पंजाब में बार-बार क्यों हो रही है हिंसा

गुरुवार को अमृतपाल सिंह के हथियारदार समर्थकों ने थाने पर हमला कर दिया था

"वारिस पंजाब दे" के मुखिया 29 साल के अमृतपाल सिंह के सैकड़ों समर्थक अमृतसर में एक थाने पर टूट पड़े. उनके हाथों में लाठी, डंडे और तलवारें थीं. कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि कुछ लोग बंदूक से लैस थे.

सोशल मीडिया और अन्य समाचार चैनलों पर जारी वीडियो फुटेज में पुलिस उग्र भीड़ के सामने बेबस नजर आ रही है और अमृतपाल सिंह के समर्थक उत्पात मचा रहे हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक थाने में बवाल के दौरान एक पुलिस अफसर समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए.

थाने पर हमला क्यों हुआ

अमृतपाल सिंह और उसके समर्थकों ने अजनाला थाने पर अपने एक करीबी को छुड़ाने के लिए धावा बोल दिया. अमृतपाल के करीबी का नाम लवप्रीत तूफान है. पुलिस ने एक व्यक्ति का अपहरण करने और उसकी पिटाई करने के आरोप में लवप्रीत तूफान को गिरफ्तार किया है. वह अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले समूह का सदस्य है, जिसकी स्थापना अभिनेता और कार्यकर्ता दीप सिद्धू ने की थी. पिछले साल फरवरी में दीप सिद्धू की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. दीप सिद्धू की मौत के बाद "वारिस पंजाब दे" का मुखिया अमृतपाल सिंह बन गया.

अमृतपाल सिंह ने गुरुवार को मीडिया से कहा, "एफआईआर केवल एक राजनीतिक मकसद से दर्ज की गई थी. अगर वे एक घंटे में मामले को रद्द नहीं करते हैं, तो आगे जो कुछ भी होगा उसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा. उन्हें लगता है कि हम कुछ नहीं कर सकते, इसलिए यह शक्ति प्रदर्शन आवश्यक था."

सिर उठाता खालिस्तान आंदोलन

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अमृतपाल के समर्थक उस वक्त तक थाने में जुटे रहे जब तक पुलिस ने उन्हें आश्वासन नहीं दे दिया कि लवप्रीत को शुक्रवार को छोड़ दिया जाएगा. शुक्रवार को अदालत ने लवप्रीत की रिहाई के आदेश दे दिए. अमृतसर-ग्रामीण के एसएसपी सतिंदर सिंह ने कहा, "कोर्ट ने लवप्रीत तूफान की रिहाई के आदेश दिए हैं, जिसे आज अमृतसर जेल से रिहा किया जाएगा."

सिंह ने आगे कहा, "उन लोगों द्वारा पेश किए गए सबूतों से साबित होता है कि वह (लवप्रीत) मौके पर मौजूद नहीं था. एहतियातन तौर पर फोर्स तैनात कर दी गई है और स्थिति नियंत्रण में है."

कौन है अमृतपाल सिंह

अमृतपाल ने थाने में खुले तौर पर खालिस्तान का मुद्दा उठाया था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल दर्जनों विवादों, अपहरण और धमकी देने में शामिल रहा है. हाल ही में दुबई से लौटे अमृतपाल सिंह ने इस महीने की शुरुआत में शादी की थी. कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि हाल ही में उसने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देते हुए कहा कि उनका हश्र पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसा होगा.

इस पूरे मुद्दे पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चिंता जाहिर की है. कैप्टन अमरिंदर ने एक बयान में कहा, "यह न केवल पंजाब में कानून और व्यवस्था की स्थिति का पूरी तरह से चरमरा जाना है, बल्कि उससे कहीं अधिक गंभीर है."

कांग्रेसने भी इस घटना पर सवाल उठाते हुए कहा कि भीड़ द्वारा पुलिस थाने पर कब्जा कर लेना खतरनाक है.

वकील-अभिनेता से एक्टिविस्ट बने संदीप सिंह उर्फ दीप सिद्धू ने पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले 30 सितंबर 2021 को "वारिस पंजाब दे" से संगठन की शुरुआत की थी. मूल रूप से यह "पंजाब के अधिकारों की रक्षा, उसके लिए लड़ने और सामाजिक मुद्दों को उठाने के लिए एक दबाव समूह" के रूप में शुरू किया गया था.

खालिस्तान का मुद्दा बीते कुछ साल में गरम हुआ है. इसी साल ऑस्ट्रेलिया में सिख्स फॉर जस्टिस ने कथित खालिस्तान रेफरेंडम का आयोजन किया था. इस दौरान खालिस्तान समर्थकों और विरोधियों के बीच सरेआम मारपीट हुई थी. इससे पहले एक अलगाववादी सिख संगठन ने कनाडा के ब्रैंप्टन में एक कथित जनमत संग्रह आयोजित किया था. इसमें उत्तर अमेरिकी आप्रवासी सिखों से इस बात पर राय मांगी गई थी कि भारत के सिख बहुल इलाकों को खालिस्तान नाम का स्वतंत्र देश घोषित किया जाना चाहिए या नहीं.

Source: DW

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