सुल्तानपुर से पहली बार सांसद बनकर संसद पहुंचने वाली महिला बनीं मेनका गांधी

Sultanpur news, सुल्तानपुर। बेटे की राजनैतिक जमीन सुल्तानपुर पर भाग्य आजमाने पहुंची केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का सफर चुनौतियों से भरा था। पार्टी वर्कर्स की नाराजगी एक तरफ थी तो वोटर्स का बदला मूड एक ओर। इसके बाद खिलाफ बीएसपी समर्थित गठबंधन प्रत्याशी चन्द्रभद्र सिंह का स्थानीय चेहरा तो मेनका का बाहरी रूप जिसे बहुत धार दिया गया। इस सबसे ऊपर था मेनका के लिए सुल्तानपुर के इतिहास का महिला उम्मीदवार के हार के मिथक को तोड़ना, लेकिन डेढ़ महीने के कड़े परिश्रम का आखिर उन्हें फल मिला और उन्होंने सुल्तानपुर सीट के लोकसभा इतिहास के उस मिथक को कड़े मुकाबले के बाद 13859 वोटों से मात दे ही दी।

गठबंधन प्रत्याशी को हराया

गठबंधन प्रत्याशी को हराया

गुरुवार को मतगणना के दिन सुबह से ही मेनका गठबंधन प्रत्याशी चन्द्रभद्र सिंह सोनू से कड़ा मुकाबला करती रहीं। शुरुआती दौर में वो पीछे रहीं, बीच में थोड़ा बढ़त बनाई फिर दूर हुईं, लेकिन दोपहर बाद उन्होंने जो रेस बनाई उसमें वो कामयाब हो गईं। मेनका को जहां 458281 वोट मिले वहीं गठबंधन प्रत्याशी को 444422 वोट मिले। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद 2014 के अपनी पत्नी के चुनाव की तरह अपनी जमानत नहीं बचा पाए, जबकि उनको मजबूत करने के लिए राहुल और प्रियंका तक चाची मेनका के खिलाफ प्रचार करने आए थे। इस तरह मेनका की जीत के बाद सुल्तानपुर से पहली बार महिला उम्मीदवार जीत कर संसद में जाएंगी।

क्या है सुल्तानपुर का इतिहास

क्या है सुल्तानपुर का इतिहास

बता दें, 1998 मे जिले के राजनीति इतिहास में पहली बार महिला उम्मीदवार के रूप में इलाहाबाद की निर्दलीय मेयर रही डॉ.रीता बहुगुणा जोशी सपा प्रत्याशी बनाई गई। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी की शहर के खुर्शीद क्लब में भाजपा प्रत्याशी देवेन्द्र बहादुर सिंह के पक्ष में जनसभा कर हवा का रुख मोड़ दिया था और रीता बहुगुणा को करारी शिकस्त मिली थी। इसके बाद 1999 के चुनाव में गांधी परिवार की करीबी रही दीपा कौल कांग्रेस प्रत्याशी बनाई गई। इस चुनाव मे भाजपा प्रत्याशी सत्यदेव सिंह का पर्चा खारिज हो गया। उनका मुकाबला बीएसपी प्रत्याशी जयभद्र सिंह और एसपी प्रत्याशी एवं अम्बेडकरनगर निवासी रामलखन वर्मा से हुआ। बाहरी बनाम स्थानीय का नारा इस चुनाव मे जोर से चला। नतीजे में दीपा कौल चौथे पायदान पर पहुंच गईं थी। बीएसपी से जयभद्र सिंह चुनाव जीते थे। फिर 2004 के लोकसभा चुनाव मे भाजपा ने डॉ. वीणा पाण्डेय को प्रत्याशी बनाया। बीएसपी ने मो.ताहिर खां को प्रत्याशी बनाया था और सपा ने विधान परिषद सदस्य रहे शैलेन्द्र प्रताप सिंह को प्रत्याशी बनाया था।

मेनका ने रचा इतिहास

मेनका ने रचा इतिहास

कांग्रेस से गांधी परिवार के करीबी रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा को प्रत्याशी बनाया था। सतीश शर्मा को बाहरी होने का दंश झेलना पड़ा और अंत मे त्रिकोणीय मुकाबले मे बीएसपी के ताहिर खां विजयी हुए। वीणा पाण्डेय चौथे स्थान पर पहुंच गई थीं। ऐसा ही कुछ 2014 के लोकसभा चुनाव में हुआ। कांग्रेस ने वर्तमान मे कांग्रेस प्रत्याशी सांसद डॉ. संजय सिंह की पूर्व मंत्री डॉ. अमिता सिंह को पार्टी प्रत्याशी बनाया। भाजपा ने गांधी परिवार के वरुण गांधी पद दांव लगाया तो सपा ने शकील अहमद और बसपा ने पूर्व विधायक पवन पांडेय को प्रत्याशी बनाया था। त्रिकोणीय मुकाबले में वरुण गांधी को बड़ी जीत मिली। कांग्रेस प्रत्याशी डॉ.अमिता सिंह चौथे पायदान पर चली गईं। अब 17वीं लोकसभा में बीजेपी ने मेनका गांधी को मैदान में भेजा, ​जिसमें जीत हासिल कर उन्होंने इतिहास रच दिया।

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