विधान परिषद चुनाव में अखिलेश के सामने 'साख' बचाने की चुनौती, जानिए BJP ने क्यों झोंकी पूरी ताकत

लखनऊ, 16 मार्च: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सम्पन्न होने के बाद अब सभी दलों ने विधान परिषद के चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब राज्य के उच्च सदन यानी विधान परिषद में बहुमत की लड़ाई तेज हो गई है। यूपी में स्थानीय निकायों की 36 सीटों पर एमएलसी चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने लामबंदी शुरू कर दी है। दरअसल ये चुनाव इस मायने में भी अहम माने जा रहे हैं कि हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार सफलता मिली थी।

अखिलेश पर साख बचाने की चुनौती

अखिलेश पर साख बचाने की चुनौती

अखिलेश यादव के सामने ऊपरी सदन में अपनी साख बचाने की चुनौती है. दूसरी ओर योगी के नेतृत्व में बीजेपी इस चुनाव में भी अपना दमखम दिखाने की तैयारी कर रही है. उत्तर प्रदेश विधान परिषद में इस समय समाजवादी पार्टी का बहुमत है। सपा के पास परिषद में 48 सीटें हैं, जबकि भाजपा के पास 36 सीटें हैं। हालांकि, सपा के आठ एमएलसी अब बीजेपी में चले गए हैं. वहीं, बसपा के एक एमएलसी भी बीजेपी में शामिल हो गए हैं।

उच्च सदन में पॉवर बढ़ाने की कवायद

उच्च सदन में पॉवर बढ़ाने की कवायद

ऊपरी सदन में किसकी ताकत रहेगी, यह निचले सदन यानी विधानसभा में पार्टियों की ताकत पर भी निर्भर करता है। आमतौर पर यह चुनाव सत्ता का माना जाता है। अब तक के रिकॉर्ड यही कहानी बयां करते हैं। मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में 2004 में हुए चुनाव में सपा ने 36 में से 24 सीटें जीती थीं। बसपा के पास एक भी सीट नहीं थी। 2010 में जब इन सीटों पर चुनाव हुए थे तब बसपा सत्ता में थी। उसने 36 में से 34 सीटें जीतकर लगभग क्लीन स्वीप कर लिया था। इसके बाद जब फरवरी-मार्च 2016 में अखिलेश यादव के सीएम बने तो सपा ने 31 सीटों पर जीत हासिल की। इसमें 8 सीटों पर निर्विरोध जीत भी शामिल थी जबकि पहले सपा ने केवल एक सीट जीती थी।

विधान परिषद में 36 एमएलसी चुने जाएंगे

विधान परिषद में 36 एमएलसी चुने जाएंगे

राज्य में स्थानीय निकाय कोटे की विधान परिषद में 35 सीटें हैं। इसमें मथुरा-एटा-मैनपुरी सीट से दो प्रतिनिधि चुने जाते हैं, इसलिए 35 सीटों के लिए 36 सदस्यों का चयन किया जाता है। आमतौर पर ये चुनाव विधानसभा से पहले या बाद में होते रहे हैं। इस बार 7 मार्च को कार्यकाल खत्म होने की वजह से चुनाव आयोग ने विधानसभा के बीच में ही इसकी घोषणा कर दी थी. बाद में विधानसभा चुनाव को देखते हुए परिषद के चुनाव स्थगित कर दिए गए। स्थानीय निकाय की सीटों पर सांसद, विधायक, नगरीय निकायों के निर्वाचित सदस्य, छावनी बोर्ड, जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के सदस्य, ग्राम प्रधान मतदाता होते हैं।

MLC चुनाव को लेकर नामों पर बीजेपी की मुहर

MLC चुनाव को लेकर नामों पर बीजेपी की मुहर

सूत्रों का कहना है कि शनिवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में भारतीय जनता पार्टी संगठन ने स्थानीय निकाय के एमएलसी के नाम तय किए हैं। इनमें समाजवादी पार्टी के कुछ एमएलसी को ही टिकट दिया जाएगा, बाकी बीजेपी कार्यकर्ताओं के नाम पर मुहर लगा दी गई है। इनकी सूची जल्द ही जारी कर दी जाएगी। विधानसभा चुनाव में बीजेपी को पुर्ण बहुमत मिला है लिहाजा पार्टी के नेता और कार्यकर्ता काफी उत्साहित हैं।

MLC चुनेगी स्थानीय प्रतिनिधि

MLC चुनेगी स्थानीय प्रतिनिधि

36 सीटों पर होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए 15 मार्च से नामांकन शुरू होंगे। पहले चरण के लिए 22 मार्च तक नामांकन किया जा सकता है। 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और 25 तक नामांकन वापस लिया जा सकेगा। वह नामांकन मान्य होगा। मतदान 9 अप्रैल को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। मतदाता सूची में प्रमुख, बीडीसी, डीडीसी, जिला पंचायत अध्यक्ष, निकायों के पार्षद, सांसद और विधायक आदि शामिल होंगे।

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