'मुझे लगा कि दोबारा नहीं मिलेगा खेलने का मौका', IPL 2020 के फ्लॉप शो पर मैक्सवेल ने तोड़ी चुप्पी
नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग के 15वें सीजन का आगाज होने वाला है जिसमें आरसीबी के लिये ग्लेन मैक्सवेल एक बार फिर से शानदार पारी खेलने की तैयारी करते नजर आयेंगे। ग्लेन मैक्सवेल ने आईपीएल 2021 में आरसीबी के लिये शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 पारियों में 42.75 की औसत से 513 रन बनाये और आरसीबी के लिये सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। इसी की वजह से आरसीबी की टीम ने इस सीजन फिर से अपने खेमे में रिटेन किया है।

हालांकि ग्लेन मैक्सवेल के लिये उससे पहले का सीजन किसी बुरे सपने से कम नहीं था, जिसमें पंजाब किंग्स की ओर से खेलते हुए मैक्सवेल बुरी तरह फ्लॉप साबित हुए और पूरे सीजन में एक भी छक्का नहीं लगा सके। मैक्सवेल ने 15.52 की औसत से 13 मैचों में सिर्फ 108 रन ही बनाये थे। आईपीएल के इस सीजन में मैक्सवेल के औसत से भी खराब प्रदर्शन के चलते ज्यादातर फैन्स को यही उम्मीद थी कि अगली नीलामी में उन्हें कोई खरीदार नहीं मिलेगा, हालांकि ऐसा हुआ नहीं और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम ने उन्हें ₹14.25 करोड़ रुपये में खरीदा।

पंजाब के लिये पहले दो साल बेहद शानदार थे
मैक्सवेल अगले सीजन की तैयारियां कर रहे हैं जिससे पहले उन्होंने पंजाब किंग्स के लिये अपने 13वें सीजन को याद किया और बताया कि जब उनका सीजन खराब गुजरा था तो उन्हें खुद को उससे बाहर निकाल पाने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था।
आरसीबी के पोडकास्ट में बात करते हुए उन्होंने कहा,'मैं शायद 5 साल तक पंजाब के साथ रहा था और दो साल काफी अच्छे थे, मैं पहले साल लीग का मोस्ट वैल्यूएबल खिलाड़ी था और दूसरे साल कप्तान था, मैंने अच्छी प्रदर्शन करते हुए 300 से ज्यादा रन और 10 विकेट हासिल किये। मुझे लगा कि यह मेरा अच्छा साल था क्योंकि जब भी मैंने रन बनाये तो हमें जीत हासिल हुई। मुझे लगता है कि उस सीजन मैंने अधिकतम 46-47 रन की पारी 4-5 बार खेली थी। मैं कई मौकों पर नाबाद पारियां खेली और टीम को जीत दिलायी और मेरा रोल मैच फिनिश करना था। मुझे काफी खुशी थी क्योंकि मुझे जो रोल दिया गया था मैंने उसे पूरा किया। हालांकि इसके बाद मुझे रिलीज कर दिया गया।'

करियर का सबसे मुश्किल समय था
उल्लेखनीय है कि पंजाब से रिलीज किये जाने के बाद मैक्सवेल को दिल्ली की टीम ने खरीदा लेकिन उसके बाद उन्हें एक साल का गैप दिया गया। मैक्सवेल ने आगे बात करते हुए बताया कि पंजाब की टीम के लिये जो चीज उनकी बल्लेबाजी में गायब थी वो थी बीच के ओवर्स में मैदान पर समय बिताना और फिर अंत में तेजी से रन बनाना।
उन्होंने कहा,'वो सच में बहुत मुश्किल समय था, पिछले 2 साल अच्छे नहीं बीते थे और मैं लय हासिल करने में लगातार संघर्ष कर रहा था। उसके बाद वो साल सबसे बुरा सपना साबित हुआ। कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा था। टी20 क्रिकेट आपके लिये मुश्किल हो सकता है, खासतौर से तब जब आप मध्यक्रम के बल्लेबाज हो। आपको मध्यक्रम में बहुत ज्यादा खेलने का मौका नहीं मिल पाता है और जब आप निरंतरता से नहीं खेलते हैं तो कुछ भी ठीक नहीं जाता है। केएल राहुल और मयंक अग्रवाल बहुत सारे रन बना रहे थे, पूरन भी अच्छी खासी बल्लेबाजी कर रहे थे और कई बार मुझे खेलने को सिर्फ एक या दो ही ओवर मिलते थे।'

इस वजह से मुश्किल हुई पंजाब में बल्लेबाजी
मैक्सवेल ने आगे बात करते हुए कहा,'आप जितना चाहें खुद को ट्रेन कर सकते हैं लेकिन अगर आपके पास मैच के दौरान लय नहीं होती है तो आप आगे नहीं बढ़ सकते हैं। यह खुद को बतौर खिलाड़ी दोबारा ढूंढना काफी मुश्किल कर देता है। मैं हर मैच में जा रहा था तो लगा कि 6 महीने से बल्लेबाजी नहीं की। भले ही मैं हर रोज ट्रेनिंग कर रहा था लेकिन मुझे लय नहीं मिल रही थी। हमारे पास बहुत सारे टॉप ऑर्डर बल्लेबाज थे और हम गेल को भी ले आये थे जिसकी वजह से मेरा स्थान एक पायदान नीचे खिसक गया। मैं ऊपर जाकर खुद को बोला कि शायद मुझे दोबारा खेलने का मौका न मिले। मैं आंद्रे रसेल नहीं हूं जो पहली ही गेंद पर आते ही छक्का लगा दे, मुझे वक्त चाहिये होता है लेकिन पंजाब में मेरे लिये वो मुश्किल होता जा रहा था।'












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