इलाहाबाद: जिस रास्ते से कुछ देर पहले गुजरा था डीजीपी का काफिला, वहीं मारी वकील को गोली
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह और मुख्य सचिव राजीव कुमार आज इलाहाबाद में थे और शहर में अधिवक्ता हत्याकांड के पहले वह घटना स्थल से ही गुजरे थे। दोनों शीर्ष अधिकारियों का काफिला जिस रास्ते से गुजरा था, उसी रास्ते पर कुछ मिनटों बाद ही अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यानी जिस रास्ते पर थोड़ी देर पहले बिल्कुल कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी, पूरे रास्ते पुलिस कांस्टेबल व गश्ती दल अपनी पारखी नजर और सतर्कता लगाए हुआ था, उस रास्ते पर ही बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। वहीं दूसरी ओर पोस्टमॉर्टम के बाद जैसे ही वकील राजेश श्रीवास्तव का शव इनके आवास पहुंचा वहां लोगों का जमावड़ा लग गया। किसी बवाल व अशांति फैलने की संभावना को देखते हुए पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

प्री प्लान था मर्डर
इससे यह तो साफ है कि वारदात को प्री प्लान किया गया था और पहले से ही घटनास्थल को लेकर शूटरों ने अपनी रणनीति बनाई हुई थी। यही कारण था कि इतनी टाइट सुरक्षा होने के बावजूद भी बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया। वह भी बेहद ही भीड़ भाड़ वाले इलाके में। दरअसल जिस स्थान पर अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव को गोली मारी गई वह रास्ता कलेक्ट्रेट की ओर जाता है और उसी रास्ते का इस्तेमाल कर चीफ सेक्रेटरी व डीजीपी का काफिला थोड़ी देर पहले ही जिला प्रशासन की अगुवाई में गुजरा था।

कुंभ की समीक्षा में आए थे अधिकारी
इस बात पर सवाल जरूर उठ रहे हैं कि जब चीफ सेक्रेटरी और यूपी पुलिस के डीजीपी इलाहाबाद में थे, ऐसे में कानून व्यवस्था के लिए खूब चौकसी बरती गई थी। लेकिन, बदमाशों का इस तरह से वारदात को अंजाम देना कहीं ना कहीं पुलिस के इकबाल को चुनौती दे रहा है। आज दोनों अधिकारी कुंभ कार्यों को लेकर निरीक्षण करने पहुंचे थे और यही पर क्राइम मीटिंग भी उन्होंने की थी । अपराध पर चर्चा करते हुए कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने का निर्देश दिया था। लेकिन, उनके यहां से गुजरते ही दिनदहाड़े बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया और बताया कि सारी क्राइम मीटिंग उनके लिए कोई मायने नहीं रखते।

पोस्टमॉर्टम के बाद घर पहुंचा वकील का शव घर पर हजारों उमड़ा जनसैलाब
इलाहाबाद में बदमाशों की गोली का शिकार हुए अधिवक्ता राजेश कुमार श्रीवास्तव के पोस्टमार्टम के बाद उनका शव घर पहुंच गया है। शव पहुंचने से पहले ही हजारों लोग उनके घर के बाहर जमा हुए हैं और शव पहुंचने के बाद यह भीड़ जनसैलाब में बदल गई है। किसी बवाल व अशांति फैलने की संभावना को देखते हुए पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। अधिवक्ता संघ के जो पदाधिकारी हैं उनसे व परिजनों से लगातार पुलिस अधिकारी व प्रशासनिक अफसर बातचीत कर रहे हैं , ताकि कोई भी मामला बढ़ने न पाए। जबकि मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए आश्वासन व मुआवजे की भी जानकारी परिजनों को दे दी गई है और हर संभव मदद के साथ न्याय दिलाने का आश्वासन दिया जा रहा है ।

शव का अंतिम संस्कार कराने का प्रयास
लगातार प्रशासनिक अधिकारी यह प्रयास कर रहे हैं कि मामला अब और अधिक तूल न पकड़े। क्योंकि पूरे दिन इलाहाबाद में बवाल का दौर चलता रहा और बड़ी मुश्किल से बवाल थमा है। ऐसे में अगर शव पहुंचने के बाद उसका अंतिम संस्कार देर शाम तक ना हुआ तो कल फिर से माहौल बिगड़ सकता है। हालांकि अभी परिजन अंतिम संस्कार करने को लेकर कोई कदम नहीं उठा रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं और संभावना है कि राजेश श्रीवास्तव के पार्थिव शरीर का आज ही अंतिम संस्कार कर दिया जाए ।

गृह मंत्रालय ले रहा रिपोर्ट
बता दे कि आज सुबह कचहरी से पहले मनमोहन पार्क के पास राजेश श्रीवास्तव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके बाद पूरे शहर में अधिवक्ताओं ने जमकर बवाल काटा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने कार्य का बहिष्कार कर दिया था और प्रदर्शन करते हुए कार्रवाई की मांग की थी। बता दें कि घटना के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में जगह-जगह अधिवक्ता संगठन सड़क पर उतर आए हैं और उनके प्रदर्शन के बाद से प्रदेश में बिगड़ रहे माहौल को देखते सरकार की ओर से भी इस मामले में लगातार बनाए रखी गई है और हर पल की रिपोर्ट गृह मंत्रालय ले रहा है।












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