कौन हैं निथ्या श्री सिवन, पैरालंपिक के डेब्यू में जीता ब्रॉन्ज मेडल, कभी क्रिकेट बनने की थी ख्वाहिश
Paris 2024 Paralympics Nithya Sre Sivan: नित्या श्री सिवन (Nithya Sre Sivan) ने पेरिस पैरालिंपिक 2024 में महिला एकल बैडमिंटन की एसएच6 श्रेणी में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया है। उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी इंडोनेशिया की रीना मार्लिना पर हावी होकर केवल 23 मिनट में 21-14, 21-6 से मैच जीत लिया। इस जीत के बाद से ही नित्या श्री सिवन सुर्खियों में बनी हुई हैं।
भारत ने जीते 15 मेडल
पेरिस पैरालिंपिक 2024 की मेडल तालिका में भारत की स्थिति सुधरकर 15वें स्थान पर पहुंच गई है। देश ने कुल 15 मेडल जीते हैं, जिसमें तीन गोल्ड, पांच सिल्वर और सात ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। गोल्ड मेडल विजेताओं में निशानेबाजी में अवनी लेखरा, बैडमिंटन में नितेश कुमार और भाला फेंक में सुमित अंतिल का नाम शामिल हैं।

नित्या श्री सरन ने दिखाया दम
नित्या श्री सरन ने शुरू से ही मैच पर नियंत्रण बनाए रखा। पहले गेम में उन्होंने रीना मार्लिना को 21-14 के स्कोर से हराया और मजबूत बढ़त हासिल की। उनका आक्रामक खेल दूसरे गेम में भी जारी रहा, जिसे उन्होंने सिर्फ़ 10 मिनट में 21-6 से जीत लिया।
कौन हैं नित्या श्री सरन
तमिलनाडु के होसुर की रहने वाली नित्या ने SH6 कैटेगरी में जीत हासिल करके भारत का नाम रोशन किया है। 1 जुलाई 2005 को एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी नित्या की सफलता की यात्रा प्रेरणादायक है। हालांकि उन्होंने बैडमिंटन में भारत के लिए मेडल जीते हैं, लेकिन उनका शुरुआती सपना एक क्रिकेटर बनना था। क्रिकेट में उनकी रुचि घर में खेल के माहौल से उपजी थी। उनके भाई ने जिला स्तर पर क्रिकेट खेला था, जिससे खेल के प्रति उनका प्यार प्रभावित हुआ। क्रिकेट के प्रति इस शुरुआती जुनून के बावजूद नित्या को अंततः बैडमिंटन में अपना लक्ष्य मिला।
आसान नहीं रहा सफर
नित्या एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ी जहां खेलों को बहुत महत्व दिया जाता था, स्वाभाविक रूप से एथलेटिक्स की ओर झुकाव रखती थी। जिला स्तरीय क्रिकेट में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले उसके भाई की उपस्थिति ने उसकी शुरुआती आकांक्षाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पारिवारिक प्रभाव ने शुरू में उसे क्रिकेट की ओर आकर्षित किया।
कभी क्रिकेट बनने की थी ख्वाहिश
हालांकि, समय बीतने के साथ नित्या को बैडमिंटन के प्रति अपनी प्रतिभा और जुनून का पता चला। इस बदलाव ने SH6 श्रेणी में एक प्रतिष्ठित एथलीट बनने की दिशा में उनके सफर की शुरुआत की। इस उपलब्धि को हासिल करने में उनकी लगन और कड़ी मेहनत का अहम योगदान रहा है।
नित्या का क्रिकेटर से बैडमिंटन चैंपियन बनना तुरंत नहीं हुआ। इसमें अलग-अलग खेलों को तलाशना और अपनी असली क्षमता को पहचानना शामिल था। अपने परिवार के समर्थन और घर में खेल के माहौल से प्रोत्साहित होकर उन्होंने धीरे-धीरे बैडमिंटन पर ध्यान केंद्रित किया।












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