भाजपा-पीडीपी की जंग में पिसेंगे कश्मीर के लाखों मनमोहन सिंह!
[अजय मोहन] जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के फैसले पर जब अलगाववादी नेता मसरत आलम को रिहा किया गया, तो सियासी गलियारे में जबर्दस्त भूचाल आया। भारतीय जनता पार्टी को केंद्र के सिंहासन तक पहुंचाने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने गुस्से के मूड में कहा, "भाजपा मुफ्ती से पूछे, क्या वो भारतीय नहीं हैं?" इस एक प्रश्न ने कश्मीर में रह रहे कई लाख मनमोहन सिंह हैरान-परेशान हो गये! उनके रातों की नींद जो पहले से हराम थी, उड़ गई, क्योंकि भाजपा-पीडीपी की इस जंग में वो एक बार फिर पिसने वाले हैं।

आप सोच में जरूर पड़ गये होंगे, कि ये कश्मीर के मनमोहन सिंह कौन हैं? यह बताने से पहले हम आपको बताना चाहेंगे कि कश्मीरी मनमोहन किस हालात में जी रहे हैं। ये वो लोग हैं, जिन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं, ये वो लोग हैं, जिन्हें सरकारी नौकरी करने का अधिकार नहीं। ये वो लोग हैं, जो कश्मीर में खुद का मकान नहीं खरीद सकते, खुद का टेलीफोन नहीं लगवा सकते, बस पूरी जिंदगी शर्णार्थियों की तरह काट रहे हैं।
आजादी के बाद जब हिंदुस्तान का बंटवारा हुआ, तो जो लोग पाकिस्तान से आकर पंजाब में बस गये, उन्हें हर वो दर्जा मिला, जो एक आम भारतीय को मिलता है। सरकारी नौकरी तो बहुत छोटी बात है, देश ने पाकिस्तान से विस्थापित हुए परिवार के बेटे मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पर बिठाने में झिझक नहीं दिखाई। लेकिन मनमोहन सिंह की तरह लाखों लोग ऐसे थे, जो बंटवारे के बाद कश्मीर में जा बसे। सच पूछिए तो यही हैं, कश्मीर के मनमोहन सिंह, लेकिन इनके पास सुख-सुविधायें नहीं। बल्कि ये दर्द भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
कश्मीर में रह रहे विस्थापितों का दर्द
कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ डा. विरेंद्र सिंह चौहान से जब हमने भाजपा-पीडीपी की जंग के परिणामों के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि इस बार कश्मीर में जब भाजपा सत्ता में आयी, तब वेस्ट पार्ट में रह रहे रिफूजियों में एक आस जगी कि अब उन्हें भारतीय नागरिक होने का गौरव प्राप्त हो सकेगा। ये वो लोग हैं जो बंटावारे के दौरान पश्चिमी पाकिस्तान से आ कर यहां बस गये। इनको आज तक स्टेट सबजेक्ट का स्टेटस नहीं मिला। सच पूछिए तो ये दोयम दर्जे के नागरिक हैं। पंचायत चुनाव हो या लोकसभा-विधानसभा, इन्हें वोट डालने तक का अधिकार नहीं।
अगर भाजपा-पीडीपी में नहीं बनी तो
वर्तमान भाजपा-पीडीपी सरकार में पीडीपी का वर्चस्व ज्यादा दिखाई दे रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो इन लोगों की समस्याएं कभी हल नहीं होंगी। इनमें ज्यादातर लोग वो हैं जो पाकिस्तान के मीरपुर और मुजफ्फराबाद से आये हैं। हालांकि एक बड़ा तबका उनका भी है, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से आकर यहां बस गये हैं। यही नहीं कश्मीरी पंडितों के भी कई मामले अधर में लटके हुए हैं, अगर भाजपा के विधायकों ने अपने इस मौके को नहीं भुनाया, तो हो सकता है अगले चुनावों में उनसे सत्ता छिन जाये।
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