U19 World Cup : जानिए कब-कब भारत बना चैंपियन, काैन रहा था फाइनल में 'हीरो'

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पास एक बार फिर अंडर-19 विश्व कप का खिताब अपने नाम करने का सुनहरा माैका है। यश ढुल की कप्तानी में युवा टीम ने सेमीफानल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को हराते हुए फाइनल में प्रवेश किया है। अब उनका खिताबी मुकाबला इंग्लैंड के खिलाफ 5 फरवरी को होगा। दोनों टीमें बिना कोई मैच हारे फाइनल तक पहुंची हैं, लेकिन फिर भी इतिहास पर नजर डालें तो पलड़ा भारत का ही भारी नजर आ रहा है। भारत 8वीं बार फाइनल खेलेगा तो इंग्लैंड दूसरी बार। यह 14वां सीजन है। वहीं भारत सबसे ज्यादा 4 बार खिताब जीत चुका है। अब उसके पास 5वीं बार चैंपियन बनने का माैका है। लेकिन फाइनल मुकाबले से पहले आइए जानें कि कब-कब भारत अंडर-19 विश्व कप का चैंपियन बना और काैन खिलाड़ी फाइनल मैच में हीरो साबित हुआ था-
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साल 2000- पहली बार बना चैंपियन
भारत ने पहला खिताब साल 2000 में अपने नाम किया था। श्रीलंका में हुए उस विश्व कप के फाइनल मैच में भारतीय टीम ने श्रीलंका को ही 6 विकेट से हराया था। मोहम्मद कैफ टीम के कप्तान थे। श्रीलंका ने टाॅस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सभी विकेट 48.1 ओवर में गंवाकर भारत के सामने 179 रनों का लक्ष्य रखा। जवाब में भारतीय टीम ने रितिदर सोढी (39) व नीरज पटेल (34) की नाबाद पारियों की मदद से 40.4 ओवर में ही 6 विकेट रहते मैच जीतकर पहली बार ट्राॅफी अने नाम कर ली।
काैन था 'हीरो'
इस मैच के हीरो साबित हुए रितिंदर सोढी जिन्होंने ना सिर्फ बल्लेबाजी से बल्कि गेंदबाजी से भी श्रीलंका को तंग करके रख दिया था। सोढी भले ही विकेट नहीं ले सके थे, लेकिन उन्होंने 10 ओवर में कंजूसी से 26 रन ही दिए थे। साथ ही श्रीलंकाई बल्लेबाजों को खुलने का माैका नहीं दिया। वहीं मैन ऑफ द टूर्नामेंट युवराज सिंह रहे थे। उस समय कोच रोजर बिन्नी थे।

साल 2008- दूसरी बार बना चैंपियन
फिर दूसरी बार भारतीय टीम उस समय चैंपियन बनी जब 2008 में मलेशिया में टूर्नामेंट आयोजित किया गया था। टीम के कप्तान विराट कोहली थे। कोच थे डेव व्हाटमोर। भारत ने तब फाइनल में डकवर्थ लुईस नियम के तहत साउथ अफ्रीका को 12 रन से हराया था। फाइनल पूचोंग में खेला गया था। साउथ अफ्रीका ने टाॅस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी करने का न्याैता दिया था। भारती टीम 45.4 ओवर में 159 रनों पर ढेर हो गई। लेकिन जवाब में साउथ अफ्रीका की शुरूआत भी खराब रही। उनके 8 विकेट 25 ओवर में 103 के स्कोर पर गिर गए थे। फिर बारिश ने बाधा डाली, जिसके बाद डकवर्थ लुईस नियम के तहत भारत को 12 रन से विजेता घोषित कर दिया गया था।
काैन था 'हीरो'
इस मैच में हीरो साबित हुए थे अजीतेश अरगल, जिन्होंने 5 ओवर में महज 7 रन देकर 2 विकेट चटकाए। उनके अलावा रविंद्र जडेजा, सिद्धार्थ काैल ने 2-2 विकेट लिए थे।

साल 2012- तीसरा बार बना चैंपियन
ऑस्ट्रेलिया में हुए उस विश्व कप के फाइनल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को ही 6 विकेट से हराकर खिताब जीतने की हैट्रिक लगाई थी। उनमुक्त चंद की कप्तानी में भारत ने टाॅस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया था। ऑस्ट्रेलिया ने कप्तान विलियम बोसिस्टो की नाबाद 87 रनों की पारी की मदद से 8 विकेट खोकर भारत के सामने 226 रनों का लक्ष्य रखा था। जवाब में कप्तान उनमुक्त चंद ने नाबाद 111 रनों की पारी खेल टीम को 47.4 ओवर में जीत दिला दी। उनके अलावा समित पटेल ने नाबाद 63 रन बनाए थे। टीम के कोच भारत अरुण थे।
काैन था 'हीरो'
इस मैच के हीरो उनमुक्त साबित हुए, जिन्होंने 130 गेदों का सामना करते हुए नाबाद शतकीय पारी खेली। उनकी पारी में 7 चाैके तो 6 छक्के शामिल रहे थे। एक समय भारत के 97 के स्कोर पर 4 विकेट गिर चुके थे, लेकिन उनमुक्त ने कप्तानी पारी खेल टीम को चैंपियन बना दिया।

साल 2018- चाैथी बार बना चैंपियन
फिर साल 2018 में न्यूजीलैंड में विश्व कप हुआ। फाइनल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को दूसरी बार मात देकर खिताब जीता था। तब टीम के कप्तान पृथ्वी शाॅ थे, जबकि कोच राहुल द्रविड़ थे। ऑस्ट्रेलिया ने टाॅस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया, लेकिन युवा भारतीय गेंदबाजों ने उन्हें 216 रनों पर ढेर कर दिया। जवाब में भारत ने मनोज कारला की नाबाद 101 रनों की पारी की मदद से 38.5 ओवर में ही 8 विकेट रहते लक्ष्य हासिल कर लिया था। हारविक देसाई ने नाबाद 47 रन बनाए थे। पृथ्वी शाॅ ने 29 तो शुबमन गिल ने 31 रन बनाए थे।
काैन था 'हीरो'
मैन ऑफ द मैच का अवार्ड मनोज को दिया गया था, जिन्होंने 102 गेंदों में 8 चाैके व 3 छक्के लगाकर शतकीय पारी खेली थी। वहीं शुबमन गिल को मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था।












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