जहां इमोशन है वहां तुलना नहीं होती! कोहली ने किया खुलासा, कैसा लगता है सचिन के साथ कंपेयर करना
विराट कोहली का कहना है कि सचिन से उनकी तुलना करने वाले लोग गेम के बारे में कुछ नहीं जानते। जब भी ये तुलना हुई तब-तब उनको अजीब लगा है।

क्रिकेट इतिहास की सबसे लंबी बहस सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली (Sachin vs Virat) के बीच की तुलना पर अटक जाती है। दोनों में कौन महान है? सचिन को क्रिकेट का भगवान कहा जाता था तो विराट कोहली को आधुनिक युग का महान बल्लेबाज माना जाता है।
सचिन ने 100 इंटरनेशनल सेंचुरी लगाई है तो विराट कोहली उनके बाद सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज है। कोहली ने भारतीय क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा के साथ एक इंटरव्यू के दौरान जियो सिनेमा पर बताया कि वह अपनी युवा उम्र में उस तरह की क्रिकेटर नहीं थे जैसा फैंस उनको समझते हैं।
कोहली का मानना है कि वे गिफ्टेड किस्म के खिलाड़ी नहीं थे। कोहली मानते हैं कि वह अच्छे थे और उनके इरादे भी मजबूत थे लेकिन उनके पास वैसी नेचुलर प्रतिभा नहीं थी जैसा कि उनके फैंस मानते हैं। कोहली ने कहा, "मैं हर बार यही कहता हूं कि मेरे पास प्रतिभा थी लेकिन मैं उस तरह का बल्लेबाज नहीं था जिसको देखते ही आप लोग 'ओ माय गॉड' कहें, यह तो अविश्वसनीय है!"
Recommended Video

"मैं अच्छा था और मैंने अपनी प्रतिभा पर काम किया लेकिन मुझे पता था कि मैं इतना गिफ्टेड खिलाड़ी नहीं हूं जिसके आसपास चीजें खुद घटित होनी शुरू हो जाती हैं। मैं बहुत कम उम्र से ही काफी मजबूत इरादों का इंसान रहा हूं लेकिन मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि आज 34 साल की उम्र में मैं यहां इस स्थिति में हूंगा।"
कोहली ने आगे स्वीकार किया कि सचिन तेंदुलकर के साथ तुलना उन्हें हमेशा अजीब महसूस कराती है और कई बार वे बस इस पर हंसते हैं। वे कहते हैं कि फैंस के सामने आंकड़े एक अलग ही कहानी बयां करते हैं लेकिन कई बार लोगों को गेम का अंदाजा नहीं होता।
कोहली ने कहा, "मुझे सचिन से तुलना करने में हमेशा अजीब लगा है। मुझे नहीं पता कि लोग इस तरह के आंकड़े कहां से उठा कर लाते हैं। लेकिन आंकड़े आपको अलग कहानी बताते हैं। एक खिलाड़ी को देखकर आप बड़े हुए, उसके खेल का कैसा इंपैक्ट पड़ा। इसलिए मैं कई बार बस हंस देता हूं क्योंकि इन लोगों को खेल के बारे में कोई आईडिया नहीं है।"
"सचिन तेंदुलकर मेरे लिए हमेशा एक इमोशन रहे हैं। सचिन कई लोगों के लिए प्रेरणा रहे हैं। लोगों को उन पर यकीन था। सचिन लोगों के कंफर्ट और प्रेरणा के सोर्स थे। जब वे स्कोर करते थे तो जिंदगी अच्छी लगती थी।"
कोहली आगे कहते हैं कि सचिन और विव रिचर्ड्स के सामने किसी की तुलना नहीं होनी चाहिए क्योंकि इन दोनों ने अपने युग में खेल में क्रांतिकारी बदलाव लाए और लोगों को जैसा भरोसा इन खिलाड़ियों में था वह दुर्लभ है। किसी खिलाड़ी में इतना विश्वास होना बहुत ही दुर्लभ है।












Click it and Unblock the Notifications