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WTC Final ड्यूक बॉल से खेला जाएगा, जानें दुनिया की टॉप 3 गेंदों में अंतर, 2 के मालिक भारतीय

इंटरनेशनल क्रिकेट में मुख्यतः तीन ही कम्पनियां बॉल्स बनाती हैं। इन तीनों में दो के मालिक भारतीय हैं। सबसे ज्यादा ऑस्ट्रेलिया की बॉल उपयोग में ली जाती है।

SG Balls

Difference between 3 Cricket Balls: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का फाइनल मैच 7 जून को होना है। इसमें कौन सी गेंद इस्तेमाल की जाएगी, इसका फैसला भी हो गया है। आईसीसी ने कहा है कि मुकाबले के लिए ड्यूक बॉल का उपयोग किया जाएगा। दोनों टीमों के लिए यही गेंद होगी।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बॉल तीन जगहों पर ज्यादा बनती है। इनको गेंदों का हब भी कह सकते हैं। भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में रेड, वाईट और पिंक बॉल बनाई जाती है। हर देश में बनने वाली गेंद की अलग खासियत है।

एसजी (सैंसपेरिल ग्रीनलैंड्स): बॉल बनाने की इस कम्पनी का कारखाना भारत के मेरठ में है। 1931 में दो भाइयों केदारनाथ और द्वारकानाथ ने इसे स्थापित किया था। 1940 में इसे एक्सपोर्ट करने के इरादे से भी स्थापित किया गया। क्रिकेट बॉल्स बनाने के अलावा एसजी बैट भी बनाती है।

कूकाबुरा स्पोर्ट: क्रिकेट और हॉकी के सामान यह कम्पनी बनाती है। यह ऑस्ट्रेलिया में है और कूकाबुरा बॉल्स भी बनाती है। किंगफिशर पक्षी के ऊपर इसका नाम रखा गया है। ऑस्ट्रेलिया में बनी गेंद कई देशों में इस्तेमाल की जाती है। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, जिम्बाब्वे आदि देशों में कूकाबुरा गेंद से क्रिकेट होता है।

ड्यूक: यह इंग्लैंड में बनने वाली गेंद है। ब्रिटिश क्रिकेट बॉल लिमिटेड कम्पनी इसे बनाती है। यह 1760 में स्थापित की गई थी। ड्यूक परिवार ने इसे स्थापित किया था। 1987 में इसे राजस्थान से आने वाले भारतीय बिजनेसमैन दिलीप जाजोदिया ने खरीद लिया। ड्यूक बॉल इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में चलती है। आयरलैंड में भी इसका उपयोग होता है।

तीनों गेंदों में क्या है अंतर

हर गेंद में छह टाँके लगे होते हैं। कूकाबुरा में बीच की दो लाइन में टाँके हाथ से लगे होते हैं, बाकी मशीन से लगे होते हैं। एसजी और ड्यूक दोनों गेंदों में ऐसा नहीं होता। दोनों गेंदों के सभी छह टाँके हाथ से लगे होते हैं। इन गेंदों का शेप भी जल्दी खराब नहीं होता है। ड्यूक की सीम लम्बे समय तक रहती है। कूकाबुरा जल्दी खराब होती है। ड्यूक गेंद स्विंग भी ज्यादा करती है। एसजी के टाँके पतले होते हैं और एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। यह गेंद स्विंग ज्यादा नहीं करती लेकिन लम्बे समय तक चलती है और स्पिन में मदद करती है।

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