हर महीने पिता के अकाउंट में कितना पैसा डालते हैं युवराज सिंह? रकम जान फैंस भी हुए हैरान!
Yuvraj Singh father Yograj News: पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता और पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह ने अपने जीवन के अकेलेपन पर खुलकर बात की है। उन्होंने खुलासा किया है कि पत्नी और बच्चों से दूर रहने के कारण वह बहुत अकेला महसूस करते हैं और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी वह अजनबियों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि उनका जीवन पूरा हो चुका है और अब वह मरने के लिए तैयार हैं। लेकिन क्या सच में योगराज ने ऐसा ही कहा था या फिर उनकी बातों को अलग तरीके से पेश किया गया है।
अकेलेपन को लेकर क्या बोले थे योगराज सिंह (Yuvraj Singh father Yograj News)
खबरों की मानें तो 'विंटेज स्टूडियो' को दिए एक इंटरव्यू में योगराज सिंह ने कहा था कि मैं अपनी मां, बच्चों, बहू, पोते-पोतियों, परिवार में सभी से प्यार करता हूं। लेकिन मैं किसी से कुछ मांगता नहीं हूं। मेरी जिंदगी पूरी हो चुकी है, भगवान जब चाहें मुझे अपने साथ ले जा सकते हैं। उन्होंने अपनी मौजूदा स्थिति के बारे में बताया कि मैं शाम को अकेला बैठता हूं, घर पर कोई नहीं होता। मैं खाने के लिए अजनबियों पर निर्भर रहता हूं, कभी कोई, कभी कोई और। मैं किसी को परेशान नहीं करता। अगर मुझे भूख लगती है तो कोई न कोई मेरे लिए खाना ले आता है।

तोड़-मरोड़कर कर पेश किया गया बयान
हालांकि, योगराज सिंह ने अब टीवी 9 से बात करते हुए इन बातों को झूठा करार दिया है। योगराज ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और वो अपनी जिंदगी से बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा कि अकेला रहना उन्हें पसंद है। वह खुद ही खाना बनाते हैं और खुद ही अपना घर साफ करते हैं और इसमें कोई बुराई नहीं है। योगराज सिंह ने मरने वाले बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
हर महीने युवराज देते हैं इतने पैसे
योगराज सिंह ने अपने बेटे युवराज सिंह के साथ अपने संबंधों पर बात की। उन्होंने खुलासा किया कि युवराज उन्हें हर महीने 50,000 रुपये भेजते हैं और उनका हालचाल पूछते हैं। योगराज सिंह ने स्वाभिमान से कहा कि वह अपना खाना और घर का काम खुद करते हैं, क्योंकि वह अपने परिवार पर बोझ नहीं बनना चाहते। बता दें कि योगराज सिंह का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर काफी छोटा रहा है। उन्होंने 1980 के दशक की शुरुआत में भारत के लिए एक टेस्ट और छह वनडे मैच खेले थे, लेकिन चोटों के कारण उन्हें जल्दी रिटायर होना पड़ा। हालांकि, वह कोचिंग के माध्यम से खेल से जुड़े रहे हैं।












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