Vikrmotsav 2023: 'आदि विक्रमादित्य' के जरिए दर्शकों ने देखी रहस्यमयी दुनिया, ये रहा खास
धार्मिक नगरी उज्जैन में विक्रमोत्सव 2023 अंतर्गत विक्रम नाट्य समारोह के छठवें दिन ‘‘आदि विक्रमादित्य’’ का मंचन हुआ। नाटक आम तौर पर कहानी सुनाने वाली बत्तीस पुतलियों पर केन्द्रित है।

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धार्मिक नगरी उज्जैन में भारत उत्कर्ष, नवजागरण और वृहत्तर भारत की सांस्कृतिक चेतना पर एकाग्र विक्रमोत्सव 2023 (विक्रम सम्वत् 2079) अंतर्गत विक्रम नाट्य समारोह के छठवें दिन ''आदि विक्रमादित्य'' का मंचन हुआ। जिसका निर्देशन मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के निदेशक टीकम जोशी द्वारा किया गया है। यह नाटक सिंहासन बत्तीसी और बेताल पच्चीसी की कहानियों का संकलन है। नाटक आम तौर पर कहानी सुनाने वाली बत्तीस पुतलियों पर केन्द्रित है। कहानी को प्रभावशाली ढंग से चित्रित करने के लिए निर्देशक ने अनेक उपकरणों का प्रयोग किया है। कहानी राजा भोज द्वारा सिंहासन के प्रकटीकरण से शुरू होती है, और कथा इसे राजा विक्रमादित्य और बेताल की रहस्यमयी दुनिया की ओर ले जाती है। अंत में, सिंहासन को वापस जगह पर रख दिया जाता है क्योंकि विक्रमादित्य की मृत्यु से जो शून्य पैदा हुआ, उसे कभी भी शक्तिशाली और योग्य राजा भोज द्वारा नहीं भरा जा सकता है।
इन्होंने निभाए अनूठे किरदार
इस प्रस्तुति में विक्रमादित्य का रोल अभय बडोनी ने निभाया जबकि बेताल के रूप में गौतम सारस्वत, प्रदीप तिवारी ने राजा भोज की भूमिका निभायी। इसके साथ ही शारोन मसीह, हिमाद्री व्यास, प्रिया शर्मा, रिदिमा विश्वकर्मा पुतलियों की भूमिका में रही। नाटक लेखन दिनेश नायर ने किया है। प्रकाश परिकल्पना संचालन प्रवीण नामदेव, वेशभूषा परिकल्पना प्रिया भदौरिया ने संभाली।मालूम हो कि मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल रंगमंच की दुनिया में प्रदेश का गौरव बढ़ा रहा है। पहली बार मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर नाट्य प्रस्तुति दे रहा है।
31 विभागों की भागीदारी होगी
विक्रमोत्सव में दीपोत्सव, नाट्य, प्रदर्शनियां, प्रकाशन, विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का प्रवर्तन आदि कार्यक्रम शहर के विभिन्न कार्यक्रम स्थलों पर होंगे। इस बार के विक्रमोत्सव में लगभग 21 हजार 500 से अधिक कार्यकर्ता, प्रदर्शक, रचनाकार आदि शामिल होंगे। इस बार के दिव्य आयोजन में महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ सहित मप्र शासन के कोई 31 विभागों की भागीदारी भी होगी। प्रदेश के विविध विभागों की इतनी व्यापक भागीदारी पहली बार किसी आयोजन में देखने को मिलेगी।
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