OI Exclusive: आशु मलिक के लिए क्या है सबसे बड़ी चुनौती? दूसरी बार दबंग दिल्ली का कप्तान बनने पर कितना दबाव

OI Exclusive, Ashu Malik: दबंग दिल्ली केसी ने प्रो कबड्डी लीग में सीजन 8 में टाइटल अपने नाम किया था। साल 2021-22 के उस सीजन में पटना पाइरेट्स को हराया था। इसके बाद कोई टाइटल नहीं जीता है। इस बार फिर से दबंग दिल्ली एक खिताब जीतने की तलाश में है। टीम की कप्तानी आशु मलिक के पास है।

आशु मलिक पिछले सीजन नवीन कुमार के साथ दिल्ली के कप्तान थे। दोनों कप कप्तानी मिली थी। इस बार फिर से वह टीम को लीड कर रहे हैं। टीम को चैम्पियन बनाने का सपना लेकर चल रहे आशु मलिक ने वनइंडिया से कई मुद्दों पर खुलकर बातचीत की। आशु मलिक ने इस सीजन की सबसे बड़ी चुनौती से लेकर कोच के साथ तालमेल तक काफी बातें बताई हैं।

ashu malik

दूसरी बार कप्तानी का दबाव?

दूसरी बार कप्तान बनने को लेकर आशु मलिक ने कहा कि दबाव जैसा कुछ नहीं है क्योंकि इसमें 100 फीसदी देना है। फिटनेस पर काम करने आए हैं और उसी हिसाब से खेलना है। बिना किसी प्रेशर के खेलना है और इस बार टीम को आगे तक लेकर जाने का प्रयास होगा।

इस सीजन की सबसे बड़ी चुनौती

कप्तानी और रेडिंग में सबसे बड़ी चुनौती के बारे में बात करते हुए आशु ने कहा कि रेड के बाद आउट होकर कई बार 7 से 8 मिनट तक रिवाइव होकर वापस आने का मौका नहीं मिलता है। कप्तान होकर बाहर बैठे रहना और वहां से टीम को हैंडल करना एक बड़ी चुनौती रहती है।

कोच जोगिंदर नरवाल के साथ कैसा तालमेल

कोच जोगिंदर नरवाल के बारे में उन्होंने कहा कि हम दोनों का तालमेल अच्छा है। सीजन आठ में उनकी कप्तानी में हमने जीत दर्ज की थी। उनको पता है कि मेरी स्ट्रेंथ और स्किल क्या है। वह प्रैक्टिस भी काफी अच्छी कराते हैं और टीम को मोटिवेट करने के लिए कहते हैं।

इस सीजन सबसे ज्यादा चुनौती वाली टीम

इस सीजन सबसे बड़ी चुनौती वाली टीम को लेकर उन्होंने कहा कि यूपी योद्धाज में खिलाड़ी पिछले सीजन वाले हैं और टीम काफी तगड़ी है। यूपी की टीम में डिफेंस काफी युवा है। मेरी नज़र में सबसे बेहतरीन टीम यही है और इसी टीम को मैं इस बार सबसे बड़ी चुनौती मानता हूं।

फजल अत्राचली के साथ कैसा बॉन्ड

फजल अत्राचाली को लेकर उन्होंने कहा कि वह अनुभवी खिलाड़ी हैं और काफी सीनियर भी हैं लेकिन ऐसा लगने नहीं देते हैं। उनकी तरफ से मजाक-मस्ती चलता रहता है। उसी तरह वह अभ्यास के दौरान मेहनत भी उतनी ही करते हैं। सबके साथ उनका बर्ताव काफी अच्छा है।

गाँव में कबड्डी देखकर खेलने का सोचा

कबड्डी में आने का सपना गाँव में मैचों को देखकर बुना। उसी दौरान प्रो कबड्डी लीग शुरू हो गया था। आशु ने कहा कि गाँव से ही मन में मोटिवेशन आया कि मुझे भी कबड्डी में जाना है। पहले ऐसे ही घूम सकते थे लेकिन अब लोग जानते हैं, तो कहीं बाहर जाते समय कैप या चश्मा लगाकर जाना पड़ता है।

कौन करता है सबसे ज्यादा मोटिवेट

कबड्डी में सबसे बड़ा मोटिवेशन आशु ने परिवार को बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि कोच का भी मोटिवेशन रहता है और टीम मैनेजमेंट भी काफी अच्छा है, वे कभी मनोबल गिराने का प्रयास नहीं करते हैं। ऑफ़ सीजन के दौरान भी एक टाइम अभ्यास जारी रहता है। प्रोटीन और बादाम लेता हूँ। खास डाईट नहीं रहती।

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