Paris Olympics: मैगी खाकर काम चला रहा भारतीय मुक्केबाजी टीम का कोचिंग स्टाफ, खाने के पड़ गए हैं लाले

Paris Olympics: बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया की तरफ से पेरिस ओलंपिक में 25 अधिकारी गए हैं जबकि सपोर्ट स्टाफ को खाने के लाले पड़ गए हैं। टीम के कोचिंग स्टाफ से जुड़े लोग खेल गाँव से बाहर रह रहे हैं और उनके खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है, सभी लोग खाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

बॉक्सिंग टीम के एक अधिकारी का कहना है कि उनको काफी कम संसाधनों के साथ काम चलाना पड़ रहा है। खर्चे के लिए हर व्यक्ति के लिए दिन का भत्ता 100 डॉलर है लेकिन इससे कुछ नहीं हो पा रहा है। दिन में दो बार भोजन के लिए यह राशि कम है क्योंकि पेरिस में सब कुछ काफी महंगा है।

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खेल गाँव से बाहर रह रहे स्टाफ सदस्य का कहना है कि हम पास की किराने की दुकान पर जाते हैं और अपना भोजन स्वयं पकाते हैं। हम भोजन में मैगी और ब्रेड/बटर ले सकते हैं। खेल गाँव के बाहर रहने वाले ऑफिसियल खेल मंत्रालय द्वारा अनुमोदित एजेंसी से बुक की गई होटल में रहते हैं लेकिन वहां सिर्फ नाश्ते की सुविधा है। लंच और डिनर की व्यवस्था खुद ही करनी पड़ती है।

गौरतलब है कि चार महिला मुक्केबाजों सहित छह सदस्यीय राष्ट्रीय मुक्केबाजी टीम ने पेरिस ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई किया है। बॉक्सिंग टीम का प्रदर्शन अब तक संतोषजनक नहीं है। छह मुक्केबाजों में से अमित पंघाल (पुरुष 51 किग्रा) और जैस्मीन लेम्बोरिया (महिला 57 किग्रा) प्रतियोगिता में जल्दी हार गए।

खेल मंत्रालय द्वारा स्वीकृत भारतीय दल की सूची से टीम के तीन कोच और फिजियो को खेल गाँव में ठहराया सकते हैं। सात कोचिंग स्टाफ को खेल गाँव के बाहर रखा गया है। बाहर रहने वालों को खाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खेल मंत्रालय ने ही 100 डॉलर प्रति व्यक्ति सपोर्ट स्टाफ को देनी का फैसला लिया गया था। मंत्रालय के लेटर में कहा गया था कि यह भुगतान सीधे स्टाफ सदस्यों के बैंक खातों में जाएगा।

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