पीएम मोदी के निर्देश पर लगा मेला फ्लॉप! भैंस को कपड़ों में क्यों छुपाया?

कानपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सीधे निर्देश पर कानपुर में लगाया गया पशु आरोग्य मेला पहले दिन नौकरशाही की लापरवाही के कारण बुरी तरह फ्लॉप हो गया। मेले का उद्घाटन केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री कृष्णा राज ने किया लेकिन मेले में भाग लेने चंद किसान ही पहुंचे। कानपुर मेले की असफलता ने सरकार की मंशा के अनुरूप राज्य में काम न होने की तस्वीर दिखा दी है।

कानपुर में पशु आरोग्य मेला

कानपुर में पशु आरोग्य मेला

कानपुर के सरसौल इलाके में यह पशु आरोग्य मेला उस परम्परा का दूसरा मेला था जिसका श्रीगणेश पिछली 23 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में किया था। तब उन्होने कहा था कि उनकी सरकार उन पशुओं की सेवा भी करना चाहती है जो कभी वोट नहीं देते हैं। मेले में मौजूद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पीएम मोदी ने कहा था कि वाराणसी के बाद अन्य जिलों में भी पशु आरोग्य मेले लगाये जायें ताकि पशुओं की सेहत की चिन्ता करने वाले किसानों की परेशानी दूर हो सके।

पहुंचे बहुत चंद लोग, कुर्सियां रही खाली

पहुंचे बहुत चंद लोग, कुर्सियां रही खाली

प्रधानमंत्री की इच्छा पर एक माह के भीतर दूसरा मेला लगाने के लिये कानपुर का चयन किया गया। मेले में प्रधानमंत्री की प्रतिनिधि के तौर पर केन्द्रीय मंत्री कृष्णाराज तो कानपुर पहुंच गयी लेकिन मंच पर राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में शामिल होने वाले दोनों मंत्री एस पी सिंह बघेल और जयप्रकाश निषाद नादारद रहे। जब राज्य सरकार के मंत्री ही पीएम मोदी की भावनाओं की कद्र न कर रहे हों तो नौकरशाह कैसे पीछे रहती। नतीजा यह हुआ कि मेले के उद्घाटन सत्र में किसानों की संख्या बहुत कम रही।

मंत्री की नजर से छिपाने के लिए भैंस को ढंका

मंत्री की नजर से छिपाने के लिए भैंस को ढंका

खाली पड़ी कुर्सियां कहीं केन्द्रीय मंत्री की नाराजगी का सबब न बन जाये, इसलिये एहतियातन कार्यक्रम के बीच में ही कुर्सी समेटने का काम शुरू कर दिया गया। हलांकि ये मेला बीमार पशुओं के इलाज के लिये लगाया गया था लेकिन धरती पर गिर पड़े जिन पशुओं की नब्ज एक्सपर्ट डाक्टर भी नहीं पकड़ सके, उन्हें मंत्री जी की नजर से छिपाने के लिये पर्दों से ढंकने का काम किया जाने लगा। हलांकि नौकरशाहों की ये चाल मीडिया के कैमरों से छिप नहीं सकी। मेले का आयोजन जिन पण्डित दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर किया गया था, उनका चित्र भी पीएम और सीएम के चित्रों के बीच स्थान नहीं पा सका।

अधिकारियों की लापरवाही

अधिकारियों की लापरवाही

पीएम मोदी ने वाराणसी मेले में ऐलान किया था कि किसान खेतों में अन्न उगाने के अलावा दुग्ध उत्पादन और पशुपालन का काम आगे बढ़ाने में सहयोग दे। उनके पशु को आरोग्य रखने की चिन्ता सरकार करेगी। लेकिन जिस तरह कानपुर का मेला महज औपचारिकता बनकर रह गया, उसके बाद पीएम का ये सपना पूरा करने के लिये योगी सरकार को अपनी मशीनरी के पेंच कसने होंगे।

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