पीएम मोदी के ससंदीय क्षेत्र में कन्हैया कुमार को नहीं मिली एंट्री, जानिए क्यों
वाराणसी। कन्याकुमारी से चली ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (AISA) और आल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIUF) के नौजवानों की ''बचाओ भारत-बदलो भारत'' यात्रा रविवार को वाराणसी पहुंची। ''बचाओ भारत-बदलो भारत'' सांप्रदायिकता के खिलाफ एक अभियान है। आयोजकों का कहना है कि इस यात्रा में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को भी जाना था लेकिन प्रशासन ने उन्हें अनुमति नहीं दी। पूर्वांचल में इस यात्रा के प्रभारी अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AIUTC) के प्रदेश सचिव अजय मुखर्जी का कहना है कि यात्रा के साथ छात्र नेता कन्हैया कुमार के बनारस आने को लेकर एडीएम (सिटी) को आवेदन देकर अनुमति मांगी गई थी।

मुखर्जी ने आरोप लगाया कि डीएम को जब आवेदन सौंपा गया था तो उन्होंने कन्हैया कुमार का नाम देखते ही आवेदन लेने से इंकार कर दिया। इसके अवाला एसएसपी, डीआईजी और डीजीपी तक को पत्र भेजा गया था लेकिन कहीं से भी कोई जवाब नहीं आया। मुखर्जी ने कहा कि यात्रा को सुरक्षा न मिलने के चलते गाजीपुर में नौजवानों की बस पर पथराव कर क्षतिग्रस्त कर दिया।
वहीं गाजीपुर होते हुए यात्रा वाराणसी सीमा के चौबेपुर इलाके में पुहंची तो वहां जोरदार स्वागत हुआ। यात्रा में शामिल नौजवानों की टोली के साथ सीपीआई नेता सुभासिनी अली भी रहीं। मुंशी प्रेमचंद, डॉ. भीमराव अम्बेडकर और चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद आजाद पार्क में हुई सभा में सांप्रदायिकता के खिलाफ देशभर के छात्र और नौजवानों से एकजुट होने का आह्वान किया गया।
देश में बेरोजगारी बढ़ रही है, पीएम विदेश घूम रहे हैं
यात्रा कन्याकुमारी से 11 जुलाई को आरंभ हुई थी। वाराणसी पहुंचने पर वक्ताओं ने कहा कि भाजपा सरकार ने युवाओं से वादा किया था कि प्रतिवर्ष दो करोड़ युवाओं को रोजगार मुहैया कराएंगे परंतु पिछले तीन वर्षों में दो लाख रोजगार भी सृजित नहीं हुए। बेरोजगारी की समस्या देश में बढ़ती जा रही है और देश के प्रधान मंत्री को विदेश यात्राओं से फुरसत नहीं मिल रही।












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