VIDEO: बैंक मैनेजर की आपबीती, नोटबंदी में लोग कहते थे या तो मार देंगे या फिर खुद मर जाएंगे
अलीगढ़। आज नोटबंदी को एक साल पूरे हो गए हैं। नोटबंदी के दौरान बेशक सभी को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा था। लेकिन बता दें कि परेशानी का सामना सिर्फ आम जनता को ही नहीं बल्कि बैंक के कर्मचारियों और अधिकारियों को भी करना पड़ा था। यहां एक बैंक मैनेजर ने खुलासा किया है कि नोटबंदी के बाद बैंक के बाहर लगी भीड़ जब अंदर काउंटर पर आती थी तो लोग धमकी देते थे कि हम बहुत परेशान हो गए हैं, पैसे निकालकर दे दो नहीं तो तुम्हें मार देंगे या खुद मर जाएंगे।

दरअसल देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आज से एक वर्ष पहले नोटबंदी का बड़ा फैसला लेकर हर तरफ हाहाकार मचा दिया था। जिसके बाद कई महीनों तक लोग घरों से बाहर निकल कर बैंकों के भीतर और बाहर लाइनों में लग गए थे। एक वर्ष पूरा हो जाने के बाद सरकार इसकी उपलब्धियां गिना रही है। लेकिन उस दौर में बैंक कर्मियों ने किस तरह से दिन बिताए उसको लेकर अलीगढ़ के बैंक कर्मियों से जानकारी की गई तो काफी चौकाने वाले मामले सामने आए। अलीगढ़ की ग्रामीण बैंक के मैनेजर ने बताया कि नोटबंदी के बाद बैंकिंग कार्य में किसी तरह का फर्क नहीं आया है। हालांकि कुछ नियमों में बदलाव आया है, जिससे लोगों को अब पैसे सही प्रकार से मैनेज करके जमा करवा पा रहे है।

डिजिटल पर ग्रामीण बैंक काम कर रही है, तो वहीं बैंक में आ रही भीड़ के व्यवहार के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि पहले तो लोग कह रहे थे कि बैंककर्मी बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं। लेकिन फिर स्थिति ये हो गई कि बैंकर्स पर ही आरोप लगने लगे। लोगों ने धमकियाँ तक दीं कि आपको गोली मार दें या अपने बच्चे को जला डालूं। ऊपर से कैश की व्यवस्था कुछ ठीक नहीं थी। कुछ बैंक कर्मचारी इस तरह के प्रेशर को झेल नहीं पाए और वह गुजर गए। लोगों अभद्र गालियों का भी प्रयोग किया लेकिन सभी व्यवस्थाओं को झेला है। अब स्थिति सामान्य है।
वहीं मुख्य प्रबंधक का कहना है कि सभी व्यवस्थाओं को बनाकर काम किया था। नोटबंदी के बाद अगले तीन महीनों तक रूपये धन राशि की जो सीमा थी वह सामान्य से दस गुना हो गई थी। तो वहीं एक महिला खाताधारक ग्राहक ने नोटबंदी को रूपये को स्टॉक करने वालों खिलाफ अच्छा बताया।












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