क्या हार्दिक घमंडी कप्तान हैं ? संजू का स्टाइक रेट और औसत पंत से बेहतर फिर वे प्लेईंग इलेवन में क्यों नहीं ?
क्या हार्दिक पांड्या अभिमानी कप्तान हैं ? उनकी भाषा और भावभंगिमा खटकने वाली है। संजू सैमसन को टीम नहीं चुने जाने पर उन्होंने कहा, “रणनीति के हिसाब से टीम में उनके लिए जगह नहीं बन पा रही है। अगर बड़ी सीरीज होती तो वे टीम में होते। अभी बहुत समय बाकी है। सबको पर्याप्त मौके मिलेंगे। मैं छोटी सीरीज के दौरान ज्यादा बदलाव में विश्वास नहीं रखता।” अगर कोई खिलाड़ी रन नहीं बना पा रहा है तो क्या हार्दिक पांड्या उसे भी मौका देते रहेंगे ? क्या यह पक्षपात नहीं ? ऋषभ पंत ने न्यूजीलैंड टी-20 सीरीज में कितने रन बनाये ? दूसरे मैच में उन्होंने 13 गेंदें खेल कर 6 रन बनाये। तीसरे मैच में 11 रन बनाये। क्या एक टी-20 बल्लेबाज का यही इंटेंट होना चाहिए ? क्या टीम की यही रणनीति है कि जो परफॉर्म नहीं करे उसे भी टीम में रखो ? अगर तीसरे टी-20 में पंत की जगह संजू सैमसन को टीम में लिया जाता तो क्या आसमान फट जाता ? याद रहे 2022 के टी-20 इंटरनेशनल में संजू का स्ट्राइक रेट और औसत पंत से बेहतर है। फिर भी वे बेंच पर बैठे हैं।
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टी-20 में पंत का निराशाजनक प्रदर्शन
ऋषभ पंत मैच विजेता खिलाड़ी हैं। इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन उन्होंने केवल टेस्ट मैचों में ही यादगार पारियां खेलीं हैं। टी-20 मुकाबलों में वे इस प्रदर्शन को दोहरा नहीं पाये हैं। जब कोई महान खिलाड़ी भी अहम मौकों पर रन नहीं बना पाता तो उसको बदलने की चर्चा होने लगती है। टी-20 में जब विराट कोहली के रन नहीं बन रहे थे तब उन्हें कप्तानी छोड़नी पड़ी थी। आज रोहित शर्मा को टी-20 की कप्तानी से हटाने की चर्चा हो रही है। अगर ऋषभ पंत टी-20 में रन नहीं बना पा रहे हैं तो क्या उनको बदले जाने की बात नहीं होनी चाहिए ? ऋषभ पंत टेस्ट में रहें और संजू सैमसन टी-20 टीम में, क्या ऐसा नहीं हो सकता ?
संजू की अनदेखी
लेकिन टीम प्रबंधन पंत पर कुछ ज्यादा मेहरबान है। नाकामी के बाद भी पंत को मौके मिल रहे हैं और दूसरी तरफ संजू की लगातार अनदेखी की जा रही है। इस साल जून में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज में जब पंत को भारत का कप्तान बनाया गया तब भी उन्होंने निराश किया था। उन्होंने 14.5 की औसत से केवल 58 रन बनाये थे। पंत की यह बल्लेबाजी देख कर पिछले कुछ समय से बार-बार ये सवाल उठ रहा है कि संजू सैमसन को अंतिम एकादश में क्यों नहीं शामिल किया जाता? अगर किसी खिलाड़ी को उसके गोल्डेन फेज में मौका नहीं मिलता तो उसका आत्मविश्वास टूट जाता है।
आइपीएल में पंत और संजू
अगर ऋषभ पंत मैच विजेता खिलाड़ी हैं तो संजू सैमसन भी कम नहीं हैं। 2022 के आइपीएल में संजू ने कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में अपनी गहरी छाप छोड़ी। राजस्थान रॉयल्स को फाइनल तक ले गये जहां उनका मुकाबला हार्दिक पांड्या की टीम गुजरात टाइटंस से हुआ। अगर आइपीएल के आधार पर संजू और पंत की तुलना करें तो संजू उनसे आगे दिखते हैं। संजू ने इस साल आइपीएल में 17 मैच खेल कर 458 रन बनाये। उन्होंने 146.80 की स्ट्राइक रेट से ये रन बनाये। जब कि पंत ने 13 मैचों में 340 रन बनाये। पंत का स्ट्राइक रेट जरूर 151.80 था लेकिन उनकी टीम दिल्ली कैपिटल्स प्ले ऑफ में नहीं पहुंच पायी थी। दोनों के स्ट्राइक रेट में मामूली अंतर ही है। 2021 के आइपीएल में भी संजू ने 484 रन बनाये थे जब कि पंत ने 419 रन ही बनाये थे। पिछले साल संजू का स्ट्राइक रेट पंत से बेहतर था। अगर आइपीएल में प्रदर्शन के आधार पर अन्य खिलाड़ियों को मौका मिल सकता है तो संजू सैमसन को क्यों नहीं ?
2022 में संजू का स्ट्राइक रेट और औसत पंत से बेहतर
2022 में अभी तक संजू सैमसन ने 6 टी-20 इंटरनेशनल खेले हैं। एक अर्धशतक समेत उन्होंने कुल 179 रन बनाये। उन्होंने 44.75 की औसत और 158.40 के स्ट्राइक रेट से ये रन बनाये हैं। जब कि ऋषभ पंत ने इस साल 25 टी-20 मैच खेल कर 364 रन बनाये हैं। उनके रन बनाने का औसत केवल 21.41 है जो कि बहुत ही निराशाजनक है। संजू का औसत पंत के मुकाबले दोगुना से भी अधिक है। संजू का स्ट्राइक रेट 158.40 तो पंत का केवल 138.84 है। संजू को पंत से कम मौके मिले लेकिन जो मिले उसका उन्होंने बेहतर पायदा उठाया। इस साल टी-20 में संजू का औसत ईशान किशन से भी बेहत है। अगर ईशान किशन प्लेईंग इलेवन में हैं तो संजू क्यों नहीं ? अब कोई हार्दिक पूछे कि किस हिसाब से संजू टीम की रणनीति में फिट नहीं बैठ रहे ? वे रन बना रहे हैं। विस्फोटक बल्लेबाज हैं। उनकी कीपिंग भी अच्छी है। फिर दिक्कत क्या है ? हां, दिक्कत तब हो जाती है जब कप्तान, कोच और टीम प्रबंधन हकीकत से आंख मूंद लेते हैं।












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