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8वीं पास युवक ने जुगाड़ से बना दी आटा चक्की, पूरा गांव हो रहा खुश, देखें कमाल का VIDEO

Udaipur News, उदयपुर। पहले सब कहते थे कि पता नहीं ये क्या बना रहा है?। इसकी जुगाड़ तकनीक काम करेगी भी या नहीं, मगर कुछ दिन की मेहनत और देसी दिमाग की उपज से जो आटा चक्की बनकर तैयार हुई, उसने सबका दिल जीत ​लिया और गांव के इस छोरे की हर कोई तारीफ करने लगा।

Udaipurs young man made flour mill plant from Jugaad

मामला राजस्थान के उदयपुर (Udaipur) जिले के गांव पलाना का है। यहां एक युवक ने जुगाड़ तकनीक से आटा चक्की बनाई है, जिससे न केवल एक परिवार को रोजगार मिला गया बल्कि पूरे गांव को भी इससे फायदा होने लगा है। जुगाड़ तकनीक (jugad technology) वाली इस आटा चक्की की खास बात यह है कि इसे डीजल से चलाया जा सकता है। मतलब बिना बिजली के भी यह आटा चक्की काम करती है।

आटा चक्की बनाने में इन चीजों का किया इस्तेमाल

आटा चक्की बनाने में इन चीजों का किया इस्तेमाल

दरअसल, कहानी कुछ यूं शुरू होती है कि गांव पलाना में किसान मांगीलाल गमेती के घर आटा चक्की थी, जिसे वह सिंगल फेज की बिजली से चलाता था। इस पर विद्युत निगम ने कई बात आपत्ति जताई और आटा चक्की के विद्युल लोड के हिसाब विद्युत कनेक्शन लेने की बात कही। एक दिन बातों ही बातों में मांगीलाल ने अपनी यह समस्या पड़ोसी गांव प्रकाशपुरा के बाबूलाल गायरी को बताई। तब बाबूलाल ने उसे भरोसा दिलाया कि वह अपनी जुगाड़ तकनीक से उसके लिए नई आटा चक्की बना सकता है, जिससे विद्युत लोड की समस्या दूर हो सकती है। इसके बाद बाबूलाल काम में जुट गया और अपनी जुगाड़ तकनीक से पुराने इंजन, पंखा, गियर बॉक्स, मोटरसाइकिल की तेल की टंकी, नली और बैट्री आदि का इस्तेमाल करके आटा चक्की को मोडिफाइड कर दिया। जो नई आटा चक्की बनी उसने कमाल ही कर दिखाया।

एक लीटर डीजल में 50 किलो गेहूं की पिसाई

एक लीटर डीजल में 50 किलो गेहूं की पिसाई

पिछले बीस दिन पहले बनाई गई इस आटा चक्की से मांगीलाल का खर्चा कम हो गया। यानि एक लीटर डीजल में वह 50 किलोग्राम की गेहूं पिसाई कर पाता है। आटा चक्की को बैट्री से जोड़ा गया है, जो उसके इनवरटर का काम करती है। डीजल से चक्की दिनभर चलने पर 12 वॉल्ट बिजली खाती है। एक घंटे तक बैट्री को चार्ज करने पर 11 घंटे आटा चक्की चलाई जा सकती है। इसके अलावा बिजली का घरेलू कामों में भी उपयोग लिया जा सकता है। अब इस चक्की से गांव में विद्युत कटौती के दौरान भी ग्रामीण अनाज पिसवा सकते हैं। ऐसे में बाबूलाल के इस नए जुगाड़ से पूरा गांव खुश है।

आर्थिक मदद की दरकरार

आर्थिक मदद की दरकरार

बाबूलाल को गांव में जुगाड़ी के नाम से जाना जाता है। आठवीं तक पढ़े-लिखे बाबूलाल ने आटा चक्की से पहले जुगाड़ तकनीक (Jugaad) से बुवाई मशीन बनाई थी। वो भी किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो रही है। बाबूलाल ने बताया कि उसका देसी चीजें से कुछ नया बनाने में दिमाग चलता है। वह मांगीलाल के घर बनाई देसी आटा चक्की जैसे और भी कई बना सकता है, मगर यह तभी संभव हो पाए जब कोई आर्थिक मदद मिले।

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