कॉमनवेल्थ गेम्स में कैसा रहा है भारत का प्रदर्शन, 1934 से अब तक की बात

इंग्लैंड के बर्मिंघम में इस साल 28 जुलाई से 8 अगस्त तक कॉमनवेल्थ गेम्स होने जा रहे हैं. पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में तीसरे स्थान पर रहे भारत को इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.

ऐसे में आइए जानते हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रदर्शन अबतक कैसा रहा है.

पहला कॉमनवेल्थ गेम्स 1930 में कनाडा के शहर हैमिलटन में हुआ था. उस वक्त इसे ब्रिटिश एंपायर गेम्स के नाम से जाना जाता था. इस पहली प्रतियोगिता के लिए 11 देशों ने कुल 400 एथलीट्स भेजे. महिलाओं ने सिर्फ़ तैराकी के मुक़ाबलों में हिस्सा लिया था. लेकिन इस साल की प्रतियोगिता में भारत नहीं शामिल था.

साल 1934 में कॉमनवेल्थ गेम्स में हुई भारत की एंट्री

1930 के बाद आमतौर पर हर चार साल में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन होता रहा है. लेकिन दूसरे विश्वयुद्ध की वजह से 1942 और 1946 इसका आयोजन नहीं हुआ.

1930 के बाद 1934 में दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स यानी ब्रिटिश एंपायर गेम्स लंदन में हुए. इस संस्करण में भारत समेत कुल 16 देशों के 500 एथलीट्स ने हिस्सा लिया.

ये 16 देश ऑस्ट्रेलिया, बरमूडा, ब्रिटिश ग्याना, कनाडा, इंग्लैंड, नॉर्थ आयरलैंड, न्यूफ़ाउंड लैंड, न्यूज़ीलैंड, स्कॉटलैंड, दक्षिण अफ्रीका, वेल्स, भारत, हॉन्गकॉन्ग, जमैका, जिम्बॉब्वे और त्रिनिदाद थे.

हालांकि, भारत ब्रिटिश झंडे के नीचे खेला क्योंकि तब भारत में अंग्रेज़ों का शासन था.

भारत ने केवल दो स्पर्धाओं कुश्ती और एथलेटिक्स में हिस्सा लिया.

17 देशों के बीच भारत ने एक कांस्य पदक के साथ अपना खाता खोला और वह 12वें यानी अंतिम पायदान पर रहा.

पुरुष के 74 किलो ग्राम वर्ग वाले मुक़ाबले में राशिद अनवर ने भारत को कांस्य पदक दिलाया.

1934 से लेकर 2018 तक भारत ने कुल 503 मेडल जीते हैं. इनमें 181 गोल्ड, 173 सिल्वर और 149 ब्रॉन्ज़ शामिल है.

साल 1950 में कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने नहीं लिया हिस्सा

1938 में आयोजित हुए तीसरे ब्रिटिश एंपायर गेम यानी कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को कोई मेडल हासिल नहीं हुआ.

इसके बाद दूसरे विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 के कॉमनवेल्थ गेम्स यानी ब्रिटिश एंपायर गेम्स का आयोजन नहीं हो सका.

1947 में भारत को आज़ादी मिली और 1950 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने हिस्सा नहीं लिया.

आज़ादी के बाद से कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने ज़्यादातर एथलेटिक्स में हिस्सा लिया, कई बार भारत को उम्मीदों के हिसाब से कामयाबी नहीं मिली. लेकिन बाद के सालों में भारत के प्रदर्शन में काफी सुधार देखने को मिला है.

कॉमनवेल्थ गेम्स-1958 में भारत को दो गोल्ड

1954 में एक बार फिर कनाडा को कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन करने का मौका मिला. वैंकूवर शहर में आयोजित प्रतियोगिता का नाम ब्रिटिश एंपायर गेम्स से बदलकर ब्रिटिश एंपायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स कर दिया गया.

भारत और पाकिस्तान दोनों देशों ने इसमें हिस्सा लिया था. इस बार भी भारत का खाता नहीं खुला. लेकिन साल 1958 में वेल्स के कार्डिफ़ शहर में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स ने इस प्रतियोगिता में भारत को नया मुकाम दिलाने में काफी मदद की.

1958 में भारत ने दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल अपने नाम किया.

फ़्लाइंग सिख के नाम से मशहूर भारत के एथलीट मिल्खा सिंह ने 440 मीटर दौड में गोल्ड मेडल जीता था. ये वह दौर था जब मिल्खा सिंह पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा रहे थे. आज तक भारत का कोई एथलीट यह कारनामा दोहरा नहीं सका है.

दूसरा गोल्ड मेडल हैवीवेट वर्ग में उतरने वाले पहलवान लीला राम ने जीता.

कुश्ती में ही लक्ष्मीकांत पांडे ने रजत पदक जीता. वह 74 किलोग्राम वर्ग में थे.

महिलाओं की हिस्सेदारी के लिहाज से भी ये साल काफी अहम रहा, जब भारत की तरफ से स्टेफनी डिसूजा और एलिजाबेथ डेवनपोर्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने वाली पहली महिला एथलीट बनीं.

कॉमनवेल्थ गेम्स-1958 में कुल 35 देश शामिल हुए थे और भारत 8वें स्थान पर था.

साल 1966 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के पदकों की संख्या दोहरे अंकों में

1962 में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन हुआ लेकिन इस प्रतियोगिता में भारत ने हिस्सा नहीं लिया.

साल 1966 तक ब्रितानी साम्राज्य औपचारिक रूप से ख़त्म हो चुका था इसलिए कॉमनवेल्थ गेम्स के इस संस्करण को ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम से जाना जाता है.

1966 के इस संस्करण का आयोजन जमैका के किंग्सटन शहर में हुआ था और इसमें कुल 34 देशों ने हिस्सा लिया था.

प्रतियोगिता में भारत ने तीन स्वर्ण, चार रजत और तीन कांस्य पदक जीते.

भारत के तीनों गोल्ड मेडल कुश्ती में आए. विशंभर सिंह ने 57 किलोग्राम वर्ग में, भीम सिंह ने 100 किलोग्राम वर्ग में तो मुख़्तार सिंह ने 68 किलोग्राम वर्ग में भारत को गोल्ड दिलाया. भारत इस प्रतियोगिता में छठे स्थान पर रहा.

1970 में 9वें कॉमनवेल्थ गेम्स स्कॉटलैंड के एडिनब्रा में आयोजित किए गए.

इस बार भी कॉमनवेल्थ गेम्स में कुश्ती पर ही भारत के प्रदर्शन का दारोमदार था. भारत को कुश्ती के मुक़ाबलों में पांच गोल्ड मिले और कुल पदकों की संख्या 12 रही.

इसके अलावा तीन सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज़ मेडल भारत को मिले. इस प्रतियोगिता में 42 देशों ने हिस्सा लिया था और भारत छठे स्थान पर रहा.

कॉमनवेल्थ गेम्स का 10वां संस्करण 1974 में न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर में आयोजित हुआ. इस प्रतियोगिता में भारत ने 4 गोल्ड मेडल समेत कुल 15 मेडल जीते थे.

ये चारों ही गोल्ड कुश्ती में आए थे. भारत इस साल भी छठे स्थान पर रहा.

सही मायनों में कॉमनवेल्थ गेम्स पहली बार अपने नाम से 1978 में आयोजित हुआ. यह कॉमनवेल्थ गेम्स 11वां संस्करण था और इसका आयोजन कनाडा के शहर एडमंटन में हुआ था.

भारत का प्रदर्शन ज्यों का त्यों बना रहा. उसने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज़ के पांच-पांच पदक जीते. कीनिया, न्यूज़ीलैंड और स्कॉटलैंड ने भी पहले की ही तरह प्रदर्शन किया.

प्रकाश पादुकोण ने जीता था बैडमिंटन में गोल्ड

भारत की ओर से बैडमिंटन के पुरुष एकल मुक़ाबले में प्रकाश पादुकोण ने गोल्ड जीता तो महिला डबल्स में भारत को कांस्य पदक मिला. भारत के लिए एक गोल्ड मेडल भारोत्तोलन के 52 किलोग्राम में इ करुणाकरण ने जीता. बाक़ी तीन गोल्ड और चार सिल्वर मेडल भारत को कुश्ती में मिले.

भारत को मुक्केबाज़ी और पुरुषों की लंबी कूद में कांस्य पदक मिले. साइकलिंग, निशानेबाज़ी और तैराकी में कुल चार नए रिकॉर्ड बने. भारत इस बार भी छठे स्थान पर रहा था.

ब्रिस्बेन कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने जीते 16 मेडल

बारहवें कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन ऑस्ट्रेलिया के शहर ब्रिसबेन में हुआ. भारत ने कुल 16 मेडल जीते जिसमें पांच गोल्ड और आठ सिल्वर मेडल शामिल रहे.

भारत ने इस बार भी बैडमिंटन के पुरुष एकल मुक़ाबले में गोल्ड मेडल हासिल किया लेकिन इसबार यह कारनामा सैयद मोदी ने दिखाया.

बाकी के चारों गोल्ड मेडल भारत को कुश्ती में मिले. कुश्ती में भारत का वर्चस्व बरक़रार रहा क्योंकि उसे चार सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ पदक भी मिले. तीन सिल्वर भारत को भारोत्तोलन में मिले. मुक्केबाज़ी में एक ब्रॉन्ज़ के अलावा निशानेबाज़ी में एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ मिला.

भारत ने तैराकों की एक बड़ी टीम भेजी थी लेकिन कोई भी पदक हासिल करने में सफल नहीं रहा.

1986 में स्कॉटलैंड के एडिनब्रा में आयोजित हुए अगले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने हिस्सा नहीं लिया था.

1990 में भारोत्तोलन ने भारत को दिलाए गोल्ड ही गोल्ड

कॉमनवेल्थ गेम्स का 14वां संस्करण न्यूज़ीलैंड के शहर ऑकलैंड में 1990 में आयोजित किया गया. इस संस्करण में भारत ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारोत्तोलन में 12 गोल्ड मेडल समेत कुल 13 गोल्ड मेडल हासिल किए थे. भारतीय खिलाड़ियों ने इसी में पांच नए रिकॉर्ड भी बनाए.

भारोत्तोलन के अलावा एक गोल्ड शूटिंग में अशोक पंडित ने जीता था.

इस संस्करण में भारत ने कुल 32 मेडल जीतकर पांचवा स्थान हासिल किया था. इसमें 13 गोल्ड, 8 सिल्वर और 11 ब्रॉन्ज शामिल हैं. प्रतियोगिता में भारत पांचवे स्थान पर रहा था.

कॉमनवेल्थ गेम्स का 15वां संस्करण कनाडा के शहर विक्टोरिया में 1994 में हुआ था. भारत ने इस प्रतियोगिता में कुल 24 मेडल हासिल किए थे. इनमें 6 गोल्ड, 11 सिल्वर और 7 ब्रॉन्ज़ शामिल थे. भारत को तीन गोल्ड निशानेबाज़ी और तीन ही भारोत्तोलन में मिले.

1998 में शूटिंग में फिर भारत ने दिखाया दमखम

कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार किसी कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन एशिया में हुआ. इन खेलों का 16वां संस्करण मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर में 1998 में हुआ.

भारत को 7 गोल्ड मेडल के साथ कुल 25 मेडल मिले. भारत ने चार गोल्ड शूटिंग में और 3 भारोत्तोलन में जीते. 7 गोल्ड के अलावा 10 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज़ मिलाकर भारत ने कुल 25 मेडल जीते.

शूटिंग के दमपर भारत का दमदार प्रदर्शन

2002 में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन इंग्लैंड में हुआ और इस प्रतियोगिता में भारत ने इससे पहले के आयोजनों के मुक़ाबले बेहतरीन प्रदर्शन किया था. भारत एक नई खेल शक्ति के तौर पर उभरा, और 30 स्वर्ण पदक के साथ वह कनाडा से एक गोल्ड मेडल पीछे स्थान पर रहा. भारत ने 30 गोल्ड के साथ कुल 69 मेडल हासिल किए.

भारत को निशानेबाज़ी में 14 गोल्ड और भारोत्तोलन में 11 गोल्ड मिले. कुश्ती में तीन, मुक्केबाजी में एक, महिला हॉकी में गोल्ड मेडल हासिल हुआ.

मेलबर्न कॉमनवेल्थ गेम्स 2006 में भारत को 50 मेडल

ऑस्ट्रेलिया के शहर मेलबर्न में कॉमनवेल्थ गेम्स का 18वां संस्करण 2006 में आयोजित हुआ.

भारत को इस प्रतियोगिता में 22 गोल्ड मेडल के साथ 50मेडल मिले. भारत को एक बार फिर सबसे ज़्यादा मेडल निशानेबाज़ी में मिला. भारत के अखिल कुमार ने मुक्केबाज़ी में गोल्ड जीता वहीं. टेबल टेनिस में दो गोल्ड और भारोत्तोलन में तीन गोल्ड भारत को हासिल हुए.

भारत को 17 सिल्वर और 11 ब्रॉन्ज़ मेड हासिल हुए थे और भारत चौथा स्थान पर रहा था.

भारत के लिए अबतक का सबसे कामयाब कॉमनवेल्थ गेम्स

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कॉमनवेल्थ गेम्स

साल 2010 में हुए 19वें कॉमनवेल्थ गेम्स की जिम्मेदारी भारत ने संभाली थी. इस संस्करण में भारत ने 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज़ समेत पहली बार मेडल का शतक बनाते हुए रिकॉर्ड 101 मेडल अपने नाम किए.

इस बार भी 14 गोल्ड शूटिंग से आए, इसके बाद कुश्ती का नंबर रहा. भारत को इस प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल हुआ था. ऑस्ट्रेलिया 74 गोल्ड और कुल 180 मेडल के साथ इस प्रतियोगिता में पहले स्थान पर था.

साल 2014 में 20वें कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन स्थल बना ग्लास्गो. भारत यहां पिछले 101 मेडल के मुक़ाबले 64 मेडल पर सिमट गया. भारत के हाथ 15 गोल्ड, 30 सिल्वर और 19 ब्रॉन्ज़ मेडल लगे. कुश्ती में 5 गोल्ड और शूटिंग में 4 गोल्ड हासिल हुए. भारत इस प्रतियोगिता में पांचवे स्थान पर रहा.

2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में तीसरे स्थान पर रहा भारत

ऑस्ट्रेलियाई शहर गोल्ड कोस्ट में हुए 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को 26 गोल्ड मेडल, 20 सिल्वर, 20 ब्रॉन्ज़ के साथ कुल 66 मेडल हासिल हुए. भारत पदक तालिका में तीसरे स्थान पर रहा. 80 गोल्ड और कुल 198 मेडल के साथ ऑस्ट्रेलिया पहले स्थान पर और 45 गोल्ड, 136 मेडल के साथ इंग्लैंड दूसरे स्थान पर रहा था.

अबतक किस खेल में मिले भारत को सबसे ज़्यादा मेडल

1934 से लेकर अबतक के भारत के आंकड़ों की बात करें तो भारत को सबसे ज़्यादा मेडल शूटिंग में हासिल हुए हैं. इसके बाद भारोत्तोलन और कुश्ती का नंबर आता है. चौथे नंबर पर बॉक्सिंग और पांचवे पर बैडमिंटन है.

भारत को शूटिंग में अबतक कुल 135 मेडल हासिल हुए हैं. इसमें 63 गोल्ड, 44 सिल्वर और 28 ब्रॉन्ज़ है. भारोत्तोलन में भारत को कुल 125 मेडल हासिल हुए हैं, इसमें से 43 गोल्ड, 48 सिल्वर और 34 ब्रॉन्ज़ है. भारत का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल लाने वाले खेल कुश्ती में भारत को अबतक 43 गोल्ड मिल चुके हैं, 37 सिल्वर और 22 ब्रॉन्ज़ मिलाकर कुल 102 मेडल मिल चुके हैं.

कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे सफल भारतीय खिलाड़ी

ओलंपिक्स की ऑफिशियल वेबसाइट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पिस्टल शूटर निशानेबाज जसपाल राणा कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सबसे सफल खिलाड़ी रहे हैं. उन्होंने कुल 15 मेडल हासिल किए हैं. इनमें से 9 गोल्ड, चार सिल्वर और दो ब्रॉन्ज़ हैं.

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