जेपी और बाबा साहब अम्बेडकर के बाद मुलायम को इस तरह भुनाएगी BJP ? समझिए इसके पीछे की गणित
Bhartiya Janta Party ने आम चुनाव से पहले यूपी में सभी जातियों में अपनी पैठ बनाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। बीजेपी पसमांदा मुसलमानों को लुभाने के लिए सम्मेलन कराने से लेकर रोजगार मेले लगवाने में जुटी है। कुछ दिनों पहले ही जननायक जय प्रकाश नारायण की जन्मस्थली सिताबदियारा का दौरा गृहमंत्री अमित शाह और यूपी के सीएम योगी ने किया था। इस दौरान दोनों ही नेताओं ने जेपी के बहाने सपा के परिवारवाद पर हमला बोला था। बीजेपी की कोशिश अखिलेश के यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की है। इसी रणनीति के तहत बलिया के बीजेपी सांसद ने जिले में मुलायम सिंह यादव के नाम पर सभागार बनवाने का ऐलान किया है।

बीजेपी सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने की घोषणा
दरअसल के बलिया सांसद वीरेंद्र सिंह ने मंगलवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र में दिवंगत सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के नाम पर एक सभागार के निर्माण की घोषणा की थी। सिंह ने इसके लिए सांसद निधि से 25 लाख रुपये मंजूर किए हैं। सभागार का नाम 'धरतीपुत्र' मुलायम सिंह यादव रखा जाएगा। सांसद ने कहा कि यह राष्ट्रीय राजनीति में मुलायम के योगदान और पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए दिवंगत नेता द्वारा किए गए कार्यों के लिए उनकी श्रद्धांजलि है। सिंह मंगलवार को सिविल वकील बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम की अध्यक्षता करने देवरिया में थे।

बीजेपी सांसद ने मुलायम सिंह की जमकर की तारीफ
मुलायम के योगदान को याद करते हुए सांसद ने कहा कि सपा के मुखिया उल्लेखनीय प्रतिभा वाले नेता थे। जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने वाले जमीनी स्तर के नेता होने के लिए उनकी सराहना की गई। सांसद ने कहा कि, "उन्होंने समर्पण के साथ सेवा की और कड़ी मेहनत से जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया की विचारधारा को लोकप्रिय बनाया। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई। वह आपातकाल के दौरान एक महान सैनिक थे। एक रक्षा मंत्री के रूप में, मुलायम सिंह जी ने देश के लिए कुशलता से काम किया। संसद में, वह राष्ट्रीय हित को बढ़ावा देने पर जोर देते थे।"

यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में बीजेपी
राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह ने कहा कि, ''बीजेपी अपनी रणनीति के अनुसार ही आगे बढ़ने का काम कर रही है। मुलायम सिंह यादव के नाम पर बलिया में सभागार बनाने का ऐलान करना उसी रणनीति का एक हिस्सा है। बीजेपी की कोशिश है कि अखिलेश मुलायम के निधन के बाद उनकी इमेज का माइलेज न लेने पाएं। इसको रोकने के लिए बीजेपी ने पूरी प्लानिंग की है। बीजेपी ने इससे पहले जय प्रकाश नारायण और बाबा साहब अंबेडकर को लेकर मुहिम चलाया था। अंबेडकर की जयंती पर तो यूपी में पूरे प्रदेश में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था। जिस तरह बीजेपी ने अपनी रणनीति से मायावती के वोटरों को भ्रमित करने की कोशिश की उसी तरह अब यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश जारी है।''

विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने कराया यादव सम्मेलन
दरअसल बीजेपी ने यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की कवायद विधानसभा चुनाव के दौरान ही शुरू कर दिया था। इसी रणनीति के तहत लखनऊ में एक बड़ा यादव सम्मेलन भी कराया गया था। यादव सम्मेलनों का खाका ओबीसी मोर्चा ने तैयार किया था। बीजेपी ने चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में छोटी-छोटी जातियों से जुड़ी 200 से ज्यादा रैलियां और 75 सम्मेलन आयोजित की थी। बीजेपी की प्लानिंग के अनुसार इन समुदाय विशेष से जुड़ी रैलियों में केंद्रीय स्तर के नेताओं को भी बुलाया गया था।

मैनपुरी में सपा के खिलाफ बीजेपी खेलेगी बड़ा दांव
दरअसल मुलायम के निधन के साथ ही 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले उपचुनाव को लेकर अटकलें भी शुरू हो गई हैं। हालांकि बीजेपी (Bhartiya Janta Party) का दावा है कि मैनपुरी सीट से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (PSP) के अध्यक्ष और मुलायम सिंह के छोटे भाई शिवपाल यादव ( Shivpal Yadav) लोकसभा उपचुनाव लड़ सकते हैं और बीजेपी उनका समर्थन कर सकती है। मैनपुरी से चुनाव लड़ने का फायदा भी शिवपाल को मिल सकता है। यदि वो जीते तो जसवंतनगर की सीट से बेटे आदित्य यादव को बीजेपी के सहयोग से विधानसभा भेज सकते हैं। बीजेपी का यह दांव भी अखिलेश के वोट बैंक में एक सेंध लगाने का ही प्रयास साबित हो सकता है।












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