IPL 2025: पावरहाउस टॉप ऑर्डर, फिर भी प्लेऑफ से बाहर! Kavya Maran की SRH को ले डूबे ये 5 गलत फैसले!

IPL 2024 में जहां सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) फाइनल तक पहुंची थी, वहीं 2025 में प्लेऑफ की दौड़ से पहले ही बाहर हो जाना उनके फैंस के लिए किसी झटके से कम नहीं है। टूर्नामेंट की शुरुआत में जब टीम ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 286/6 का स्कोर ठोका, तो लगा ये वही पुरानी धमाकेदार SRH है।

जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ा, बल्लेबाजों की चमक फीकी पड़ी, गेंदबाजी में धार गायब हुई और रणनीतियों में खामियां दिखीं।

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1. टॉप ऑर्डर का फॉर्म एकसाथ खराब होना

अभिषेक शर्मा, ट्रेविस हेड, ईशान किशन, नीतीश रेड्डी और हेनरिक क्लासेन जैसे बल्लेबाजों की मौजूदगी ने SRH का टॉप ऑर्डर पेपर पर सबसे खतरनाक बना दिया था। ये पांचों खिलाड़ी आईपीएल 2025 में आने से पहले अच्छी फॉर्म में थे और पिछले सीजन में भी उन्होंने दमदार प्रदर्शन किया था।

लेकिन इस बार इन सभी ने एकसाथ फॉर्म गंवाया। पूरे सीजन में कोई भी बल्लेबाज लगातार रन नहीं बना सका। शुरुआती एक-दो मैचों के बाद ना तो स्ट्राइक रेट में धार रही, ना ही बड़े स्कोर आए। आईपीएल जैसे टाइट टूर्नामेंट में अगर टॉप ऑर्डर ढह जाए, तो टीम की जीत की उम्मीदें भी डगमगा जाती हैं- और SRH के साथ ठीक यही हुआ।

2. बॉलिंग लाइनअप दमदार दिखी, लेकिन मैदान पर धार खो गई

मेगा ऑक्शन में SRH ने मोहम्मद शमी, हर्षल पटेल और एडम जम्पा जैसे अनुभवी और विकेट लेने वाले गेंदबाज शामिल किए थे। कागज पर ये बॉलिंग अटैक विपक्षी टीमों को परेशान कर सकता था। लेकिन मैदान की हकीकत अलग निकली।

एडम जम्पा शुरुआत में ही चोटिल हो गए और ज्यादा मैच नहीं खेल सके। वहीं मोहम्मद शमी की वापसी चोट के बाद हुई थी, और वे पूरी लय में नहीं दिखे। हर्षल पटेल भी डेथ ओवर्स में असरदार साबित नहीं हो सके। कुल मिलाकर टीम की गेंदबाजी ना तो शुरुआती विकेट दिला सकी और ना ही अंतिम ओवरों में रन रोक पाई- जिससे SRH के मुकाबले अक्सर एकतरफा हो गए।

3. अटैकिंग बैटिंग अप्रोच का गलत समय पर दांव

SRH ने पिछले साल की तरह इस बार भी अटैकिंग बैटिंग टेम्पलेट अपनाया। कोच डेन वेट्टोरी ने साफ किया कि ट्रेविस हेड और अभिषेक शर्मा को 'लाइसेंस टू किल' मिला हुआ था, लेकिन बाकी खिलाड़ियों को हालात के मुताबिक खेलने की सलाह दी गई थी।

बावजूद इसके, जब पिचें धीमी हुईं और बॉल अच्छे से बल्ले पर नहीं आ रही थी, तब भी SRH के बल्लेबाज़ अपनी हिटिंग शैली से पीछे नहीं हटे। इसका नतीजा ये हुआ कि टीम ने कई बार पॉवरप्ले या मिडिल ओवर्स में ही विकेट गंवा दिए। यह रणनीति जब चलती है तो शानदार लगती है, लेकिन जब विकेट जल्दी गिरते हैं तो यही आक्रामकता जोखिम में बदल जाती है- और SRH उसी में उलझ गई।

4. पिचों को समझने में गलती, घरेलू मैदान भी नहीं बना सहारा

SRH के बल्लेबाज उस समय सबसे खतरनाक लगते हैं जब गेंद बल्ले पर तेज़ी से आती है- यानी जब पिच बैटिंग फ्रेंडली हो। लेकिन 2025 में ज्यादातर मैदानों पर SRH को धीमी पिचों का सामना करना पड़ा। अन्य टीमों ने भी SRH के खिलाफ पिचों को ऐसी बनाया जहां स्ट्रोक प्ले करना मुश्किल हो। हैरानी की बात ये रही कि यहां तक कि हैदराबाद का घरेलू मैदान भी वैसी हाई स्कोरिंग पिच नहीं रही जैसी पिछले साल थी। खुद कोच वेट्टोरी ने माना कि इस बार उनकी घरेलू पिचों ने बल्लेबाज़ों का साथ नहीं दिया। जब बैटिंग यूनिट पिच की मदद के बिना ही चल रही हो, तब ऐसी रणनीति और भी ज़्यादा जोखिमभरी हो जाती है।

5. बैकअप प्लान और स्क्वॉड फ्लेक्सिबिलिटी की कमी

SRH का टीम कॉम्बिनेशन कागज पर स्ट्रॉन्ग था, लेकिन जैसे ही स्टार खिलाड़ी फॉर्म से बाहर हुए या चोटिल हुए, वैसे ही टीम के पास कोई ठोस बैकअप प्लान नहीं दिखा। खासकर जम्पा की इंजरी के बाद स्पिन अटैक बिखर गया। मिडिल ऑर्डर में जब रन नहीं बन रहे थे, तब टीम के पास कोई अनुभवी फ्लोटर या बैलेंसर नहीं था जो पारी को संभाल सके।

टीम की रणनीति बेहद टॉप-हैवी रही- यानि अगर टॉप ऑर्डर चला तो जीत, वरना हार तय। T20 में जहां फ्लेक्सिबिलिटी और फॉर्म के हिसाब से बदलाव ज़रूरी होते हैं, वहां SRH की कॉम्बिनेशन ज्यादा स्थिर और एकतरफा लग रही थी।

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