IPL के बीच रोहित शर्मा: यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिंदगी...

टीम इंडिया कप्तान रोहित शर्मा गरीबी और आभाव से लड़कर इस मुकाम पर पहुंचे हैं। सफलता कितनी मेहनत और तपस्या के बाद मिलती है, रोहित शर्मा से बेहतर कोई नहीं जानता। उनके पिता एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के गोदाम के केयरटेकर थे।

Rohit Sharma

टीम इंडिया और मुम्बई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा अपने दोस्तों को कभी भूलते नहीं। आइपीएल के दौरान जब रोहित ने मुम्बई के एक बड़े होटल में अपने जन्मदिन की पार्टी दी तो उसमें हरभजन सिंह और प्रज्ञान ओझा को भी आमंत्रित किया। इनकी दोस्ती दिल के तारों से जुड़ी हुई है। हरभजन और रोहित की दोस्ती तब से है जब वे एक साथ मुम्बई इंडियंस के लिए खेलते थे।

हरभजन मुम्बई की टीम से अगल हो कर चेन्नई के लिए भी खेले। लेकिन दोनों की दोस्ती पहले की तरह बरकरार रही। हरभजन सिंह अब आइपीएल से भी रिटायर हो चुके हैं। वे पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य हैं। लेकिन आज भी रोहित और हरभजन गहरे दोस्त हैं। ऐसा नहीं है कि हरभजन, हमेशा रोहित की तारीफ ही करते हैं। वे समय समय पर रोहित के खेल और कप्तानी की आलोचना भी करते रहे हैं। फिर भी दोनों एक दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं।

हरभजन- रोहित हीरा हैं हीरा ! बार-बार मिलना चाहेंगे
करीब एक हफ्ता पहले ही सांसद हरभजन सिंह ने बताया था कि वे रोहित शर्मा के बारे में क्या सोचते हैं ? क्रिकेट कमेंट्रेटर जतिन सप्रू ने हरभजन सिंह से एक सवाल किया, एक व्यक्ति के रूप में आप रोहित शर्मा का आंकलन कैसे करते हैं? तब हरभजन सिंह ने कहा, उनकी शानदार बैटिंग की तो हर कोई तारीफ करता है। लेकिन रोहित एक इंसान के रूप में और भी बेहतर हैं। मेरी नजर में आज जितने भी क्रिकेटर खेल रहे हैं उनमें रोहित शर्मा जैसा सुलझा हुआ इंसान कोई नहीं है। वह हीरा है हीरा!

उन्होंने कहा कि, आज भी वह अपने पुराने दोस्तों को अपने साथ रखता है। वह अपने से बड़ों का सम्मान करता है। आपकी पहचान इस बात से बनती है कि आप दूसरे के सामने किस तरह से पेश आते हैं। इस मामले में रोहित का कोई जवाब नहीं। रोहित एक ऐसा लड़का है जिससे आप बार-बार मिलना चाहेंगे। पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने भी हरभजन सिंह की बात का समर्थन किया। जतिन सप्रू के कार्यक्रम में दोनों एक साथ बैठे थे। इससे समझा जा सकता है कि रोहित और हरभजन की दोस्ती कितनी मजबूत है।

पिता की सीख हमेशा याद रहती है- रोहित
रोहित शर्मा गरीबी और आभाव से लड़कर इस मुकाम पर पहुंचे हैं। सफलता कितनी मेहनत और तपस्या के बाद मिलती है, रोहित शर्मा से बेहतर कोई नहीं जानता। उनके पिता एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के गोदाम के केयरटेकर थे। उनकी आमदानी बहुत ही कम थी। बहुत संघर्ष के बाद रोहित क्रिकेट खिलाड़ी बने। इस संघर्ष की यादें ही उन्हें जमीन से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करती हैं।

साल 2017 में रोहित ने एक इंटरव्यू में बताया था, 'मेरे पिता हमेशा एक बात मुझसे कहते थे, इस बात का कोई महत्व नहीं कि तुम क्रिकेट के किस स्तर पर खेल रहे हो, महत्व इस बात है कि तुम कितने अच्छे इंसान हो। पिता जी के ये बात मेरे दिमाग में बैठ गयी है। मैं मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए जितना उत्सुक रहता हूं उससे ज्यादा उत्सुक मैं मैदान के बाहर अपने व्यवहार को लेकर रहता हूं। मैं एक साधारण परिवार से आया हूं, इस बात को मैं कभी भूल नहीं सकता।'

रोहित के गहरे दोस्त प्रज्ञान ओझा भी आये बर्थडे पार्टी में
रोहित की इस बर्थडे पार्टी में प्रज्ञान ओझा भी आये थे। प्रज्ञान और रोहित ने डेक्कन चार्जर्स, मुम्बई इंडियंस और भारत के लिए एक साथ क्रिकेट खेला है। दोनों की दोस्ती 15 साल पुरानी है। मौजूदा आइपीएल के शुरू होने के पहले प्रज्ञान ओझा ने रोहित शर्मा के संघर्ष की एक बहुत मार्मिक कहानी सुनायी थी। प्रज्ञान ओझा जियो सिनेमा के कार्यक्रम में बताया था, मैं रोहित से पहली बार अंडर-15 के नेशनल कैंप में मिला था। कैंप में हर कोई रोहित के बारे में एक ही बात कर रहा था, इस बार एक स्पेशल खिलाड़ी खेलने आया है।

रोहित बहुत ज्यादा बात नहीं करते थे लेकिन उनके खेलने की शैली बहुत आक्रामक थी। फिर हम डेक्कन चार्जर्स, मुम्बई इंडियंस और भारत के लिए एक साथ खेले। इसके बाद हमारी गहरी दोस्ती हो गयी। हम अपने दिल की बात भी शेयर करने लगे। एक बार यूं ही बैठे हुए क्रिकेट किट की बात हो रही थी। तब रोहित अचानक इमोशनल हो गये। तब उन्होंने मुझे बताया, एक समय मेरे पास क्रिकेट किट खरीदने के लिए पैसे नहीं होते तब। तब पैसा जुटाने के लिए मैं घर-घर जा कर दूध के पैकेट डिलिवर करता था। इसके बाद ही क्रिकेट किट खरीद पाया था। प्रज्ञान ने अपनी बाता का अंत इस तरह किया, आज रोहित को इतनी ऊंचाई पर खड़े देख कर मुझे बहुत खुशी होती है।

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