किंग अब सुपर नहीं : अंतिम गेंद पर धोनी नहीं मार सके 6 और हार गया चेन्नई
Chennai Super Kings vs Rajasthan Royals, 17th Match: संदीप ने तीन सटीक यॉर्कर डाले और धोनी का गेम ओवर हो गया। संदीप ने एक बार फिर साबित किया कि परफेक्ट यॉर्कर ही डेथ ओवर का अमोघ अस्त्र है।

CSK vs RR, 17th Match, Indian Premier League 2023: चेन्नई सुपर किंग्स को जीत के लिए अंतिम गेंद पर छक्का चाहिए था लेकिन भारत के महान फिनिशर महेन्द्र सिंह धोनी ऐसा करने से चूक गये। इसकी वजह से चेन्नई मैच हार गया। इस ओवर में धोनी दो छक्का मार चुके थे। लेकिन जब टीम को एक और छक्के की जरूरत थी तब वो वो सिर्फ 1 रन बना पाये। उन्हें गेंद डाल रहे थे राजस्थान के संदीप शर्मा। संदीप की स्पीड कुछ खास तेज नहीं थी। लेकिन क्या कमाल के यॉर्कर डाले। संदीप ने तीन सटीक यॉर्कर डाले और धोनी का गेम ओवर हो गया। संदीप ने एक बार फिर साबित किया कि परफेक्ट यॉर्कर ही डेथ ओवर का अमोघ अस्त्र है।
अश्विन और चहल की कसी हुई गेंदबाजी
दरअसल चेन्नई को अंतिम ओवर में इतना बड़ा टारगेट (21 रन) इसलिए मिला क्योंकि अश्विन और युजवेन्द्र चहल ने अपनी कसी हुई गेंदबाजी से रनों का अकाल ला दिया था। 15वें ओवर में चहल ने दो विकेट लिये और 10 रन दिये। 16वें ओवर में अश्विन ने केवल 4 रन दिये। 17वें ओवर में चहल ने केवल 5 रन दिये। इसकी वजह से चेन्नई को 18 गेंदों पर 54 रन बनाने की नौबत आ गयी। डेथ ओवरों में चहल और अश्विन ने मैच पलट कर राजस्थान की तरफ मोड़ दिया। 18वें ओवर में 14 रन बने। अब धोनी और जडेजा के सामने दो ओवरों में 40 रन बनाने की चुनौती थी। 19वें ओवर में जडेजा ने होल्डर पर दो छक्के और एक चौका मारा और कुल 19 रन बने। इसके बावजूद चेन्नई का काम आसान नहीं हुआ क्यों अंतिम ओवर में 21 रन बनाना अगर मुश्किल नहीं तो आसान भी नहीं था।
चेन्नई को अंतिम ओवर में चाहिए थे 21 रन
राजस्थान बनाम चेन्नई का मैच। चेन्नई को जीत के लिए अंतिम ओवर में 21 बनाने थे। धोनी स्ट्राइक पर थे। संदीप शर्मा अंतिम ओवर डाल रहे थे। उन पर दबाव था कि वे किसी तरह धोनी को 21 रन बनाने से रोकें। जब तनाव बढ़ जाता है तो दिलोदिमाग को काबू में रखना मुश्किल हो जाता है। दबाव में संदीप शर्मा ने लगातार दो वाइड गेंद डाल दी। ओवर की गिनती भी शुरू नहीं हुई और चेन्नई के 2 रन भी बन गये। अब 6 गेंदों पर 19 रन ही बनाने थे। ओवर की पहली वैध गेंद पर धोनी कोई रन नहीं बना पाये। लेकिन संदीप की दूसरी और तीसरी गेंद पर धोनी ने दो छक्के मार कर मैच चेन्नई की तरफ मोड़ दिया। अब 3 गेंदों पर केवल 7 रन बनाने थे।
ऐन वक्त पर चूके धोनी
धोनी के दो छक्कों के बाद यह प्रतीत होने लगा कि आज वह रिंकू सिंह और निकोलस पूरन की तरह फिर एक करिश्माई पारी खेलने वाले हैं। आम तौर पर कोई गेंदबाज जब अंतिम ओवर में दो छक्के खा लेता है तो असका आत्मविश्वास टूट जाता है। नर्वस होने के कारण वह लाइन और लेंथ पर नियंत्रण खो देता है। लेकिन संदीप शर्मा के साथ ऐसा नहीं हुआ। दो छक्कों की चोट ने उनकी ताकत को जगा दिया। उन्होंने धोनी के नाम और रुतबे की परवाह नहीं की। संदीप ने अपने अनुभव और क्षमता को एक साथ समेटा और चौथी गेंद डाली। यॉर्कर लेंथ की इस गेंद पर शॉट खेलने के लिए बिल्कुल रूम नहीं था। मजबूरी में धोनी इसे सिर्फ डीप मिड विकेट की तरफ ही ढकेल पाये और 1 रन लिया। रन दौड़ते समय लगा कि धोनी पूरी तरह फिट नहीं हैं।
संदीप के पिन प्वाइंट यॉर्कर पर धोनी बेबस
अब संदीप के सामने जडेजा थे। वे 19वें ओवर में दो छक्का और एक चौका मार चुके थे। अब दो गेंद पर 6 रन बनाना था। जडेजा अगर छक्का मार देते तो चेन्नई मैच जीत जाता। लेकिन दाद देनी होगी संदीप शर्मा की। उन्होंने क्या गजब की यॉर्कर डाली। बिल्कुल पिन प्वाइंट यॉर्कर। जडेजा क्या बड़ा से बड़ा बल्लेबाज भी इस पर चौका या छक्का नहीं मार सकता था। जडेजा ने इस गेंद को खोद कर निकाला और कवर की तरफ ढकेल दिया। एक रन मिला। अब संदीप की अंतिम गेंद पर धोनी को जीतने के लिए पांच रन बनाने थे। मैच टाई करने के लिए चौका चाहिए था। संदीप ने पहले से भी खूबसूरत यॉर्कर डाली। धोनी जैसा धाकड़ भी कुछ नहीं कर सका। धोनी ने गेंद के नीचे आने की कोशिश की लेकिन जगह इतनी कम थी कि कोई बड़ा प्रहार नहीं किया जा सकता था। वे गेंद को बस डीप मिड विकेट की तरफ ही घसीट पाये। धोनी न छक्का मार पाये न चौका, बस 1 रन ही ले पाये। धोनी के फेल होते ही चेन्नई मैच हार गया।
धोनी अब डूबते हुए सूरज
सूर्य का अगर उदय होता है तो अस्त भी होता है। हर महान खिलाड़ी एक न एक दिन ढलान पर आता ही है। अब मान लेना चाहिए कि भारत के महान क्रिकेटर महेन्द्र सिंह धोनी अब डूबते हुए सूरज बन चुके हैं। अब उनका हेलीकॉप्टर भी उड़ान भरने की स्थिति में नहीं है। अगर उनका हेलीकॉप्टर ठीक रहता तो वे यॉर्कर पर भी छक्का मारे देते। कई बार मार भी चुके हैं। एक गौरवशाली खिलाड़ी को मैदान पर बेबस देखकर अच्छा नहीं लगा। उन्होंने जिस शान से टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा था उसी शान से अब आइपीएल को भी अलविदा कह देना चाहिए। वक्त से भला कौन जीत पाया है।












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