खाने की ऐसी दीवानगी, अफ्रीका में अपनी जान खतरे में डाल चुके थे कोहली, साथी खिलाड़ी का खुलासा
नई दिल्ली, 8 मार्च: भारतीय खेलों में विराट कोहली फिटनेस की जीवंत मिसाल हैं जिन्होंने खुद को एक थुलथुल लड़के से फुर्तीले एथलीट में ढालने की अविश्वसनीय यात्रा पूरी की है। विराट को बचपन से ही खान-पान का काफी शौंक था। उनकी परवरिश दिल्ली में हुई जो स्ट्रीट फूड के लिए मशहूर है। कोहली पंजाबी परिवार से थे जहां पर खाने को लेकर अलग ही क्रेज मिलता है। कोहली भी अपने शुरुआती खेल दिनों में खाने को लेकर इतने ही उतावले थे।

कोहली पूरी तरह से फूडी इंसान थे
तब कोहली को तत्कालीन कोच डंकन प्लेचर ने कोहली की डाइट को बदल दिया था जो भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत अच्छा साबित हुआ। कोहली ने डंकन की सलाह को बहुत गंभीरता से लिया।
लेकिन ऐसा होने से पहले कोहली पूरी तरह से फूडी इंसान थे। वे स्ट्रीट फूड को खासतौर पर पसंद करते थे। कोहली के पुराने टीम साथी प्रदीप सांगवान ने एक ऐसी घटना का खुलासा किया है जो खाने-पीने के प्रति विराट की दीवानगी को दर्शाती है। दीवानगी भी इस हद तक कि कोहली ने अपनी जिंदगी को जोखिम में डालकर भी अपने पसंदीदा फूड को खाने का मौका नहीं छोड़ा।

भारत की अंडर-19 टीम का अफ्रीका दौरा
बात दक्षिण अफ्रीका की है जिसके बारे में सांगवान ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखे कॉलम में जिक्र करते हुए कहा कि, कोहली जूनियर क्रिकेट में 7-8 सालों से मेरे रूम पार्टनर हुआ करते थे। उनका खाना बहुत पसंद था, खासकर स्ट्रीट फूड को पसंद करते थे। वह कोरमा रोल, चिकन रोल को फेवरेट मानते थे। हम भारत की अंडर 19 टीम के तौर पर दक्षिण अफ्रीका में थे, और किसी ने विराट को बता दिया कि किसी जगह पर बढ़िया मटन रोल मिलता है, लेकिन यह जगह सुरक्षित नहीं है। वहां लोकल लोग गुंडागर्दी करते हैं। उनकी प्रवृत्ति झगड़ा करने की है।

कोहली जानते थे उस जगह पर जाने में रिस्क है लेकिन..
लेकिन कोहली नहीं माने जबकि सागवान की हालत खराब थी और वे उस जगह पर नहीं जाना चाहते थे। सागवान और कोहली 2008 में अंडर 19 टीम का हिस्सा थे जिसने आईसीसी का विश्व खिताब अपने नाम किया था। कोहली जानते थे उस जगह पर जाने में रिस्क है लेकिन उन्होंने फिर भी रोल खाने के लिए वहां जाने का फैसला लिया।

कुछ लोगों ने पीछा किया, हमने कार बैक कर दी-
सागवान आगे कहते हैं कि, यहां तक हमारे ड्राइवर ने भी हमको बताया था कि खाना तो अच्छा है लेकिन हाल में ही उस जगह पर लड़ाई हुई, जहां एक बंदे ने दूसरे का हाथ काटकर फेंक दिया। मैं डर गया लेकिन कोहली ने कहा, चल यार, वहां चलेंगे। और वह मुझे भी वहां ले गया। हमने वहां खाया और कुछ लोगों ने हमारा पीछा करना शुरू कर दिया लेकिन हम तेजी से अपनी कार को बैक करते हुए निकल गए और तभी रुके जब हमारी जगह आ गई।

हम उसे टीम में 'चीकू-मोटू' कहकर बुलाते थे
2012 में कोहली के अपनी डाइट को बदलने के फैसले पर बोलते हुए, सांगवान ने लिखा, "भारत के लिए खेलने के बाद, वह 2012 में हमारे लिए खेलने आया था और यही वह समय था जब उसने डाइट को अगले स्तर पर ले लिया था। हम उसे टीम में 'चीकू-मोटू' कहकर बुलाते थे। लेकिन 2012 में उन्होंने अपनी फिटनेस की देखभाल करना शुरू किया। उन्होंने सख्त आहार का पालन करना शुरू किया। वह अपना वजन कम करने के लिए दृढ़ थे और कुछ किलो वजन कम करना चाहते थे। वह एक अच्छा फील्डर बनना चाहता था, वह तब भी एक सही फील्डर था, लेकिन वह सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षक बनना चाहता था। उसे नेट्स में घंटों बल्लेबाजी करना पसंद था।












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