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यूनिसेफ: जलवायु परिवर्तन की वजह से करोड़ों बच्चे विस्थापित

जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा, तूफान और जंगलों की आग के कारण 2016 से 2021 के बीच 4.3 करोड़ से अधिक बच्चों का विस्थापन हुआ.

यूनिसेफ की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन की मौजूदा दर पर अगले 30 सालों में अकेले मौसम संबंधी आपदाओं से 10 करोड़ से अधिक बच्चे और युवा विस्थापित होंगे.

यूनिसेफ में प्रवासन विशेषज्ञ और रिपोर्ट की लेखकों में से एक लॉरा हैली ने कहा, "सच यह है कि भविष्य में कहीं अधिक बच्चे प्रभावित होंगे, क्योंकि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव लगातार बढ़ते जा रहे हैं."

जलवायु आपदाओं के कारण होने वाले आंतरिक विस्थापनों की संख्या आम तौर पर पीड़ितों की उम्र से मेल नहीं खाती. लेकिन यूएन की बच्चों की एजेंसी ने डाटा की जांच करने और बच्चों की छिपी हुई संख्या को उजागर करने के लिए गैर-सरकारी आंतरिक विस्थापन निगरानी केंद्र के साथ काम किया.

बाढ़ और तूफान के कारण ज्यादा विस्थापित

रिपोर्ट में कहा गया कि साल 2016 से 2021 के बीच चार तरह की जलवायु आपदाएं-बाढ़, तूफान, सूखा और जंगलों की आग के कारण 44 देशों में 4.31 करोड़ बच्चे विस्थापित हुए. ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ऐसी आपदाएं बार-बार आ रही हैं.

कुल विस्थापनों में से 95 प्रतिशत (4.9 करोड़) विस्थापन बाढ़ और तूफान के कारण हुआ.

रिपोर्ट से पता चलता है कि जहां सूखे के कारण 13 लाख से अधिक बच्चे अपने ही देशों में विस्थापित हुए, वहीं लगभग 8,10,000 बच्चे जंगल की आग के कारण विस्थापित हुए. मुख्य रूप से कनाडा, इस्राएल और अमेरिका सबसे ज्यादा प्रभावित हुए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन और फिलीपींस उन देशों में से हैं जहां सबसे ज्यादा बच्चे आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं.

लेकिन, बच्चों की आबादी के आकार के सापेक्ष, डोमिनिका और वानुआतु जैसे छोटे द्वीपीय देशों में रहने वाले बच्चे तूफान से सबसे अधिक प्रभावित हुए, जबकि सोमालिया और दक्षिण सूडान में बच्चे बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए.

यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने एक बयान में कहा, "यह किसी भी बच्चे के लिए भयावह होता है जब जंगल की भीषण आग, तूफान या बाढ़ उनके समुदाय में आती है."

उन्होंने कहा, "उन लोगों के लिए जो भागने के लिए मजबूर हैं, डर और प्रभाव विशेष रूप से विनाशकारी हो सकते हैं, इस चिंता के साथ कि क्या वे घर लौटेंगे, स्कूल फिर से शुरू करेंगे या फिर से स्थानांतरित होने के लिए मजबूर होंगे. पलायन ने भले ही उनकी जान बचा ली हो, लेकिन यह बहुत विघटनकारी भी है."

एए/वीके (एपी, एएफपी, डीपीए)

Source: DW

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