अखिलेश की बैशाखी की मदद से यूपी में पैर जमाने में कितनी सफल होगी AAP?
लखनऊ, 06 दिसंबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (आप) का गठबंधन समाजवादी पार्टी के साथ हो सकता है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि दिसंबर के अंत तक दोनों पार्टियों के बीच गठबंधान का औपचारिक ऐलान हो सकता है। हालांकि आम आदमी पार्टी की तरफ से अब तक 100 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान हो चुका है। गठबंधन की अटकलों के बीच संजय सिंह तीन बार अखिलेश यादव से मिले चुके हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव से संजय सिंह की हुई इन मुलाकातों को राजनीतिक जानकार अवसरवादी राजनीति बता रहे हैं।

संगठन खड़ा करने की जगह चुनाव लड़ने की कवायद
जबकि मुख्यमंत्री बनने से पहले तक अरविंद केजरीवाल ग़ाज़ियाबाद में ही पत्नी के सरकारी क्वार्टर में रहते थे। ऐसे में अब सियासी हलकों में यह सवाल उभरता रहता है कि यूपी और 'आप' के बीच ये दूरियां क्यों है? और इसके पीछे क्या मजबूरियां हैं? यूपी के राजनीतिक जानकार इसके दो कारण बताते हैं। पहला तो ये कि 'आप' ने यूपी की जनता से जुड़ने के लिए सत्तारूढ़ दलों पर आरोप लगाने की राजनीति की। दूसरा यूपी में अपना आधार बढ़ाने के आप नेताओं को जनता के बीच जाने के बजाए न्यूज चैनलों एवं अखबारों में विज्ञापन पर खर्चा करना ज्यादा जरूरी लगा।
दरअसल राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो आप का यूपी में कोई सोशल बेस नहीं है। यूपी में जात पात और विकास की राजनीति का बोलबाला रहा है। यह जानते हुए भी अरविंद केजरीवाल ने यूपी में पार्टी का फैलाव करने के ध्यान नहीं केंद्रित किया। उन्होंने सिर्फ छह माह पहले पार्टी के सांसद संजय सिंह को यूपी का प्रभारी बनाकर भेज दिया। यहां संजय सिंह ने पार्टी की नीति के तहत सत्तारूढ़ सरकार की योजनाओं को लेकर हवा हवाई आरोप लगाकर अखबार में खबरे छपवाने को महत्व दिया। जनता के बीच कार्य करने और पार्टी के संगठन को बढ़ाने की योजनाएं नहीं बनाई।
यूपी अभी आप की राडार से दूर
यूपी की राजनीति के हर दांवपेच से परिचित बीबीसी के पत्रकार रहे रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं कि,
''उत्तर प्रदेश में आप का अभी कोई इम्पैक्ट नहीं हैं। आप को यूपी के चुनावों में गंभीर दावेदार नहीं माना जा रहा है। जबकि यह पार्टी सात साल से यूपी में सक्रिय है। आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस पार्टी के अन्य नेताओं ने भी बड़े नेताओं के खिलाफ चुनाव लड़ा लेकिन प्रदेश की जनता के दिलों में वह जगह नहीं बना सके। अभी भी दिल्ली से सटा उत्तर प्रदेश 'आप' के रडार से दूर ही लगता है।''
केजरीवाल कर चुके हैं रामलला के दर्शन
पार्टी का विस्तार करने की मंशा के तहत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अयोध्या गए। भगवान रामलला के मंदिर में माथा टेका। फिर भी यूपी विधानसभा चुनावों की 100 सीटों पर भी आप को अच्छे प्रत्याशी मिलना मुश्किल लगा तो संजय सिंह ने सपा का दरवाजा खटखटा दिया। बुधवार को वह तीसरी बार अखिलेश यादव से मिलने उनके घर पहुंच गए। अखिलेश यादव प्रदेश में छोटे दलों का एक गठबंधन बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इस गठबंधन में आप को भी जगह मिल जाए, संजय सिंह का यह प्रयास हैं। ताकि आप भी सपा के सहयोग से आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी मौजूदगी को ठीक से दर्ज करा सके।
वहीं यूपी के एक वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ला इस मुलाकात इस मुलाक़ात को लेकर कहते हैं कि,
''आप को यूपी की विधानसभा में एक भी सीट पर जीत अब तक नहीं मिली है। सपा के साथ जुड़ने से उन्हें एक दो सीट पर जीत हासिल हो सकती है। ये सीटे हासिल करने के लिए ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कई लोक लुभावन घोषणाएं की हैं और भी बड़ी बड़ी बाते उन्होंने की है। उनकी तमाम घोषणाओं का सच यूपी के लोग जानते हैं। आने वाले दिनों में केजरीवाल और अधिक ऐलान कर सकते हैं। हालांकि यूपी में आप पहली बार चुनाव में उतरेगी जिससे यह देखना दिलचस्प होगा कि वह किसके वोट बैंक में सेंध लगाएगी।"
यूपी में आप ने चला है फ्री बिजली का दांव
इससे पहेल सितंबर में AAP ने की थी फ्री बिजली की घोषणा उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में लगभग सात महीने बचे हैं लेकिन सारी पार्टियां अभी से वोटरों को लुभाने की कवायद में जुट गई हैं। कोई युवाओं और छात्रों के लिए करोड़ टैबलैट और स्मार्टफोन देने की बात कर रहा है तो कोई सरकार बनने के बाद 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा कर रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) का दावा है कि यूपी में उसकी सरकार बनी तो उपभक्ताओं को फ्री में बिजली मिलेगी। लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का दिल्ली मॉडल क्या यूपी चुनाव में काम कर पाएगा यह तो आने वाला समय बताएगा।
दिल्लीवासियों को नि:शुल्क अयोध्या यात्रा की घोषणा
अयोध्या दर्शन का सारा खर्च उठाएगी सरकार उन्होंने कहा, 'दिल्ली में हम 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' चला रहे हैं, जिसके तहत दिल्ली के लोगों को सभी तीर्थ स्थानों पर मुफ्त तीर्थ यात्रा प्रदान की जाती है। कैबिनेट की विशेष बैठक होगी जिसमें अयोध्या को योजना में शामिल किया गया था। इस योजना के तहत, दिल्लीवासियों को एसी ट्रेनों से यात्रा और एसी होटलों में ठहरने की सुविधा प्रदान की जाती थी और सारा खर्च दिल्ली सरकार द्वारा वहन किया जाता था। उन्होंने कहा कि यह सेवा नि:शुल्क होगी।












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