भारत के इस खिलाड़ी की स्थिति देख दुखी हुए शास्त्री, बोले- उसका हाल भी जडेजा जैसा हो गया
नई दिल्ली, 24 मई: आईपीएल 2022 में पंजाब किंग्स का अभियान आधी जीत और आधी हार के साथ समाप्त हो गया। इस टीम के कप्तान मयंक अग्रवाल है और इस युवा खिलाड़ी के अंदर भविष्य के कप्तान की काफी संभावनाएं टटोली जा रही थी लेकिन इस सीजन में मयंक अग्रवाल ना बल्लेबाज के तौर पर ज्यादा बेहतर दिखाई दिए और ना ही एक कप्तान के तौर पर।

पंजाब किंग्स के कप्तान
मयंक ओपनिंग के लिए भी आते थे उनको बाद में टीम संयोजन को देखते हुए अपने बैटिंग ऑर्डर में भी तब्दीली करनी पड़ी। पंजाब किंग्स अपना अंतिम लीग मुकाबला जीतने में कामयाब रही लेकिन सात हार के साथ उनके पास अंक तालिका में 14 अंक ही है।
सच यह है कि पंजाब किंग्स की टीम में कई बड़े बल्लेबाजों का प्रदर्शन ना करना उनकी परफॉर्मेंस पर नतीजे डालता हुआ दिखाई दिया और इनमें कप्तान अग्रवाल भी एक है।
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इस सीजन में कुछ नहीं कर पाए
मयंक अग्रवाल 31 साल के खिलाड़ी हैं और उन्होंने 16.33 के खराब औसत के साथ बल्लेबाजी की। 12 पारियों में 196 रन ही बना पाए और भारत के पूर्व कोच रवि शास्त्री का मानना है कि मयंक अग्रवाल द्वारा टीम के लीडर की मयंक अग्रवाल द्वारा निभाई गई टीम के लीडर की भूमिका ने उनकी बल्लेबाजी पर भी असर डाला है।
पूर्व कोच ने कहां है कि इसकी वजह से शायद मयंक अग्रवाल भारत की सफेद या लाल गेंद टीम में जगह नहीं बना पाए जो रविवार को घोषित हुई थी। रवि शास्त्री ईएसपीएन क्रिकइंफो के एक शो पर बात करते हुए कहते हैं कि मयंक अग्रवाल रवींद्र जडेजा वाली नाव पर ही सवार थे।

कप्तानी भारी पड़ी, टीम इंडिया की जगह भी दांव पर
यह वे खिलाड़ी हैं जिन्होंने कभी भी अपनी टीम की कप्तानी नहीं की। यहां पर आप पूरी टीम की कमान उनको सौंप देते हो। मयंक अग्रवाल के लिए मेरे अंदर कोई इज्जत कम करने वाले शब्द नहीं है क्योंकि मैं उनको पसंद करता हूं। मुझे पता है वे कैसे क्रिकेट खेलते हैं और कितने अच्छे हैं। लेकिन अगर आप एक ऐसे खिलाड़ी को कप्तानी की जगह पर डाल देते हैं तो दिक्कत होती है। बहुत ही गंभीर दिक्कतें भी हो सकती है। हो सकता है कि भारतीय टीम में अपनी जगह गंवा दें।

आपने जडेजा के साथ देखा क्या हुआ
शास्त्री कहते हैं कि, सेलेक्टर मौजूदा फॉर्म के आधार पर सेलेक्शन करेंगे। तो अग्रवाल के साथ जो हो रहा है उसकी तकलीफ वे महसूस करते हैं क्योंकि उनको पता है कि वे कितने अच्छे खिलाड़ी हैं। ये एक ऐसी चीज है किसी के भी दिमाग में अपना असर छोड़ता है। आपने जडेजा के साथ देखा क्या हुआ, यही मयंक अग्रवाल के साथ हुआ। यह भविष्य के लिए फ्रेंचाइजी को एक संदेश भी है कि वह थोड़ा स्मार्ट हो और अपने तरीके से अपने कप्तान को चुनाव करें।












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