BCCI और IPL टीमों को हर साल 2400 करोड़ का नुकसान! आखिर कैसे काम करता है आईपीएल का बिजनेस मॉडल?

IPL 2026, How Business model work: आईपीएल 2026 (IPL 2026) में अब तक कई रोमांचक मुकाबले खेले जा चुके हैं। पैसों के मामले में आईपीएल को दुनिया की सबसे बड़ी लीग कहा जाता है। इस बीच आईपीएल के संस्थापक और पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और आईपीएल फ्रेंचाइजी के मौजूदा बिजनेस मॉडल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आईपीएल से हर साल खिलाड़ियों के साथ-साथ टीमों को भी करोड़ों का फायदा होता है।

ललित मोदी का बड़ा दावा (IPL 2026 2026, How Business model work)

ललित मोदी का दावा है कि लीग के होम-अवे फॉर्मेट का पूरी तरह पालन न करने की वजह से बीसीसीआई और 10 टीमों को हर सीजन करीब 2400 करोड़ रुपये के रेव्यू की चपत लग रही है। ललित मोदी ने कहा कि जब आईपीएल में 10 टीमें शामिल की गईं, तब नियम के मुताबिक हर टीम को दूसरी टीम के साथ दो मैच (एक अपने घर में और एक विपक्षी के मैदान पर) खेलने चाहिए थे।

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आईपीएल को किस तरह हो रहा नुकसान?

इस फॉर्मेट के हिसाब से कुल 94 मैच होने चाहिए, लेकिन बीसीसीआई फिलहाल केवल 74 मैच ही आयोजित कर रहा है। मोदी का कहना है कि इन 20 मैचों का आयोजन न होने से मीडिया राइट्स और स्पॉन्सरशिप से मिलने वाला बड़ा हिस्सा डूब रहा है। ललित मोदी ने राजस्व के बंटवारे का गणित समझाते हुए बताया कि इस चूक का सीधा असर टीमों की वैल्यू पर पड़ रहा है।

BCCI के साथ-साथ टीमों को भी हो रहा है नुकसान

मौजूदा समय में एक आईपीएल मैच के मीडिया राइट्स की कीमत करीब 118 करोड़ रुपये है। अगर 20 मैच और होते तो सीधे तौर पर 2400 करोड़ रुपये अतिरिक्त आते। इस राशि का 50% (1200 करोड़) बीसीसीआई को मिलता और बाकी 1200 करोड़ 10 टीमों में बंटते। यानी हर फ्रेंचाइजी को हर साल 120 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुनाफा होता। ललित मोदी ने स्पष्ट किया कि दुनिया की किसी भी अन्य लीग से आईपीएल को कोई खतरा नहीं है, लेकिन इसके आर्थिक पक्ष को और मजबूत करने के लिए पूरे 94 मैचों का आयोजन जरूरी है।

कैसे होती है आईपीएल में कमाई

साल 2008 में करोड़ों में शुरू हुआ आईपीएल आज अरबों डॉलर का साम्राज्य बन चुका है। राजस्थान रॉयल्स और आरसीबी जैसी टीमों की वैल्यू अब 1.6 से 1.8 बिलियन (करीब 15,000 करोड़ रुपये) तक पहुंच गई है। हर साल आईपीएल में बीसीसीआई मीडिया राइट्स और टाइटल स्पॉन्सरशिप से करीब 5,500 करोड़ की कमाई होती है। इसका 50% हिस्सा सभी 10 टीमों में बराबर बांटा जाता है। यह किसी भी टीम की कुल कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा होता है।

टीमें खुद के स्पॉन्सर्स (जर्सी पर दिखने वाले ब्रांड), टिकटों की बिक्री और मर्चेंडाइज के जरिए अतिरिक्त रेवेन्यू जेनरेट करती हैं। खर्चों में खिलाड़ियों की फीस और ऑपरेटिंग खर्च मुख्य हैं। पुरानी टीमें अपनी कमाई का 20% हिस्सा बीसीसीआई को फीस के रूप में देती हैं। इसके बावजूद सीएसके और आरसीबी जैसी टीमें 37-40% का शानदार मुनाफा कमा रही हैं, जो ग्लोबल स्पोर्ट्स मार्केट में सबसे ज्यादा है।

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