ओलंपिक कांस्य पदक विजेता अमन सहरावत को मिल गए जेठालाल! दिलीप जोशी से मुलाकात के बाद पहलवान ने जाहिर की खुशी
अमन सहरावत ने पेरिस ओलंपिक में पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। अमन की जीत उनके समर्पण और कौशल का प्रमाण है। ओलंपिक में मिली खुशी के बाद अमन को फिर से खुश होने का एक बड़ा मौका मिला है, क्योंकि उनकी मुलाकात उनके पसंदीदा शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के जेठालाल (दिलीप जोशी) से हो गई है।
दरअसल, अमन सहरावत ने पेरिस ओलंपिक में अपनी जीत के बाद एक इंटरव्यू में बताया कि वह अपने खाली समय में क्या पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि, 'मुझे अपने खाली समय में तारक मेहता का उल्टा चश्मा देखना पसंद है।' शो के प्रति उनका लगाव सोशल मीडिया पर कई फैंस को पसंद आया।

मुझे जेठालाल से मिलकर बहुत अच्छा लगा
अमन सहरावत ने अपनी इंस्टा पोस्ट पर दिलीप जोशी के साथ फोटो शेयर करते हुए अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने इंस्टा पोस्ट में लिखा, 'आज मुझे जेठालाल (दिलीप जोशीजी) से मिलकर बहुत अच्छा लगा। इनको देखकर "तारक मेहता का उल्टा चश्मा" में मुझे हमेशा हंसी और खुशी मिलती थी, मेरे कठिन समय में भी। बहुत-बहुत धन्यवाद मुझसे मिलने के लिए।'
सेहरावत की यात्रा और प्रेरणा
12 साल की उम्र में अपने माता-पिता को खो देने के बाद अमन सेहरावत को छत्रसाल स्टेडियम में सुकून मिला, जहां उनके पिता ने 2013 में उनका दाखिला कराया था। इस स्टेडियम ने भारत के लिए चार ओलंपिक पदक विजेता दिए हैं: सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, बजरंग पुनिया और रवि दहिया। यह अमन का दूसरा घर बन गया और इसने उनके कुश्ती करियर को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सेहरावत के सेमीफाइनल तक पहुंचने का रास्ता व्लादिमीर एगोरोव और ज़ेलिमखान अबकारोव पर तकनीकी श्रेष्ठता की जीत से चिह्नित था। वह एक भी अंक गंवाए बिना आगे बढ़े, लेकिन सेमीफाइनल में उन्हें जापान के रेई हिगुची के खिलाफ कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा।
अमन का TMKOC के प्रति प्रेम
कुश्ती के अलावा उनके शौक के बारे में पूछे जाने पर अमन ने खुलासा किया, 'मुझे अपने खाली समय में तारक मेहता का उल्टा चश्मा देखना पसंद है।' यह कथन शो के प्रशंसकों के बीच काफी पसंद किया गया और सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया। दरअसल, TMKOC के एपिसोड अभी भी दर्शकों के दिलों में एक खास जगह रखते हैं।
छत्रसाल स्टेडियम ने अमन सेहरावत जैसी प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई है। व्यक्तिगत क्षति से लेकर ओलंपिक गौरव तक का उनका सफर भारत भर के कई युवा एथलीटों के लिए प्रेरणादायी है। अमन सेहरावत की सफलता की कहानी दृढ़ता और समर्पण के महत्व को उजागर करती है।












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