साइन लैंग्वेज में बात कर डॉक्टर्स ने गूंगे-बहरे कोरोना मरीज का किया उपचार, यूं मिली सफलता
सूरत। शहर समेत राज्य में कोरोना से कोहराम मचा हुआ है और डॉक्टर्स व मेडिकल स्टाफ तत्परता से मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं। किंतु, ऐसे ही समय में कभी कुछ ऐसे मरीज भी आते हैं, जिनका इलाज करना डॉक्टर्स के लिए चुनौतीपूर्ण बन जाता है। ऐसा ही एक मामला शहर के स्मीमेर अस्पताल में सामने आया, जहां सागर सत्यनारायण नामक एक गूंगा-बहरा (दिव्यांग) व्यक्ति कोरोनाग्रस्त हो गया।

डॉक्टरों को उसके उपचार में काफी बाधाएं आईं। डॉक्टरों ने साइन लैंग्वेज में उससे बातें कीं और उपचार जारी रखा। फिर 14 दिनों में वह ठीक हो गया। इस संबंध में बताते हुए मेडिसिन विभाग की मुखिया डॉक्टर हस्तिनी कोठारी बोलीं कि, 9 सितंबर को लिम्बायत क्षेत्र के सागर सत्यनारायण को कोरोना के कारण आईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया था। इतना ही नहीं, ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण उसको वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ा। हमें तभी बताया गया कि, वो दिव्यांग है। साथ ही मानसिक रूप से भी विक्षिप्त है।
फिर भी डॉक्टर्स ने उम्मीद नहीं छोड़ी और इशारों-इशारों में उससे बात करते हुए उसके मन का हाल जानने का प्रयास किया। उसकी हिम्मत बढ़ाते हुए उसका उपचार किया गया। समय पर खाना, कुछ एक्सरसाइज व बातचीत के बाद धीरे-धीरे उसकी स्थिति सुधरने लगी। जिसके चलते उसे नॉर्मल वार्ड में शिफ्ट किया गया। कुछ दिनों में डॉक्टर्स व स्टाफ सागर के साथ घुलमिल गए और जितना हो सका, खूब मदद की।
इस तरह सागर के मन की चिंताएं दूर होने लगीं और बीती 22 सितंबर को ही उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। उसके बाद उसको डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉक्टरों ने कहा कि, ऐसे मरीज जब स्वस्थ होते हैं तो दूसरे कई मरीजों के साथ-साथ हमारी भी हिम्मत बढ़ती है। इससे कोरोना से लड़ने की ताकत भी मिलती है।












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