योगी के राज में भूख से हुई नेमचंद्र की मौत, खबर मिलते ही दौड़ा प्रशासन
बरेली। यूपी के बरेली में गरीबी की वजह से पति का इलाज कराने के लिए अपने कलेजे के टुकड़े को बेचने का मामला तो आप भूले नहीं होंगे। अब एक और मामले ने सरकार और जिला प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है। बरेली में एक युवक की भूख से मौत का सनसनीखेज मामला सामने आया है। गरीबी की वजह से पिछले तीन दिनों से घर में खाना नहीं बना था। वहीं प्रशासन मामले की जांच में जुट गया है।

तीन दिनों से घर में नहीं बना था खाना
भमोरा थाना क्षेत्र के गाँव कुड़रिया इखलासपुर में झोपड़ी में अन्न का एक दाना नहीं है। वहां एक मां के सामने बेटे की लाश थी और मां का रो-रोकर बुरा हाल था। भूख से मौत की खबर मीडिया में आते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर लेखपाल और तहसीलदार जांच करने पहुंच गए। वहीं मृतक नेमचंद्र की मां और उनके रिश्तेदारों का कहना है कि घर में खाने को कुछ भी नहीं है। गांव वालों और रिश्तेदार घर पर कभी-कभी खाना भेज दिया करते थे जिससे उसका गुजारा हो जाता था। बूढ़ी मां का कहना है कि राशन कार्ड बना है और राशन भी मिला है लेकिन बेटे को लकवा मारने की वजह से राशन बेचकर उसकी दवा ले आई थी। तीन दिनों से घर में खाना नहीं बना था।

लेखपाल ने गांव पहुंचकर की जांच
भूख से मौत की खबर मीडिया में आने के बाद लेखपाल शिवा कुशवाहा भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच की। लेखपाल का कहना है की नेमचंद्र के परिवार की हालत काफी दयनीय है। घर में खाने को भी कुछ नहीं है। उनका कहना है कि जांच करने से पता चला है कि नेमचंद्र की मौत भूख से हुई है।

कटघरे में प्रशासन
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही गरीबी के चलते अपने पति के इलाज के लिए एक मां ने अपने 15 दिन के मासूम को 42 हजार रुपये में बेच दिया था। इसके आलावा कुछ महीने पहले फतेहगंज पश्चिमी में भी एक महिला की भूख से मौत हो गई थी और अब एक बार फिर भूख से मौत का मामला सामने आने से सरकार और प्रशासन कटघरे में है।












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