UP: कोरोना वायरस के मरीज को छिपाया तो हो सकती है छह महीने जेल की सजा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज के बारे में सूचना न देने या अस्पताल में भर्ती न कराने पर जेल हो सकती है। मंडलायुक्त मुकेश मेश्राम ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि अगर कोई कोरोना वायरस से पीड़ित है या संदिग्ध है और इस बारे में सूचना नहीं देता है या बीमारी छिपाता है या अस्पताल में भर्ती कराने के लिए गई जांच टीम का सहयोग नहीं करता है तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाय। प्रदेश में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए आउटब्रेक रिस्पॉन्स कमिटी बनाई गई है।

Action will be taken if not inform about coronavirus suspect

मंडलायुक्त ने इस बारे में बताया है कि कोरोना वायरस का संदिग्ध या उसके संपर्क में आए परिवार के लोग या अन्य कोई अगर जांच में सहयोग नहीं करता है तो उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में छह माह की जेल की सजा या एक हजार रुपए का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती हैं।

मंडलायुक्त ने अस्पतालों के ओपीडी में मरीजों के इलाज से संबंधित दिशा निर्देश भी दिए। उन्होंने लाइन की बजाय नाम और टोकन नंबर को स्क्रीन पर डिस्प्ले कर डॉक्टर के पास भेजने के सिस्टम बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अस्पताल में साफ-सफाई रखने की बात कही है। इसके अलावे सार्वजनिक जगहों जैसे रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, एयरपोर्ट व मॉल जैसी जगहों पर लोगों में इस बीमारी पर जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए हैं।

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