Rohit Sharma: 'कभी बेचा दूध तो कभी खाए लोकल में धक्के', क्या आप जानते हैं हिटमैन के ये दर्द भरे किस्से
Rohit Sharma:भारतीय टीम के कप्तान और डैशिंग क्रिकेटर रोहित शर्मा वनडे में तीन दोहरे शतक बनाने वाले दुनिया के एकमात्र बल्लेबाज हैं।

Rohit Sharma: टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा क्रिकेट की दुनिया का वो चमकदार सितारा है, जिसे दुनिया सलाम करती है। दौलत-शौहरत और रनों के रिकॉर्ड पर बैठे रोहित शर्मा ने अपने दम पर कई बार भारत को जीत दिलाकर देश को विश्वपटल पर गौरवान्वित किया है। क्रिकेट की दुनिया में 'मिस्टर हिटमैन' के नाम से संबोधित किए जाने वाले रोहित शर्मा ने यहां तक का सफर काफी संघर्ष से तय किया है। आज वो आईपीएल के सबसे अमीर खिलाड़ियों में से एक हैं, उनकी गिनती दुनिया के सबसे रईस क्रिकटरों में होती है लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब रोहित शर्मा को अपना 'क्रिकेट किट' खरीदने के लिए दूध के पैकेट बेचने पड़े थे।

'क्रिकेट किट' खरीदने के लिए पैसे नहीं थे
उनके क्रिकेटर साथी प्रज्ञान ओझा ने हाल ही में एक लाइव चैट के दौरान रोहित शर्मा के बारे में कुछ ऐसा बताया जिसे सुनने के बाद किसी के भी आंखों में आंसू आ जाएंगे। प्रज्ञान ने कहा कि 'अक्सर हम Successful man की बातें करते हैं, उसकी सफलताओं का जिक्र करते हैं लेकिन कभी उस सक्सेस के पीछे की स्टोरी के बारे में बातें नहीं की जाती है। आज रोहित शर्मा भले ही रईस हों लेकिन एक वक्त ऐसा था, जब उसके पास 'क्रिकेट किट' खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। मैं और वो दोनों ही मीडिल क्लास से आते हैं, ऐसे में हमने क्रिकेटर बनने का सपना देखा था, जो कि एक महंगा ख्वाब था।'

परिवार की आमदनी बहुत ज्यादा नहीं थी
उन्होंने कहा कि 'आईपीएल में अपनी कप्तानी में मुंबई इंडियंस को पांच बार खिताब दिलाने वाले रोहित शर्मा ने अपनी शुरुआती दौर में क्या-क्या देखा है, इस बात का अंदाजा किसी को नहीं है, वो किसी से कोई हमदर्दी नहीं चाहता है इसलिए वो कभी इन बातों को शेयर नहीं करता है।' ओझा ने कहा कि 'रोहित के पापा गुरुनाथ शर्मा एक निजी कंपनी में केयरटेकर थे, परिवार की आमदनी बहुत ज्यादा नहीं थी, ऐसे में रोहित के क्रिकेट खर्चे को वो वहन नहीं कर सकते थे। 30 अप्रैल 1987 में मुंबई के नागपुर के बनसोड में रहने वाले रोहित इसलिए अपने दादा के पास बोरीवली में शिफ्ट हो गए थे।'
दूध के पैकट्स को घरों में डिलीवर किया करते थे
उनके दादा और चाचा को उनकी क्रिकेट के प्रति दीवानगी समझ में आ गई थी और इसलिए उनके चाचा ने उनकी आर्थिक सहायता की और उन्हें अपने पैसों से क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलवाया था। अब भी उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई थी क्योंकि अकादमी में उन्हें 'क्रिकेट किट 'चाहिए था, जिसके लिए पैसे जुटाने के लिए रोहित शर्मा सुबह दूध के पैकट्स को घरों में डिलीवर किया करते थे। दूध पैकेट बांटने के बाद रोहित लोकल ट्रेन से अकादमी जाया करते थे। भारी भीड़ में एक छोटा बच्चा 'क्रिकेट किट' को सीने से लगाए अकादमी पहुंचता था, टैक्सी के लिए पैसे नहीं थे इसलिए लोकल के दर्द को सहना ही एकमात्र विकल्प था।

'स्वामी विवेकानंद इंटरनेशल स्कूल'
भूख लगने पर 'बड़ा पाव 'खाकर काम चलाने वाले रोहित शर्मा के अंदर एक अलग सा जूनून था और इसलिए तमाम तकलीफों के बाद भी रोहित शर्मा ने अपना पूरा फोकस क्रिकेट पर ही रखा इसका फल उन्हें मिला क्योंकि उन्हें कोच के रूप में मिले दिनेश लाड, जिन्हें रोहित में एक स्पार्क नजर आया और उन्होंने रोहित के अंकल से बात करके उनका एडमिशन 'स्वामी विवेकानंद इंटरनेशल स्कूल' में करवा दिया, जहां रोहित को 4 साल तक स्कॉलरशिप मिल गई और बस यहीं से रोहित की जिंदगी ने नया मोड़ लिया और फिर रोहित का करियर बतौर क्रिकेटर यहां से शुरु हुआ।
'उसे देखता हूं तो बहुत गर्व महूसस करता हूं'
प्रज्ञान ने कहा कि 'मेरी और उसकी मुलाकात अंडर-15 के नेशनल कैंप में हुई थी, वहां उसके बारे में कहा जाता था कि मुंबई से एक लड़का आया है, जिसका नाम है रोहित, बहुत शानदार खेलता है और स्पेशल है। तो मैं उससे मिलने को क्रेजी हो गया था। फिर हमारी मुलाकात हुई और हम दोस्त बन गए, मैं और वो दोनों ही मध्यमवर्ग से हैं इसलिए एक-दूसरे को समझने लगे थे। एक दिन मैंने उससे पूछा कि 'क्रिकेट किट' कैसे खरीदीं? तो उसने गीली आंखों से कहा था कि 'दूध के पैकेट्स बेचकर।' उसकी वो बात उस वक्त दिल पर असर कर गई थी, ये बात बहुत पुरानी है, आज जब मैं उसे देखता हूं तो बहुत गर्व महूसस करता हूं। सच में कि हमारी यात्रा कैसे शुरू हुई और हम कहां पहुंचे।'

हिटमैन कहलाते हैं रोहित शर्मा
आपको बता दें कि 2007 में आयरलैंड के खिलाफ अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेलने वाले रोहित शर्मा ने अब तक 49टेस्ट, 243 वनडे और 148 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने क्रमश: 3,379, 9,825 और 3,853 रन बनाये हैं।
'अर्जुन अवॉर्ड' से सम्मानित
तो वहीं आईपीएल में उनका करियर साल 2008 में Deccan Chargers के साथ शुरू हुआ था लेकिन साल 2011 से वो मुंबई इंडियंस से जुड़ गए है। उन्हें 'अर्जुन अवॉर्ड'और 'मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार' से नवाजा जा चुका है।
Recommended Video













Click it and Unblock the Notifications