Unnao: लंगूर की मौत पर बहे इंसानों के आंसू, हिंदू रीति रिवाज से किया अंतिम संस्कार और बना दिया हनुमान मंदिर
गौरतलब है की सनातन धर्म में लंगूर को भगवान बजरंगबली का प्रतीक मान जाता है और उसकी पूजा की जाती है। मुस्तफाबाद गांव के लोगों के इस कदम ने ये बताया है कि इंसानों में इंसानियत अभी भी बाकी है।

आज के दौर में एक इंसान की मौत पर भी आंसू बहाने वाले कम लोग मिलते हैं। इसे आप सिर्फ शब्दों का जाल मत समझिए, बल्कि ये एक कड़वी हकीकत है। वहीं उत्तर प्रदेश में एक लंगूर की मौत पर इंसानों ने न सिर्फ आंसू बहाए बल्कि उसे इंसानों की तरह विदाई भी दी।

हर साल आता है लंगूरी बंदरों का झुंड
दरअसल मामला उन्नाव जिले के बांगरमऊ क्षेत्र स्थित मुस्तफाबाद गांव का है। बताया जाता है कि गांव के मजरा राजा खेड़ा के समीप से हर साल लंगूरी बंदरों का एक झुंड निकलकर गंगा नदी में स्नान के बाद वापस अपने गंतव्य को लौट जाता है। इसी क्रम में बंदरों का झुंड आज शनिवार गांव के समीप से गंगा नदी पर स्नान करने जा रहा था कि तभी एक कुत्ते ने एक बंदर पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

लंगूर की मौत पर इंसानों में शोक
इधर जब ग्रामीणों को हादसे का पता चला तो वो लोग भागे-भागे मौके पर पहुंचे। वहां लंगूर का शव पड़ा था। इसके बाद लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। लंगूर के शव को सड़क पर पड़ा देख रहे ग्रामीणों में अचानक हलचल शुरू हुई। सबसे पहले लंगूर के शव को सड़क के किनारे लाया गया और उसे कपड़े से ढक दिया गया। फिर गांव वालों ने तय किया कि वो लंगूर का गांव के किसी निवासी की तरह ही अंतिम संस्कार करेंगे।

हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार
इसके बाद एक भगवा रंग का कपड़ा मंगवाया गया जिसमें जय श्री राम के नारे लिखे थे और उसमें लंगूर के शव को लपेटा गया। यहां फिर ग्रामीण लंगूर के शव को गाँव में ले गए, जहां लंगूर का हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया। मृतक लंगूर का हिंदू रीति रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार करने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि उन लोगों ने जिस स्थान पर लंगूर का अंतिम संस्कार किया है, वहाँ समाधि बनाकर उसी स्थान को बजरंगबली मंदिर के नाम से देवस्थान बना दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक 'लंगूर का इस तरह चले जाना उन सबके लिए अत्यंत दुःखद है।'












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