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यूपी: कुंभ मेले में आपको देखने को मिलेगी गोबर और गंगाजल से लकड़ी बनाने की मशीन

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लखनऊ। यूपी के इलाहाबाद में कुंभ की तैयारी जोरों से चल रही है। दुनिया भर से लोग इसमें हिस्सा लेने के लिए पहुंचने वाले हैं। सरकार की तरफ से तमाम योजनाओं को भी अमल में लाया जाने लगा है। देश-दुनिया से कई संत-महात्मा इस कुंभ में भाग लेने के लिए पहुंचेंगे। स्वामी चिदानंद सरस्वती का शिविर भी कुंभ का साक्षी बनेगा। इस शिविर से लोगों तक कुछ महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाया जाएगा। इनका शिविर इस बार अपनी परंपराओं का निर्वहन करना तथा पर्यावरण संरक्षण को लेकर संदेश लोगों तक पहुंचाएगा। इस संदेश में बताया जाएगा कि भविष्य में पेड़-पौधों को ही नहीं, प्राण-पीढ़ी और पृथ्वी की भी सांसें बचाएं।

यूपी: कुंभ मेले में आपको देखने को मिलेगी गोबर और गंगाजल से लकड़ी बनाने की मशीन, पर्यावर्ण संरक्षण है मुख्य वजह

इलाहाबाद में आयोजित होने वाले कुंभ को उन्होंने स्वच्छता, सद्भाव के साथ योग से लोगों को जोड़ने के लिए एक कार्यक्रम तैयार किया है। बुधवार को लखनऊ में स्वामी चिदानंद ने बताया कि कुंभ मेले में वह एक ऐसी मशीन लोगों के सामने लाएंगे जो गोबर और गंगाजल से लकड़ी बनाएगा। उनके ही आश्रम के एक सदस्य ने मशीन को तैयार कर लिया है।

उनका कहना है कि हर साल शवदाह के लिए करीब 8 करोड़ पेड़ों को काटा जा रहा है। लेकिन, अबकि बार गोबर से बनी लकड़ी लोगों के काम आने वाली है। मान्यता,परंपरा सबकुछ वही होगी बस तरीका थोड़ा बदल जाएगा। लोग पेंड की लकड़ी के बजाय गोबर निर्मित लकड़ी का इस्तेमाल करेंगे। शवदाह में इसकी स्वीकार्यता के लिए गोबर की लकड़ी के इस्तेमाल की बात वह कुंभ में संतों के मुख से कहलवाएंगे।

स्वामी चिदानंद कुंभ में अस्थि विसर्जन को लेकर एक मंत्र के साथ एक और नई अवधारणा लाने वाले हैं। उनका कहना है कि परंपराओं का पालन करते हुए ऐसा अस्थि विसर्जन हो, जिसमें मान्यता के साथ पर्यावरण भी बचे।

स्वामी चिदानंद कुंभ मेले में इस मॉडल को सबके बीच प्रस्तुत करेंगे और बताएंगे की प्रतीक के रूप में गंगा में थोड़ी अस्थियों का विसर्जन करें और बाकी अस्थियों को वहीं खाद के तौर पर प्रयोग कर और मिट्टी में मिला दें ताकि आपके परिजन पेड़ बनकर वापस आ जाएं। चिदानंद इस मंत्र का आवाहन संतों के माध्यम से करेंगे।

स्वामी चिंदानंद ने बताया कि इस बार कुंभ मेले में उनके शिविर में कुल 37 देशों की जनजाति के प्रतिनिधि जुटेंगे। जिनके माध्यम से स्वामी चिदानंद जल संरक्षण का संदेश देकर इस बार के कुंभ को जन कुंभ से कल कुंभ में करने को तैयार हैं।

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English summary
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