WTC Final 2023 में टीम इंडिया रवींद्र जडेजा और आर अश्विन को एक साथ खिलाएगी या नहीं?
WTC Final 2023: वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा को एक साथ खिलाएगी या नहीं? आइए देखते हैं दोनों का साथ खेलने या नहीं खेलने पर क्या-क्या स्थितियां बनती हैं।

WTC Final 2023 in Hindi: वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2023 में भारतीय क्रिकेट टीम का मुकाबला इंग्लैंड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने जा रहा है। यह मैच 7 जून को द ओवल में होगा जिसे स्टीव स्मिथ ने स्पिन की मददगार पिच बताया है। लेकिन सवाल यह है क्या यह स्पिन की मददगार पिच भारत में स्पिन फ्रेंडली पिच जैसा बर्ताव करेगी?
ये पिच स्पिन की कितनी मददगार साबित होगी, इस सवाल का स्पष्ट जवाब यदि भारतीय टीम मैनेजमेंट के पास मौजूद हो तो वे रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) और रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) में किसी एक को चुनने को लेकर एक साफ नजरिया बना सकते हैं।
ओवल का इतिहास क्या कहता है-
सवाल यह है, भारतीय टीम क्या पिच को ध्यान में ना रखते हुए इन दोनों ही मैच विजेता खिलाड़ियों को अपनी प्लेइंग इलेवन में शामिल करने जा रही है या नहीं? ओवल के इतिहास पर एक नजर डाल लेते हैं। जहां पिछले 10 टेस्ट मैचों में स्पिनरों ने 57.4 के स्ट्राइक रेट से 252 विकेट चटकाए हैं, जबकि स्पिनरों को 65.4 के स्ट्राइक रेट के साथ 68 विकेट मिले हैं, जो बताता है कि इंग्लैंड की यह पिच भी तेज गेंदबाजी के ही मुफीद हैं।
पिछले WTC फाइनल में क्या हुआ था-
भारत ने पिछला वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल साउथहैंपटन में खेला था जो इंग्लैंड के द रोज बाउल में स्थित है और वहां पर जडेजा और अश्विन दोनों खेले थे। दोनों ने बल्लेबाजी में कोई खास योगदान नहीं दिया। लेकिन अश्विन को गेंदबाजी में प्रत्येक पारी में दो दो अच्छे विकेट मिले थे। रवींद्र जडेजा को उस मुकाबले में सिर्फ एक ही विकेट मिला था। देखा जाए, तो दोनों को साथ खिलाने का कोई बहुत बड़ा प्रभाव उस फाइनल मुकाबले में देखने के लिए नहीं मिला। भारतीय टीम अपनी बैटिंग के चलते ये मुकाबला हार गई थी।
इंग्लैंड के पिछले दौरे पर क्या हुआ-
वहीं भारत के पिछले इंग्लैंड दौरे पर नजर डाली जाए तो पांच टेस्ट मैचों में अश्विन को एक बार भी जगह नहीं मिली और रवींद्र जडेजा को हर मुकाबले में खिलाया गया। जडेजा तब ना बैटिंग में चले और ना ही बॉलिंग में। लेकिन 2022 में हुए एकमात्र रीशेड्यूल टेस्ट में उन्होंने बढ़िया बैटिंग की थी। हालांकि जडेजा ने जिस तरह से 2020 के बाद अपनी बल्लेबाजी में सुधार किया है उससे वह ओवरसीज में एक प्रॉपर ऑलराउंडर के तौर पर अश्विन से कहीं ना कहीं बाजी मार लेते हैं।
इंग्लैंड में जडेजा और अश्विन का रिकॉर्ड-
लेकिन इंग्लैंड में जड्डू का रिकॉर्ड कुछ खास नहीं है जिन्होंने 11 मैचों में सिर्फ 23 विकेट चटकाए हैं और उनका बॉलिंग औसत 46.0 का है। बल्लेबाजी में वे 29.70 की औसत से 594 रन ही बना पाए हैं। वही रविचंद्रन अश्विन ने इंग्लैंड की धरती पर खेले सात टेस्ट मैचों में 28.11 की औसत से 18 विकेट लिए हैं और उनका बल्लेबाजी औसत 23.72 का रहा है। अश्विन के आंकड़े गेंदबाजी में जडेजा से बेहतर है लेकिन बल्लेबाजी में सौराष्ट्र का ऑलराउंडर ही बाजी मार ले जाता है।
अनुभव भी एक फैक्टर है-
यह भी ध्यान रखना होगा कि भारतीय टीम इस बार जसप्रीत बुमराह जैसे गेंदबाज के बिना उतर रही है जिसके चलते बॉलिंग की क्वालिटी में सुधार करने के लिए भारत जडेजा और अश्विन दोनों को साथ लेकर गेंदबाजी की क्लास ऊपर उठाना चाहेगा। तेज गेंदबाजी बहुत अनुभवी नहीं है।
लेकिन ऐसा नहीं होता तो टीम इंडिया एक बार फिर से रवींद्र जडेजा की बल्लेबाजी पर भरोसा करेगी और चार तेज गेंदबाजों और एक स्पिनर के कॉन्बिनेशन के साथ चली जाएगी।
इंग्लैंड की रेस में अश्विन पीछे छूट रहे हैं-
इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि अश्विन की गेंदबाजी स्किल रवींद्र जडेजा से कहीं अधिक बेहतर है, लेकिन अश्विन ने विदेशी दौरे पर ऑस्ट्रेलिया के पिछले दौरे को छोड़ दिया जाए तो बहुत बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ा है।
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ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका की पिचों पर बाउंस होता है जहां पर अश्विन काफी बेहतर कर सकते थे, लेकिन इंग्लैंड में यह गेंदबाज अभी तक मैच जिताने वाला एक भी स्पेल नहीं डाल पाया है जो बात उनके खिलाफ जा सकती है। ऐसे में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए प्लेइंग इलेवन में रवींद्र जडेजा के पास रविचंद्रन अश्विन की तुलना में एडवांटेज है। लेकिन अगर पिच पर स्पिन के लिए थोड़ी भी मददगार परिस्थितियां दिखाई देती है तो यह दोनों मैच में एक साथ खेल सकते हैं।












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