शुरू हुआ।

इलाहाबाद। सूबे के अलग-अलग हिस्सों में लगातार हो रहे ट्रेन हादसे की साजिश की बातें सामने आ रही हैं। इलाहाबाद में जो कुछ रेलवे ट्रैक पर दिखा उससे तो पुख्ता-सबूत भी मिल गए कि ट्रेन को पलटने की बड़े पैमाने पर साजिश चल रही है। इलाहाबाद रेलवे स्टेशन के नजदीक सूबेदारगंज में सैकड़ों जगह पर रेलवे ट्रैक से पेंड्रोल क्लिप निकाल लिए गए हैं। 900 के करीब पेंड्रोल क्लिप पटरियों पर नहीं मिले है। जिससे पटरियां कमजोर हो गई हैं। जिससे यहां से ट्रेन गुजरने के दौरान उनके पलटने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। हालांकि रेलवे के कानों तक ये खबर पहुंचते ही पटरियों पर आवागमन रोक दिया गया और युद्ध स्तर पर रेल प्रशासन डैमेज कंट्रोल में जुट गया है।

इलाहाबाद: रेल हादसे की बड़ी साजिश, रेलवे ट्रैक से किए गए 900 पेंड्रोल क्लिप गायब

मामले कि भनक बुधवार को ही रेल प्रशासन को लग गई थी लेकिन मीडिया से खबर बचाने के लिए बिना किसी बाहरी सुगबुगाहट के डैमेज कंट्रोल शुरू हुआ। जांच टीम अब ये भी पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में पेंड्रोल क्लिप गायब कैसे हुए। क्योकि ट्रेनों के संचालन के दौरान रेलपथ पर लगे क्लिप कई बार गिर जाते हैं। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में गिरना कहीं से भी साधारण नहीं लगता। बता दें कि अगर कई पेंड्रोल क्लिप स्लीपर से हट जाएं तो रेल ट्रैक टेढ़ा हो जाता है और ट्रेन भी पटरी से उतर जाती है।

इलाहाबाद: रेल हादसे की बड़ी साजिश, रेलवे ट्रैक से किए गए 900 पेंड्रोल क्लिप गायब

मामले में एनसीआर के सीपीआरओ विजय कुमार का कहना है की रेलपथ पर लगे क्लिप कई बार गिर जाते हैं जिसे की-मैन बाद में लगा देते हैं। पैदल निरीक्षण के दौरान पेंड्रोल क्लिप गिरने की बात सामने आई है। जो भी स्लीपर टूटे हैं उनकी दूरी 50 मीटर से ऊपर की है।

जीआरपी ने चलाया अभियान

दरअसल दो दिन पहले ही जीआरपी ने ट्रक जांच के लिए सघन चेकिंग अभियान चलाया था। हालांकि ये जांच जीआरपी के काम का ही हिस्सा होता है। लेकिन इलाहाबाद के पहले पड़ने वाले सूबेदारगंज स्टेशन के पास ही कई पेंड्रोल क्लिप ट्रैक से नदारद दिखे थे। टीम ने एनसीआर मुख्यालय की तरफ जाने वाले रेलवे ट्रैक की जांच शुरू कर दी। कुछ ही दूरी में जीआरपी भौचक रह गई। क्योंकि 40 से 50 की संख्या में पेंड्रोल क्लिप गायब थे। जीआरपी को
साजिश की शंका हुई तो वायरलेस पर अधिकारियों को जानकारी दी गई। इसके बाद बड़ी संख्या में पेंड्रोल क्लिप के गायब होने से एनसीआर मुख्यालय से लेकर डीआरएम ऑफिस तक हड़कंप मच गया।

इलाहाबाद: रेल हादसे की बड़ी साजिश, रेलवे ट्रैक से किए गए 900 पेंड्रोल क्लिप गायब

रेलवे ने दिए जांच के आदेश

हड़कंप के बीच रेलवे अफसरों ने आरपीएफ को ट्रैक जांच करवाने के निर्देश दे दिए। इसके बाद आरपीएफ टीम ने अपनी जांच शुरू की और ट्रैक कि फुल मॉनिटरिंग शुरू हुई। निरीक्षण के दौरान अप लाइन में 380 और डाउन लाइन में 446 पेंड्रोल क्लिप गायब थे। जबकि अप लाइन में 14 स्लीपर और डाउन लाइन में 30 स्लीपर भी टूटे मिले। अब रेलवे को नई सूचना प्रसारित हुई कि 30 स्लीपर भी टूटे हैं। मामला साजिश का समझ में आया तो रेल महकमे में हड़कंप मच गया। अब मामले में अफसर सीधे-सीधे कुछ भी कहने से बच रहे हैं। लेकिन सूत्रों की मने तो इलाहाबाद में ये किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है और मीडिया से बचकर अब इस मामले कि जांच की जाएगी। क्योंकि मामले की रिपोर्ट डीजीपी और रेलवे को भेजी गई है।

इलाहाबाद: रेल हादसे की बड़ी साजिश, रेलवे ट्रैक से किए गए 900 पेंड्रोल क्लिप गायब

दूसरे दिन भी वही हाल

जीआरपी ने इलाहाबाद के नैनी रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक से 45 पेंड्रोल क्लिप गायब होने कि रिपोर्ट भी दी गई हैं। जबकि 6 स्लीपर भी टूटे मिले हैं। ये एक दिन पहले हुई जांच के बाद की कार्रवाई में पता चला है। अब रेलवे ने इलाहाबाद के आस-पास पूरे ट्रैक पर गहन जांच के आदेश भी दिए हैं। संभव है कि रेल पलटने की बड़ी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया जा रहा है। फिलहाल जीआरपी ने इलाहाबद से प्रयाग और फाफामऊ तक का दौरा किया है। इस रूट पर पेंड्रोल क्लिप गायब होने कि रिपोर्ट सामान्य बताई जा रही है। जिनकी संख्या 100 के आस-पास है। फिलहाल इलाहाबाद-प्रतापगढ़ रूट पर भी जांच चल रही है।

पेंड्रोल क्लिप की तकनीकी फिटिंग

रेलवे के तकनीक विशेषज्ञ बताते हैं की एक स्लीपर में चार पेंड्रोल क्लिप की फिटिंग होती है। जबकि एक किलोमीटर के क्षेत्र में तकरीबन 1500 पेंड्रोल क्लिप रेलवे ट्रैक पर होते हैं। इसी तरह हर एक स्लीपर को चार पेंड्रोल क्लिप जोड़ते हैं। अगर लगातार कई पेंड्रोल क्लिप स्लीपर से हट जाएं तो रेल ट्रैक टेढ़ा हो जाता है और फिर ट्रेन के डिरेल होने कि आशंका बढ़ जाती है।

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