'हथिनी' ने वन अधिकारियों को बनाया चकरघिन्नी, शिकायत के बाद खुद फंसे अफसर
घायल हथिनी को प्रताड़ित करने, उससे भिक्षावृत्ति कराने की शिकायत के बाद वन विभाग सकते में है। मामले में सीसीएफ छतरपुर से भी शिकायत की गई है। इसमें टीकमगढ़-जतारा के वन अधिकारियों पर भी सांठगांठ के आरोप लगे हैं।

Madhya Pradesh के टीकमगढ़ जतारा में नाजउद्दीन खान व कुछ सहयोगियों द्वारा एक घायल हथिनी को पालतू के नाम पर बंधक बनाने व उससे भिक्षावृति कराने की शिकायत छतरपुर सीसीएफ से की गई थी। वन अधिकरियों ने हथिनी को कब्जे में लिया, जांच-पड़ताल के बाद उसे छोड़ दिया। शिकायतकर्ता ने अब वन अधिकारियों पर हाथी तस्करों से सांठगांठ कर हाथिनी को छोड़ने व लेनेदेन के आरोप लगाए हैं। शिकायत के बाद वन अधिकारी भी सकते में आ गए हैं।
Tikamgarh जिले की जतारा रेंज अंतर्गत पलेरा वन्य परिक्षेत्र का है, जहां पर एक शिकायत के आधार पर पांच लोगों को मादा हथिनी को भिक्षावृत्ति करते हुए पकड़ा और उसे कुछ देर रोककर कर लेनदेन कर छोड़ने के आरोप रेंजर पर लगाए गए हैं। इस आशय की दो शिकायतें सीसीएफ छतरपुर से की गई हैं। दूसरी शिकायत के बाद सीसीएफ ने कमेटी बनाकर जांच कराने की बात स्वीकार की है। दरअसल मुजफ्फर खान निवासी घुसियारी जिला हमीरपुर ने सीसीएफ छतरपुर संजीव झा से शिकायत की थी कि टीकमगढ़ जिले में नाजउद्दीन खान और कुछ लोगों के सहयोग से मादा हथिनी जिसका पांव फैक्चर है, उससे भिक्षावृति करा रहे हैं। उसे प्रताड़ित कर रहे हैं। सीसीएफ ने डीएफओ टीकमगढ़ को निर्देशित किया। जिन्होंने रेंजर जतारा शिशुपाल अहिरवार को आवेदन की जांच करने के लिए निर्देश दिए। बीती 8 जनवरी 2023 दोपहर में पलेरा जतारा रोड पर रेंजर ने डिप्टी रेंजर विक्रम सिंह के माध्यम से हथिनी को वन अमले ने कब्जे में लिया, फिर छोड़ दिया।
रेंजर की भूमिका संदिग्ध
शिकायतकर्ता मुजफ्फर खान ने दूसरी शिकायत में आरोप लगाए हैं कि जतारा रेंजर शिशुपाल अहिरवार ने भी आवेदक मुजफ्फर खान से फोन पर बात की और बताया कि उन्होंने हाथी को पकड़कर दस्तावेज जांच करने के बाद छोड़ दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने टैग को स्कैन नहीं किया है। जबकि टैग स्केन किया होता तो सारा मामला सामने आ जाता।
मृत हथिनी के लाइसेंस पर दूसरी हथिनी लेकर घूम रहे
सीसीएफ छतरपुर को की गई शिकायत के अनुसार वन अमले ने जिस मालिकाना हक के आधार पर हथिनी को छोड़ा है। वह 22 जनवरी 2001 का बना हुआ है। जिसे भोपाल वाइल्ड लाइफ वार्डन ने जारी किया था। लाइसेंस जगदीश प्रसाद गोस्वामी निवासी गांव गोवा थाना जतारा का है। जबकि इसकी हथिनी को गुजरे कई वर्ष हो चुके है। वन नियमानुसार 6 साल से अधिक का लाइसेंस पुराना होने पर पर उसे रिन्यू कराया जाता है। जबकि यह लाइसेंस 22 वर्ष पुराना है। हाथी के मालिकाना हक को हाथी के कान पर लगे टैग स्कैन करके किया जाना चाहिए। जबकि हथिनी के कान पर कोई टैग नहीं लगा है। आवेदन ने खुद को कार्रवाई से दूर रखने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे बताया कि मादा हथनी को पकड़कर पेट्रोल पंप के पास रखा है। जबकि उसे डिप्टी रेंजर ने नदी के रास्ते एक गांव से उत्तरप्रदेश में जाने के लिए कहा है। आवेदक का कहना है कि वन विभाग के अफसरों ने लेन-देन किया है। मामले में सीसीएफ संजीव झा ने जांच कराए जाने की बात कही है।












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