मछुआरे का बेटा बना कबड्डी का नया बादशाह! पिता की मौत के बाद भाई ने संभाला, लिखी नई कहानी
kabaddi player Nagababu: वो कहते हैं ना कि अगर सपने बड़े हों तो मुश्किल रास्ते भी आसान लगने लगते हैं। विजयवाड़ा के मछुआरे के बेटे चेक्का नागाबाबू ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। युवा आंध्र चैम्पियनशिप में नागाबाबू ने अपने दमदार खेल से सबको हैरान कर दिया। विजयनगरम निंजाज टीम की ओर से खेलते हुए उन्होंने 226 रेड प्वाइंट्स बनाए और लगातार पांच थंडर 20 करके नया इतिहास रच दिया।
नागाबाबू ने रचा इतिहास (kabaddi player Nagababu)
नागाबाबू इस चैम्पियनशिप में 100 और 200 रेड प्वाइंट्स का आंकड़ा पार करने वाले पहले खिलाड़ी बने। इतना ही नहीं, उन्हें बेस्ट रेडर का खिताब भी मिला। 71% की शानदार स्ट्राइक रेट के साथ उन्होंने दिखा दिया कि वे सिर्फ खिलाड़ी नहीं, आने वाले समय के सुपरस्टार हैं। हालांकि उनकी टीम विजेता नहीं बन पाई और दूसरे स्थान पर रही, लेकिन नागाबाबू का व्यक्तिगत प्रदर्शन पूरी सीरीज की सबसे बड़ी हाइलाइट रहा।

मछुआरों के गांव से आते हैं नागाबाबू
तेलंगाना टूडे के मुताबिक नागाबाबू का सफर आसान नहीं था। वे आंध्र प्रदेश के रामन्नापालेम नामक एक छोटे से मछुआरों के गांव से आते हैं। उनके पिता का निधन 2016 में हो गया था, जिसके बाद बड़े भाई ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। शुरुआत में भाई ने उन्हें कबड्डी खेलने से रोका, चोट के डर से। लेकिन जब उन्होंने नागाबाबू का जुनून और टैलेंट देखा तो सबसे बड़े सपोर्टर बन गए।
कोविड-19 में कबड्डी खेलना किया था शुरू
कोविड-19 महामारी के दौरान 2019 में नागाबाबू ने कबड्डी खेलना शुरू किया। शुरू में वे छोटे-छोटे गांवों के टूर्नामेंट और बेट मैच खेलते थे। लेकिन मेहनत और लगन से उन्होंने अपने खेल को निखारा। उन्हें सही दिशा दिखाने में स्कूल टीचर पवन सर, तेलुगु टाइटंस के कोच साई सर और आंध्र स्टेट सेक्रेटरी श्रीकांत सर ने अहम भूमिका निभाई।
प्रो कबड्डी लीग में आने का है सपना
नागाबाबू का अगला सपना है तेलुगु कबड्डी लीग और प्रो कबड्डी लीग में खेलना। तेलंगाना टूडे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मैं रोज अभ्यास करता हूं। यह मंच (युवा कबड्डी सीरीज) मेरे लिए बहुत खास है क्योंकि इससे पहले मैंने केवल छोटे टूर्नामेंट ही खेले थे। इस सीरीज ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया है। कड़ी मेहनत और संघर्ष के दम पर आज नागाबाबू कबड्डी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। अब वे सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उस भाई के सपनों के लिए भी खेलना चाहते हैं, जिसने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया।












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