शिवपाल यादव के सरकार और सपा के सभी पदों से इस्तीफे के पीछे हैं ये 7 वजहें
लखनऊ। समाजवादी पार्टी में चल रही पारिवारिक कलह गुरुवार रात और गहरी हो गई। शिवपाल यादव ने अखिलेश सरकार और समाजवादी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच लंबे समय से चल रही तकरार के पीछे कई वजहें हैं, जिनकी वजह से दिनों-दिन तनातनी बढ़ती गई। ये हैं वो बड़ी वजहें...


1. नजरअंदाज किए जाने का आरोप
शिवपाल यादव ने पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मिलकर खुद को नजरअंदाज किए जाने की शिकायत की थी। दरअसल, साल 2012 में जब मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया तो शिवपाल की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को बड़ा झटका लगा था।
शिवपाल, मुलायम के बाद खुद इस पद पर काबिज होना चाहते थे। हालांकि तब मुलायम ने उन्हें अहम जिम्मेदारियां किसी तरह मना लिया था।

2. अमर सिंह की वापसी पर भी तकरार
अखिलेश यादव शुरुआत से ही अमर सिंह की सपा में वापसी के खिलाफ थे। अमर सिंह को पार्टी में वापस लाने को लेकर शिवपाल यादव काफी कोशिशें करते रहे। अमर सिंह वैसे तो मुलायम सिंह के भी करीबी रहे हैं लेकिन शिवपाल की वजह से सपा में छह साल बाद उनकी संभव हो सकी। सपा ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। लेकिन हर मौके पर अखिलेश ने अमर सिंह की वापसी पर अपनी असहमति जताई।

3. कौमी एकता दल के विलय पर भी टकराव
माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के सपा में विलय को लेकर भी अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव का विरोध किया था। दरअसल, शिवपाल कौमी एकता दल के विलय के पक्ष में थे, लेकिन अखिलेश पार्टी की छवि को लेकर चिंतित थे। अखिलेश के विरोध की वजह से सपा को इस विलय को रद्द करना पड़ा। शिवपाल इस वजह से भी नाराज थे।

4. करीबियों को हटाए जाने पर भी नाराजगी
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हाल ही में पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव के करीबी दो मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर कर दिया था। अखिलेश ने खनन मंत्री गायत्री प्रसाद और पंचायती राज मंत्री राजकिशोर को बाहर का रास्ता दिखाया था। इसके बाद सीएम ने चीफ सेक्रेटरी दीपक सिंघल को भी पद से हटा दिया था।

5. तीन अहम विभाग छीने जाने पर भी विवाद
दो मंत्रियों करीबी मंत्रियों को हटाए जाने पर शिवपाल ने मुलायम सिंह से इसकी शिकायत की। जिसके बाद पार्टी ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद छीनकर शिवपाल यादव को दे दिया गया। इसके कुछ ही घंटों बाद अखिलेश ने शिवपाल से राजस्व, सिंचाई और पीडब्ल्यूडी विभाग छीन लिए। शिवपाल ने इसे लेकर भी नाराजगी जताई थी और दिल्ली आकर मुलायम सिंह यादव से मिले थे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि अखिलेश यादव ने नेताजी से पूछे बिना यह फैसला लिया है।

6. रामगोपाल के बयान ने भी किया असर
रामगोपाल यादव गुरुवार को अखिलेश यादव को मनाने पहुंचे थे। बातचीत के बाद उन्होंने कहा, 'अखिलेश को पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पद से हटाकर नेतृत्व ने गलती की है।' उन्होंने यह भी कहा कि एक आदमी पार्टी को नुकसान पहुंचा रहा है। हालांकि उन्होंने इस दौरान किसी का नाम नहीं लिया।

7. मुलायम का फॉर्मूला भी फेल
बुधवार को शिवपाल ने दिल्ली में मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने शिवपाल को आश्वस्त किया था कि पूरे मामले को जल्द सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने इसके लिए सरकार और संगठन का फॉर्मूला भी तैयार किया, लेकिन यह भी काम नहीं आया।












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