विराट कोहली ने तोड़ी चुप्पी, बताई वो वजह जिसके चलते छोड़नी पड़ी टेस्ट कप्तानी

virat kohli

नई दिल्ली। विराट कोहली इस समय किसी भी फाॅर्मेट के कप्तान नहीं रहे हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ 2-1 से टेस्ट सीरीज गंवाने के एक दिन बाद ही कोहली ने टेस्ट कप्तानी छोड़ने का फैसला सुनाया। इससे पहले वह सीमित ओवरों के क्रिकेट की कप्तानी छोड़ चुके थे। माना जा रहा था कि कोहली का बीसीसीआई के साथ विवाद था, जिसके चलते स्टार बल्लेबाज को कप्तानी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा, लेकिन अब कोहली ने खुद इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए बताया कि आखिर क्यों उन्हें कप्तानी छोड़नी पड़ी।

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इसलिए छोड़ी कप्तानी

इसलिए छोड़ी कप्तानी

कोहली ने कहा कि कप्तानी का एक निश्चित 'कार्यकाल और समय अवधि' भी होती है। कोहली ने 2014 की शुरुआत में एमएस धोनी से भारत के टेस्ट कप्तान के रूप में पदभार संभाला और खेल के सबसे लंबे प्रारूप में सबसे सफल कप्तानों में से एक के रूप में करियर खत्म किया। कोहली भारत को 68 टेस्ट में 40 जीत दिलाई। विशेष रूप से, कोहली ने पिछले साल अक्टूबर में T20 विश्व कप के बाद T20I कप्तानी छोड़ दी थी, लेकिन उस समय कहा था कि वह ODI और टेस्ट कप्तान के रूप में आगे बढ़ना चाहते हैं। हालांकि, उन्हें टी20 विश्व कप में भारत के जल्दी बाहर होने के बाद खेल के 50 ओवर के प्रारूप में कप्तान के रूप में भी बर्खास्त कर दिया गया था।

जीतना या न जीतना आपके हाथ में नहीं

जीतना या न जीतना आपके हाथ में नहीं

कोहली ने फायरसाइड चैट के एक एपिसोड में बोलते हुए कहा, "देखिए, मुझे लगता है कि सबसे पहले आपको इस बात की पूरी समझ होनी चाहिए कि आपने क्या हासिल करने के लिए निर्धारित किया है और आपने उन लक्ष्यों को हासिल किया है या नहीं। हर चीज का एक कार्यकाल और समय अवधि होती है, इसलिए आपको इसके बारे में पता होना चाहिए। एक बल्लेबाज के रूप में आप टीम को ज्यादा फायदा देने सक्षम हो सकते हैं, इसलिए उस पर गर्व करें। कप्तान बनने के लिए आपको कप्तान होने की आवश्यकता नहीं है। जब एमएस धोनी टीम में थे, ऐसा नहीं था कि वह कप्तान नहीं थे, वह अभी भी वह व्यक्ति हैं जिनसे हम कोई सलाह लेने चाहते हैं। जीतना या न जीतना आपके हाथ में नहीं है। जब संस्कृति की बात आती है, तो यह आपके खेलने के वर्षों और आपकी जिम्मेदारी से परे रहेगी।''

उन्होंने आगे कहा, "सही समय को समझना, फिर उससे आगे बढ़ना भी एक कप्तानी का हिस्सा है। हर कोई टीम में अपनी भूमिका देना जारी रखना चाहता है, वो अलग तरीके से भी हो सकती है। मुझे लगता है कि जो भी आपको माैके मिलते हैं, उन्हें गले लगाना होगा। मैंने कुछ समय के लिए एमएस धोनी की कप्तानी में खेला है और फिर मैं कप्तान बन गया, मेरी मानसिकता इस समय भी वही रही है। मैंने हमेशा एक कप्तान की तरह सोचा था, चाहे जब मैं एक खिलाड़ी के रूप में टीम में था। मैं टीम को जीत दिलाना चाहता हूं। मैं अपना खुद का कप्तान बनना चाहता हूं।"

जब मैं कप्तान बना तो मेरा ध्यान सांस्कृतिक बदलाव पर था

जब मैं कप्तान बना तो मेरा ध्यान सांस्कृतिक बदलाव पर था

इस बीच, कोहली ने कहा कि जब उन्होंने कप्तान के रूप में पदभार संभाला तो वह एक अच्छी टीम संस्कृति बनाने के बारे में सोच रहे थे। यह कहते हुए कि यह रणनीति से अधिक महत्वपूर्ण है। कोहली के नेतृत्व में, भारत ने एक भी घरेलू टेस्ट सीरीज नहीं हारी और ऑस्ट्रेलिया में अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीती। पिछले साल, भारत ने 5 मैचों की सीरीड में इंग्लैंड को 2-1 से पीछे किया, जो कोविड -19 के कारण 5वें टेस्ट से पहले स्थगित कर दी गई थी। कोहली ने कहा, "जब मैं कप्तान बना, तो मेरा ध्यान सांस्कृतिक परिवर्तन पर था। मुझे पता था कि हमारे पास कौशल की कमी नहीं है, मैं प्रतिभा को उसकी क्षमता तक बढ़ाने के बारे में सोच रहा था।''

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