120 साल पहले हिंदू-मुस्लिम में बंटा था एक परिवार, आज भी नहीं मिटी है सियासी दूरी
लखनऊ, 16 जनवरी: यूपी के कैराना में इस बार समाजवादी पार्टी ने अपने मौजूदा विधायक नाहिद हसन को टिकट दिया है और बीजेपी ने पिछले चुनाव में शिकस्त खाने के बावजूद भी पार्टी के पूर्व सांसद हुकूम सिंह की बेटी मृगांका सिंह पर ही दांव लगाया है। नाम से ही स्पष्ट है कि सपा ने यहां एक बार फिर से मुस्लिम उम्मीदवार पर ही भरोसा किया है और बीजेपी ने हिंदू चेहरे पर ही विश्वास जताया है। लेकिन, दिलचस्प बात ये है कि आज इलाके के बड़े राजनीतिक परिवारों से ताल्लुक रखने वाले हसन और सिंह दशकों पहले एक ही परिवार के सदस्य हुआ करते थे। तब इनके पूर्वजों में से किसी ने अपना धर्म बदला था, जो आजतक इस इलाके की चुनावी फिजा को प्रभावित करता आ रहा है।

करीब 120 साल पहले एक ही था दोनों का परिवार
पश्चिमी यूपी के कैराना इलाके की राजनीति आज के दो परिवारों के बीच की 100 साल से भी ज्यादा पुरानी सियासी दुश्मनी के आसपास घूमती रहती है। कभी एक परिवार से कोई सदस्य विधानसभा पहुंचता है तो कभी दूसरे परिवार का व्यक्ति लोकसभा पहुंच जाता है। लेकिन, कैराना में इन दोनों परिवारों के इतिहास को जानने वाले कहते हैं कि इस सियासी नफरत की दीवार करीब 120 साल पहले खड़ी कर दी गई थी। इसकी शुरुआत तब हुई जब एक के पूर्वजों ने इस्लाम कबूल कर लिया और वहीं से राजनीतिक लड़ाई की नींव ऐसी पड़ी जो आज भी हसन और सिंह परिवार एक-दूसरे के कट्टर सियासी दुश्मन बने हुए हैं।

दोनों परिवार का एक ही खाप से था नाता
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जो 107 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की है, उसमें मृगांका सिंह को कैराना से टिकट दिया है। इससे पहले अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी अपने सीटिंग विधायक नाहिद हसन को प्रत्याशी बना चुकी है। हसन और सिंह परिवारों की यह राजनीतिक दूरी 100 से भी ज्यादा वर्षों से चली आ रही है और तब दोनों ही परिवार एक ही खाप से ताल्लुक रखते थे और सब बाबा कलसा के परिवार का ही हिस्सा थे।

हिंदुओं और मुस्लिमों की अगुवाई करता रहा है दोनों परिवार
कैराना के सुहैब अंसारी ने मीडिया से है कि, 'कुछ साल पहले तक हुकूम सिंह (मृगांका सिंह के पिता) हिंदुओं के नेता माने जाते थे और नाहिद के पिता मुनव्वर हसन (पूर्व सांसद तबस्सुम हसन के पति ) मुस्लिमों के अगुवा होते थे।' 1990 के दशक से जब से प्रदेश में कांग्रेस का प्रभुत्व खत्म हुआ है, कैराना ने इन दोनों ही परिवारों के सदस्यों को एमएलए और एमपी बनाया है। इस चुनाव में भी दोनों ही परिवारों की अगली पीढ़ी चुनावी मैदान में एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रही है। 2017 में यहां से नाहिद ने मृगांका को पटखनी दी थी।

मृगांका को अपने पिता की मेहनत पर भरोसा
2018 में हुए लोकसभा उपचुनाव में मुनव्वर हसन की विधवा तबस्सुम हसन ने हुकूम सिंह की बेटी मृगांका को हराया दिया था। लेकिन, 2019 के लोकसभा चुनाव में हसन परिवार को तब यहां झटका लगा जब बीजेपी के 'बाहरी' प्रत्याशी प्रदीप चौधरी ने तबस्सुम की साइकिल की टायर पंचर कर दी। मृगांका एक बार फिर से अपने पिता के पूर्वजों के परिवार से ताल्लुक रखने वाले हसन परिवार के वंशज को चुनौती देने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है, 'मैं पार्टी की आभारी हूं कि उसने मेरे पिता (दिवंगत) की कड़ी मेहनत को पहचाना है। मतदाताओं से मौका मिलने पर मैं उनकी इस विरासत को कायम रखूंगी।'

गैंगस्टर ऐक्ट में धरे गए हैं नाहिद हसन
हालांकि, चुनाव से पहले ही सपा एमएलए नाहिद हसन को बड़ा झटका लगा है और उन्हें गैंगस्टर ऐक्ट के तहत गिरफ्तारी के बाद कैराना की एक अदालत ने शनिवार को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। कहा जा रहा है कि वह फरवरी, 2021 के एक लंबित केस के मामले में कैराना कोर्ट में सरेंडर करने जा रहे थे, तभी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जेल जाते-जाते वह अपनी गिरफ्तारी के लिए मीडिया के सामने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भड़ास निकालते हुए गए हैं।
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