जब क्रिकेट छोड़ युद्ध लड़ने पहुंचा ये भारतीय शेर, हेमू अधिकारी के सामने अच्छे-अच्छे हो जाते थे ढेर
India-Pakistan War: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में ऑपरेशन सिंदूर के तहत नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए, लेकिन भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। इन सबके बीच आईपीएल 2025 को भी बीच में ही रोक दिया गया।
जानिए कौन हैं हेमू अधिकारी (India-Pakistan War)
भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी युद्ध हो चुके हैं, लेकिन हम आज आपको एक ऐसे क्रिकेटर के बारे में बताएंगे जो क्रिकेट छोड़कर युद्ध लड़ने चला गया था। हम यहां जिस क्रिकेटर की बात कर रहे हैं उनका नाम हेमू अधिकारी है। हेमू अधिकारी का जन्म 31 जुलाई, 1919 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने अपना खेल करियर 17 साल की उम्र में शुरू किया था। रणजी ट्रॉफी सीजन 1936-37 में वेस्टर्न इंडिया के खिलाफ गुजरात के लिए खेलते हुए। उन्होंने दोनों पारियों में शीर्ष स्कोर बनाया, अपनी टीम की हार में नंबर 3 पर बल्लेबाजी करते हुए 26 और 30 रन बनाए।

क्रिकेट छोड़ चले गए थे युद्ध लड़ने
द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ने तक अधिकारी ने खुद को एक बेहतरीन क्रिकेटर के रूप में स्थापित कर लिया था। लेकिन युद्ध छिड़ने और भारतीय सशस्त्र बलों में उनकी भूमिका के कारण उनके करियर में रुकावट आई और उनकी इंटरनेशनल डेब्यू में देरी हुई। जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर टेस्ट डेब्यू करने की बारी आई तो उन्होंने इस सुनहरे अवसर को छोड़ भारतीय आर्मी के साथ जुड़ कर देश सेवा को सर्वोपरि माना था। ऐसा कहा जाता है कि हेमू अधिकारी के सामने अच्छे-अच्छे दुश्मन ढेर हो जाते थे।
ऐसा करने वाले बने पहले खिलाड़ी
भारतीय सेना में राष्ट्रीय कर्तव्य संभालने के बाद अधिकारी घरेलू क्रिकेट में सर्विसेज टीम में चले गए। इस तरह, वह भारतीय क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले सर्विसेज खिलाड़ी बन गए। साल 1952 के दौरान दिल्ली में पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट में भारत 180 रन पर 6 विकेट खो चुका था। यह तब हुआ जब अधिकारी ने 81 रन की नाबाद पारी खेली और गुलाम अहमद के साथ आखिरी विकेट के लिए 109 रन जोड़े, जो लगभग 50 साल तक आखिरी विकेट के लिए भारतीय रिकॉर्ड बना रहा। इसके बाद सचिन तेंदुलकर और ज़हीर खान ने 2004-05 में ढाका में बांग्लादेश के खिलाफ़ 133 रन जोड़े थे।
साल 1956-57 के सीजन में अधिकारी सर्विसेज को रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचाने वाले पहले कप्तान बने। उन्होंने अगले साल भी यह कारनामा दोहराया। आज तक ये दो ही मौके हैं जब सर्विसेज ने रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जगह बनाई। हालांकि, दोनों मौकों पर टीम को क्रमशः बॉम्बे और बड़ौदा से हार का सामना करना पड़ा।












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