रिकॉर्ड मतों से जीतने के बावजूद करहल से इस्तीफा देंगे अखिलेश, जानिए क्यों
लखनऊ, 12 मार्च: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं। नतीजे आने के बाद यूपी में पूर्णबहुमत की सरकार बनने जा रही है। समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव इस बार करहल से चुनाव लड़े थे और रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी। ऐसा माना जा रहा था कि अखिलेश यादवलैंड में सपा को मजबूत करने के लिए ये कदम उठा रहे हैं। चुनाव में सपा को 111 सीटें मिली हैं जिसमें करहल भी शामिल है। सपा के सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव करहल से इस्तीफा दे सकते हैं क्योंकि अब उनकी निगाहें 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर हैं और ऐसी स्थिति में वो आजमगढ़ से नाता नहीं तोड़ना चाहेंगे।

करहल से अखिलेश के लड़ने का सपा को मिला फायदा
अखिलेश यादव इस बार करहल से विधानसभा चुनाव लड़े थे। यहां जनता ने उन्हें रिकॉर्ड मार्जिन से जिताया है। करहल में हालांकि यादव बिरादरी ज्यादा होने की वजह से अखिलेश को यहां से जीतने में उनके सामने कोई कठिनाई नहीं आई। बीजेपी ने अखिलेश को करहल में घेरने की कोशिश की और केंद्रीय मंत्री एसपपी बघेल को मैदान में उतार दिया। लड़ाई यहां पर हाईप्रोफाइल जरूर हो गई लेकिन अखिलेश की जीत एकतरफा रही थी। अखिलेश के लड़ने की वजह से सपा ने यादवलैंड में अच्छा प्रदर्शन किया है। अब अखिलेश के लिए ये फैसला लेना भारी पड़ेगा कि वो करहल से इस्तीफा दें या नहीं।
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आजमगढ़ में सपा ने सभी 10 सीटें जीतीं
आजमगढ़ को सपा का गढ़ कहा जाता है। हालांकि अखिलेश यादव यहां से सांसद भी हैं लिहाजा से आजमगढ़ से उनका जुड़ाव बना हुआ है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि अखिलेश आजमगढ़ से इस्तीफा देंगे तो यहां समय से पहले उपचुनाव कराना पड़ेगा जो सपा कभी नहीं चाहेगी। आजमगढ़ में बीजेपी पहले ही अखिलेश और सपा की घेरेबंदी में जुटी हुई है। इस चीज को अखिलेश भी अच्छे से जानते हैं। अखिलेश को पता है कि करहल में उपचुनाव कराकर सपा को जिताना आसान है लेकिन आजमगढ़ में बीजेपी अखिलेश को हराने के लिए बड़ा दांव खेल सकती है। सपा के सूत्र भी बताते हैं कि अखिलेश अभी आजमगढ़ से सांसद बने रहेंगे और करहल से इस्तीफा दे सकते हैं। आजमगढ़ में इस बार सपा सभी दस सीटें जीत चुकी है।

करहल और आजमगढ़ में किसी एक को चुनने का संकट
अखिलेश यादव के सामने इस बात का संकट है कि करहल से इस्तीफा दें या आजमगढ़ की सांसदी से। सपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अखिलेश के लिए चुनाव करना बेहद कठिन है क्योंकि करहल में जहां उनका अपनों से जुड़ाव है वहीं दूसरी ओर आजमगढ़ भी अखिलेश के दूसरे घर जैसा है। अखिलेश यादव करहल और आजमगढ़ में से आजमगढ़ में ही चुनेंगे क्योंकि दो साल बाद आम चुनाव होने हैं और इस लिहाज से आजमगढ़ में अपनी मौजूदगी बनाए रखना अखिलेश के लिए बहुत जरूरी भी है।

मिशन 2024 पर रहेंगी अब सपा की निगाहें
लोकसभा में समाजवादी पार्टी के पांच सांसद हैं। मैनुपरी से मुलायम सिंह यादव, आजमगढ़ से अखिलेश यादव, रामपुर से आजम खान, मुरादाबाद से एसटी हसन, संभल से शुफीकुर्रहमान बर्क शामिल हैं। पिछली बार के लोकसभा चुनाव में परिवार के ही कई दिग्गज चुनाव हार गए थे। बदायूं से धर्मेंद्र यादव, फिरोजाबाद से तेज प्रताप और कन्नौज से डिंपल यादव को हार मिली थी। इस बार चूंकि सपा पिछले विधानसभा चुनाव की अपेक्षा अच्छी पोजिशन में है लिहाजा लोकसभा चुनाव में सपा के ज्यादा सीट जीतने की चुनौती होगी। सपा के नेताओं के मुताबिक इस बार पार्टी को पिछली बार से ज्यादा सीटें मिलेंगी। विधानसभा चुनाव के सम्पन्न होने के साथ ही लोकसभा चुनाव की तैयारियों का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा।












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