बर्थडे बॉय मोहम्मद सिराज ने सालों बाद किया खुलासा, 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भीड़ ने उन्हें कहा था 'ब्रा
मोहम्मद सिराज का आज 29वां जन्मदिन है। इस मौके पर उनका एक इंटरव्यू जारी हुआ है, जिसमें उन्होंने बताया है कि 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वो नस्लभेदी टिप्पणी का शिकार हुए थे।

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के आखिरी टेस्ट मैच के लिए टीम इंडिया से बाहर किए गए तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज का आज जन्मदिन है। अपने 29वें जन्मदिन के मौके पर सिराज ने एक लेटेस्ट इंटरव्यू में दो साल पहले का एक वाक्या शेयर किया है, जहां सिराज नस्लभेदी टिप्पणी का शिकार हुए थे। सिराज के साथ यह दुर्व्यवहार 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में हुआ था, जो ऑस्ट्रेलिया में खेली गई थी। सिराज का इस दौरे पर टेस्ट डेब्यू हुआ था। इस सीरीज के तीसरे टेस्ट मैच में मोहम्मद सिराज नस्लभेदी टिप्पणी का शिकार हुए थे। यह टेस्ट मैच सिडनी में आयोजित हुआ था।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने मांगी थी माफी
मोहम्मद सिराज ने एक इंटरव्यू में बताया है कि सिडनी टेस्ट में भीड़ ने उनपर नस्लभेदी टिप्पणी की थी। दर्शकों के इस व्यवहार के बाद ऑन फील्ड अंपायरों ने उनकी टीम को टेस्ट मैच बीच में ही छोड़ने का विकल्प दिया था। सिराज के साथ-साथ जसप्रीत बुमराह भी इस दुर्व्यवहार का शिकार हुए थे। बाद में भारतीय टीम मैनेजमेंट ने मैच रेफरी डेविड बून के पास इसकी शिकायत दर्ज कराई थी और फिर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने इसको लेकर माफी भी मांगी थी। बता दें कि सिराज को इस मैच के दौरान 'ब्राउन मंकी' कहा गया था। उन्होंने उस मैच में टीम के कप्तान अजिंक्य रहाणे को इस बारे में बताया था। रहाणे ने इस मामले को फील्ड अंपायर के सामने रखा था।
उस समय सिराज के पिता का हुआ था निधन
सिराज ने कहा है, "जब मुझे ऑस्ट्रेलिया में एक काला बंदर और उस तरह की चीजें कही गईं तो मैंने पहले दिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया, यह सोचकर कि लोग नशे में हैं, लेकिन जब यह दूसरे दिन हुआ, तो मैंने अंपायरों के पास जाने और नस्लवाद की शिकायत करने का फैसला किया। और मैंने इसे अज्जू भाई (अजिंक्य रहाणे) को बताया, जो अंपायरों के पास गए। इस शिकायत के बाद खेल को रोका गया था और 6 दर्शकों को स्टेडियम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।
आपको बता दें कि सिराज के लिए वो समय वैसे ही बहुत मुश्किल था, क्योंकि उस वक्त सिराज के पिता का निधन हुआ था, लेकिन वो ऑस्ट्रेलिया में होने की वजह से अपने पिता के इंतकाल में नहीं गए थे। वो दो महीने बाद सीधा कब्रिस्तान गए थे। ऐसा नहीं है कि मोहम्मद सिराज को उस वक्त भारत लौटने का विकल्प नहीं दिया गया था, लेकिन उन्होंने टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहने का विकल्प चुना।












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