'मैच्योर' हो गए कप्तान शिखर धवन, अब 'सम्मान' में किसी बॉलर को नहीं मिलेगा एक्स्ट्रा ओवर
कप्तानी आसान काम नहीं है और भारत के अनुभवी ओपनर शिखर धवन को ऐसे लगता है कि एक समय बिताने के बाद उनको कैप्टंसी में मैच्योरिटी मिलनी शुरू हो चुकी है। शिखर धवन रोहित शर्मा की अनुपस्थिति में भारत के वनडे कप्तान हैं और न्यूजीलैंड के खिलाफ शुक्रवार से शुरू हो रही तीन मैचों की ओडीआई सीरीज में टीम को लीड करेंगे। शिखर धवन का मानना है कि कप्तानी ऐसी चीज नहीं है जहां आप खिलाड़ियों के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर कोई फैसला लें बल्कि आपको टीम के आधार पर फैसला लेना होता है भले ही वह किसी खिलाड़ी को पसंद आए या फिर नहीं। (Photo- Shikhar Dhawan Instagram)

फैसले वो लिए जाएंगे जिससे टीम को फायदा पहुंचे
धवन बिंदास इंसान माने जाते हैं लेकिन उनका मानना है कि कप्तानी क्या चीज है वह यह बात अब अच्छे से समझ पा रहे हैं। वे श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत की वनडे कप्तानी कर चुके हैं और टीम को जीत दिला चुके हैं। समय गुजरने के साथ एक कप्तान अपनी गलतियों से सीखता है और उसमें अनुभव भी आता है। ऐसे ही धवन का मानना है कि उनमें भी ये बात आई है। क्रिकइंफो से बात करते हुए धवन कहते हैं कि पहले ऐसा भी होता था कि किसी गेंदबाज को सम्मान देने के लिए मैं एक ओवर उसे एक्स्ट्रा दे देता था लेकिन अब मैच्योरिटी आ गई है और फैसले वो लिए जाएंगे जिससे टीम को फायदा पहुंचे।

कप्तान के तौर पर संतुलन बनाएंगे
धवन का मानना है कि खिलाड़ियों से कब बात करनी है कितनी करनी है यह भी समय के साथ ही अनुभव के साथ आती है और उन्होंने तार वाले म्यूजिक इक्विपमेंट का उदाहरण दिया जिसमें तार को थोड़ा ज्यादा कस दिया जाए तो उसके टूटने का खतरा है और अगर कम तार खींचा जाए तो ध्वनि अच्छे से नहीं आएगी। ऐसे ही धवन कप्तानी को मानते हुए कहते हैं कि आपको एक संतुलन बनाना होता है। जहां पर कब तार कसना है और कब ढीला छोड़ना है यह समझना होता है। इसलिए धवन कहते हैं कि वह कप्तान के तौर पर संतुलन बनाएंगे और वह फैसला लेंगे जो टीम के हित में होगा ना कि किसी खिलाड़ी के ईगो को संतुष्ट करेंगे।

कब किससे कैसे बात करनी है यह भी काफी अहम है
हालांकि शिखर मानते हैं कि कब किससे कैसे बात करनी है यह भी काफी अहम है और ये इस पर भी निर्भर करता है कि आप किस लेवल पर कप्तानी कर रहे हो। इंटरनेशनल या आईपीएल में ऐसा कर रहे हो तो ज्यादातर खिलाड़ी मैच्योर होते हैं इसलिए आपको यह नहीं सोचना पड़ता है कब तार कसने या छोड़ने की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन जब आप रणजी खेलते हो तब मामला अलग हो सकता है क्योंकि खिलाड़ी बिल्कुल नए भी होते हैं और कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं जिनको ढालने के लिए आपको थोड़ा सख्त भी बनना पड़ सकता है। इसलिए क्रिकेट में कप्तानी एक ऐसी चीज है जो संतुलन मांगती है।












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