विराट कोहली का खुलासा, 35 हजार लोगों ने मेरे खिलाफ माहौल बनाया, पहली ही गेंद पर थे जेम्स एंडरसन
Virat Kohli vs James Anderson: कोहली बताते हैं, मैं वहां आया और 35000 लोग स्टेडियम में मेरे खिलाफ शोर कर रहे थे। सामने जेम्स एंडरसन की गेंद का सामना करना था।

विराट कोहली का मानना है कि 2014 का इंग्लैंड दौरा (IND vs ENG 2018) उनके लिए भयावह साबित हुआ था जिसकी तकलीफ ने उन्हें तब छुटकारा मिला जब उन्होंने 2018 में एजबेस्टन में हुए पहले मुकाबले में 149 रन किए। आरसीबी पॉडकास्ट सीजन 2 में विराट कोहली ने याद किया कि 2018 में एजबेस्टन की भीड़ ने किस तरह से क्रीज पर उनका स्वागत किया था। कोहली बताते हैं, मेरा दिल धड़क रहा था क्योंकि मेरे जेहन में 2014 की असफलता थी। मैं वहां आया और 35000 लोग स्टेडियम में मौजूद थे और जैसे ही मैदान पर बल्लेबाजी करने के लिए उतरने लगा तो शोर शुरू हो गया। मेरा दिल और तेज धड़कना शुरू हो गया। वहां लोग इस तरह का माहौल बन जाता है कि आपको लगता है अब आप यहां कुछ कर ही नहीं सकते।"

जेम्स एंडरसन ने कोहली को बहुत तंग किया
2014 के दौरे पर जेम्स एंडरसन ने कोहली को बहुत तंग किया था और वे 10 पारियों में 134 रन ही बना पाए थे। लेकिन 2018 में उन्होंने 593 रन में ठोके। कोहली बताते हैं, जब 4 साल बाद उनको जेम्स एंडरसन का सामना करना पड़ा तो वे काफी परेशान थे लेकिन पहली गेंद खेलने के बाद उनको थोड़ी शांति मिली। फिर 22 रन पर उनका कैच ड्रॉप हुआ लेकिन उन्होंने किस्मत के साथ से 149 रन बनाए और उस श्रंखला में फिर पलट कर नहीं देखा। कोहली ने यह भी खुलासा किया कि वह 2018 के दौरे के लिए बड़ी बेताबी से इंतजार कर रहे थे और उन्होंने अपनी तैयारियों के लिए इंग्लिश काउंटी सरे के साथ कांट्रेक्ट भी किया था लेकिन उनको आईपीएल के दौरान गर्दन में चोट लगी थी जिसके चलते वे वहां खेल नहीं पाए थे।

2014 के दौरे पर क्या गलती हो गई
इंग्लैंड जाने से पहले उनके आरसीबी साथी एबी डिविलियर्स ने भी विराट से बात की जिसने कोहली को चैन दिया। डिविलियर्स ने बताया कि यह 2014 नहीं है और आप वह खिलाड़ी नहीं है। आप इंग्लैंड में बिल्कुल सही रहेंगे। उसके बाद कोहली को सुकून महसूस हुआ। कोहली ने यह भी बताया कि 2014 के दौरे पर क्या गलती हो गई थी। वे कहते हैं कि उस दौरे पर जाने से पहले मैंने न्यूजीलैंड के खिलाफ एक अच्छी सीरीज खेली थी जहां 1 शतक के साथ 70 रन भी किए थे तो मेरा कॉन्फिडेंस ऊंचा था। लेकिन इंग्लैंड में पहुंचने के बाद उनके अंदर यह साबित करने का भूत सवार था कि वहां की परिस्थितियों में खेल सकते हैं।

लोगों ने मुझे इंग्लैंड दौरे की याद दिलाना बंद नहीं किया
यही उनकी गलती थी क्योंकि इस वजह से पूरी सीरीज में उनके ऊपर दबाव बन रहा। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के लिए वह श्रंखला खेली और जब एक बार उस सीरीज में फंस गए तो फिर निकल नहीं पाए। कोहली के अनुसार वह बहुत बुरा दौर था। विराट कहते हैं, 2014 से 2018 तक मैंने विश्व में हर जगह रन बनाए लेकिन लोगों ने मुझे इंग्लैंड दौरे की याद दिलाना बंद नहीं किया। लेकिन जब कोहली 2018 के दौरे पर दो शतक के साथ टॉप स्कोरर भी साबित हुए तो चीजें बदल गई।

टेस्ट करियर शुरुआत में उतार-चढ़ाव भरा रहा
कोहली मानते हैं कि उनका टेस्ट करियर शुरुआत में उतार-चढ़ाव भरा रहा और लेकिन आस्ट्रेलिया में उन्होंने अच्छा किया और फिर अपना पहला टेस्ट शतक एडिलेड में लगाया जिसके बाद उनको टेस्ट लेवल पर बल्लेबाजी करने का आत्मविश्वास मिला। वे आज 106 टेस्ट मैच खेल चुके हैं और वनडे और टी-20 के सिद्धहस्त बल्लेबाज हैं। उनका करियर 15 साल का हो चुका है लेकिन एक बार फिर लोग कोहली के टेस्ट करियर पर उंगली उठा रहे हैं क्योंकि उनका औसत 50 से नीचे आ चुका है और वे 3 साल से भी ज्यादा समय से टेस्ट क्रिकेट में शतक नहीं लगा पाए। मौजूदा बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में जब रोहित शर्मा एक बेहतरीन शतकीय पारी खेलते हैं तो कोहली कुछ अच्छे 30-40 ही कर पाते हैं। अभी श्रंखला में दो मुकाबले होने बाकी है जहां 1 मार्च को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में तीसरे टेस्ट मैच खेला जाना है और फिर से विराट कोहली पर होंगी जहां उनके पास शतकों का सूखा खत्म करके अंतरराष्ट्रीय करियर में पूरी तरह वापसी करने का मौका होगा।
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