'प्रतिभा की तारीफ होती है, अहंकार की नहीं', Vaibhav Sooryavanshi की लड़ाई पर पाकिस्तान से आया रिएक्शन

Vaibhav Sooryavanshi Fight: डाम्बुला में भारत ए और श्रीलंका ए के बीच रविवार को खेले गए रोमांचक मुकाबले के बाद मैदान पर हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सुपर ओवर में मिली हार के बाद भारत के 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) और श्रीलंकाई खिलाड़ियों के बीच हुई तीखी झड़प का मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

सलमान बट ने की वैभव की आलोचना (Vaibhav Sooryavanshi Fight)

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सलमान बट ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए युवा भारतीय खिलाड़ी के मैदान पर बर्ताव की तीखी आलोचना की है। खेल के मैदान पर आक्रामकता और जुनून जायज है, लेकिन वह जब खेल भावना और अनुशासन की सीमाओं को लांघने लगे, तो उसकी समीक्षा जरूरी हो जाती है। विशेषकर तब, जब खिलाड़ी अपने करियर के शुरुआती पड़ाव पर हो।

Vaibhav Sooryavanshi 1

'प्रतिभा की तारीफ होती है, अहंकार की नहीं'

सलमान बट ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर जारी एक वीडियो में वैभव सूर्यवंशी के टैलेंट की सराहना तो की। लेकिन मैदान पर उनके बार-बार होते विवादों को लेकर चिंता जताई। बट ने कहा कि हर कोई उनकी प्रतिभा की तारीफ करता है, उनके रवैये की नहीं। उन्होंने ऐसा पहले भी किया है। जब वे पाकिस्तानी गेंदबाज अली रजा की गेंद पर आउट हुए थे, तब उन्होंने गेंदबाज की तरफ उंगली उठाई थी और अपने जूते की तरफ इशारा किया था। यह साफ तौर पर अहंकार है। उन्हें खुद में सुधार करना चाहिए। उनकी प्रतिभा निश्चित रूप से मीलों आगे है, लेकिन उनका रवैया खेल से 100 मील पीछे चल रहा है।

डाम्बुला में क्या हुआ था?

सुपर ओवर में भारत ए की शिकस्त के बाद मैदान पर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था। 15 साल के वैभव सूर्यवंशी अपने गुस्से पर काबू नहीं रख सके और श्रीलंकाई खिलाड़ियों से भिड़ गए। वीडियो में वे विपक्षी खिलाड़ी की तरफ आक्रामक रूप से बढ़ते और धक्का देते हुए दिखे थे। स्थिति बिगड़ती देख भारतीय साथी खिलाड़ी सुर्यांश शेडगे ने तुरंत बीच-बीच-बचाव किया और वैभव को पकड़कर पीछे हटाया।

सोशल मीडिया पर बंटी क्रिकेट फैंस की राय

इस घटना के बाद से ही क्रिकेट फैंस और विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई है। कुछ फैंस का मानना है कि इतनी कम उम्र में और मैच के इतने करीबी मोड़ पर हार के बाद भावनाओं और गुस्से पर नियंत्रण खोना स्वाभाविक है। खेल के प्रतिस्पर्धी स्वभाव के कारण ऐसा हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ, क्रिकेट के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि चाहे खिलाड़ी कितना भी युवा या प्रतिभाशाली क्यों न हो, उसे खेल की मर्यादा और उच्च खेल भावना के मानकों का पालन हर हाल में करना ही चाहिए।

आधिकारिक रुख: इस पूरे घटनाक्रम और विवाद पर अभी तक न तो भारतीय टीम प्रबंधन की ओर से और न ही मैच रेफरी या अंपायरों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।

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